भारत ही नहीं विदेशों में भी है इस मसाले की तगड़ी डिमांड,इसकी खेती कर किसान 6 महीने में बन जायेगे अमीर,जाने तरीका

images 2023 04 25T124618.114

मसालों के उपयोग के बिना खाना अच्छा नहीं बनता है और भारत हो या विदेश मसालों की मांग बनी रहती है. भारत में बड़े पैमाने पर मसालों का उपयोग किया जाता है क्योंकि भारत में शादी विवाह हो या फिर नॉर्मल खाना मसालों के बिना कोई काम नहीं हो पाता है.


भारत ही नहीं विदेशों में भी है इस मसाले की तगड़ी डिमांड,इसकी खेती कर किसान 6 महीने में बन जायेगे अमीर,जाने तरीका

भारत ही नहीं विदेशों में भी है इस मसाले की तगड़ी डिमांड,इसकी खेती कर किसान 6 महीने में बन जायेगे अमीर,जाने तरीका

Also Read:₹10000 खर्च करके शुरू करें इस फल की खेती,हर महीने होगी लाखों रुपए की कमाई,मालामाल हो जाएंगे किसान

भारत से मसालों का सप्लाई विदेशों में किया जाता है क्योंकि भारतीय मसालों की मांग लगातार बनी रहती है. आपको बता दें कि भारत में कई तरह के ऐसे मसाले हैं जो कि अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम तक सप्लाई किए जाते हैं. अंग्रेजों के समय से और पुर्तगाल जब भारत में आए थे तब से ही भारत से मसालों का सप्लाई विदेशों में किया जाने लगा.

आज हम आपको जिस मसाले के बारे में बताने वाले हैं उस मसाले की खेती भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी की जाती है लेकिन भारत में इसकी मांग काफी जाता है. हम बात कर रहे हैं अजवाइन की खेती के बारे में.

भारत ही नहीं विदेशों में भी है इस मसाले की तगड़ी डिमांड,इसकी खेती कर किसान 6 महीने में बन जायेगे अमीर,जाने तरीका

images 2023 04 25T124635.583

बता दे कि अजवाइन की खेती के लिए गर्मी का मौसम उपयुक्त नहीं होता है बल्कि इसके लिए सर्दियों का मौसम उपयुक्त होता है क्योंकि उस समय मिट्टी में नमी बनी रहती है.

अजवाइन की फसल 160 दिनों में तैयार हो जाती है और सबसे बड़ी बात है कि अजवाइन की जो फसल होती है उसकी ऊंचाई ज्यादा नहीं होती है बल्कि 110 सेंटीमीटर होती है. इस खेती की मांग इसलिए भी हमेशा बनी रहती है क्योंकि हमेशा ज्वाइन की बिकने वाली रेट 15000 क्विंटल होती है.

images 2023 04 25T124625.109

किसान भाई कैसे करें अजवाइन के खेत की तैयारी

हरदोई के जिला उद्यान अधिकारी सुरेश कुमार ने बताया कि अजवाइन की फसल के लिए खेत तैयार करने के पहले उसे 15 टन प्रति हेक्टेयर गोबर की खाद डालते हुए मिट्टी पलटने वाले हल से जुताई कर पाटा लगाकर मिट्टी को भुरभुरा बना लिया जाता है. एक हेक्टेयर में 45 किलोग्राम नाइट्रोजन और उतनी ही फास्फोरस खेत में डाली जाती है. उसके बाद आवश्यकता अनुसार पोटाश का भी प्रयोग किया जाता है. एक हेक्टेयर में करीब 5