बेहद ख़ास होती है ट्रैन की हेडलाइट! जानिए क्यों लगी होती है लाल और सफेद रंग की दो-दो लाइटें?

क्यों लगी होती है लाल और सफेद रंग की दो दो लाइटें जानिए

बेहद ख़ास होती है ट्रैन की हेडलाइट! क्यों लगी होती है लाल और सफेद रंग की दो-दो लाइटें? जानिए। आये दिन कई सारे चीजे हमारे सामने हर दिन होती है परन्तु वह चीज किसके लिए दी जाती है इसका हमें कुछ पता नहीं होता। ऐसे ही हम कई सारे रोचक तथ्यों से घिरे हुए है। क्या आपको बता है कि ट्रेन की हेडलाइट में कितने बल्ब लगे होते हैं? अगर नहीं तो हम आपको बता दें कि पहले से चली आ रही व्यवस्था के मुताबिक किसी ट्रेन की हेडलाइट में दो बल्बों का प्रयोग किया जाता है.


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क्या आपको पता है ट्रैन की हेडलाइट के बारे में

हाल ही में कुछ चीजे हमे मालूम नहीं होती है परन्तु वह हमारे सामने हर दिन रहती है। ऐसे ही आपको पता नहीं होगा की नयी बाइक्स की हेडलाइट हमेशा चालू ही क्यों होती है। क्या आपको पता है ट्रैन की हेडलाइट के बारे में, बिना लाइट के ट्रैन एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा सकती है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अपनी रेल की हर अदा निराली है. इससे जुड़े कई फैक्ट्स हैं, जिनके बहुत से लोग अब तक अनजान हैं. ऐसे में आज बात ट्रेन में लगी हेड लाइट की.

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जानिए ट्रैन में कितनी तरह की लाइट लगी होती है

रेलवे की रिपोर्ट्स की माने तो ट्रेन के इंजन पर तीन तरह की लाइटें होती हैं. जिनमें से एक रास्ता देखने के लिए होती है, यानी मेन हेडलाइट और बाकी दो लाइटों में एक सफेद और एक लाल रंग की होती है. इन लाइटों को लोकोमोटिव इंडीकेटर कहते हैं. पहले हेडलाइट को लोकोमोटिव में ऊपर की तरफ लगाया जाता था. हालांकि, अब नए इंजनों में हेडलाइट की जगह बदलकर बीच में कर दी गई है.

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जानिए कितना होता है ट्रैन की लाइट का फोकस

ट्रेन के इंजन में लगी हेडलाइट को 24volt के DC करंट से चलाया जाता है. इसका फोकस करीब 350-400 मीटर की दूरी तक पड़ता है. इस पावरफुल हेडलाइट की वजह से लोको पायलट को रात में एक निश्चित दूरी तक रेलवे ट्रैक एकदम साफ-साफ यानी क्लियर दिखाई पड़ता है. 

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क्या आपको बता है कि ट्रेन की हेडलाइट में कितने बल्ब लगे होते हैं?

अगर नहीं तो हम आपको बता दें कि पहले से चली आ रही व्यवस्था के मुताबिक किसी ट्रेन की हेडलाइट में दो बल्बों का प्रयोग किया जाता है. इसमें इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की सबसे खास बात ये है कि इन दोनों बल्बों को Parallel यानी समांतर क्रम में कनेक्ट किया जाता है. ताकि रास्ते में अगर एक बल्ब खराब भी हो जाए, तो दूसरे बल्ब की मदद से रास्ता देखा जा सके. यानी रात में ट्रेन के संचालन पर असर न पड़े.

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ट्रैन में क्यों लगी होती है लाल और सफेद रंग की दो-दो लाइटें

ट्रेन के इंजन में हेडलाइट के अलावा लाल और सफेद रंग की दो-दो लाइटें साथ में ही लगी होती हैं. ये व्यवस्था इसलिए क्योंकि जब इंजन को शंटिंग के लिए उल्टी दिशा में चलाना होता है, तब उस समय लाल रंग की लाइट को ऑन किया जाता है. इससे रेल स्टाफ यह जान जाता है कि लोकोमोटिव शंटिंग के लिए उल्टी दिशा में जा रहा है. वहीं, जब इंजन शंटिंग के लिए आगे की तरफ जाता है तो उसमें लगी सफेद रंग की लाइट को ऑन किया जाता है.

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