PFI का पॉलिटिकल कनेक्शन, अहमद बेग की UAPA के तहत गिरफ्तारी, लड़ चुका है चुनाव

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उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और मदेयगंज पुलिस की संयुक्त टीम ने गुरुवार देर रात खदरा में मक्का गंज मस्जिद के पीछे छापेमारी कर एसडीपीआइ (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया) के नेता मो. अहमद बेग को धर दबोचा. अहमद अपने नुमाइंदों और पार्टी के लोगों के जरिए देश में विद्रोह फैलाने की साजिश रच रहा था. उसके पास से लैपटॉप, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में तमाम तरह के राष्ट्र विरोधी दस्तावेज मिले हैं. अहमद बेग ने साल 2022 विधानसभा चुनाव में कैसरगंज विधानसभा से चुनाव भी लड़ा था. एक पत्नी को तलाक दे चुका है. दूसरी पत्नी के साथ रह रहा है.

अहमद बेग हिंसक और आपराधिक गतिविधियों में शामिल था. उसने एनआरसी-सीएए के प्रदर्शन के दौरान भी जमकर बवाल और हिंसा कराई थी. इसके अलावा वह लव जिहाद, जबरन मतांतरण, मुस्लिम युवाओं को कट्टरपंथ बनाने और मनी लांड्रिंग के साथ ही प्रतिबंधित समूहों से संपर्क में रहता था. इतना ही नहीं वह राजस्थान, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, वेस्ट बंगाल, कर्नाटक, केरल और ओमान तक तकरीर करने जाता था. वह धार्मिक कट्टरता की पाठशाला चलाता था.

कोई टेलर तो कोई मौलाना

वहीं, यूपी से पकड़े गए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्य, कोई मौलवी तो कोई लॉ का छात्र और कोई टेलर का काम करता है. वहीं, एक बढ़ई का कारीगर है. सालों से जुड़े इन सभी के पीएफआई से तार सिमी (स्टुडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) आतंकवादी संगठन के बैन के बाद से ‘बी’ पार्टी बनकर पीएफआई उभरी है. अब पीएफआई भी रूप बदल रहा है. एजेंसियों से बचने के लिए पीएफआई ने अपने कई विंग तैयार किए हैं. नए-नए नामों से पीएफआई की नई रिंग तैयार की गई है. सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया, राष्ट्रीय महिला मोर्चा, कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, अखिल भारतीय राम परिषद, अखिल भारतीय कानूनी परिषद, हरिहर इंडिया फाउंडेशन नेशनल, कानपुर स्टेशन ऑफ ह्यूमन राइट आर्गेनाईजेशन, ऐसी कई संस्थाएं बनाई गई हैं, जोकि पीएफआई का हिस्सा माना जा रहा है. इसमें कई ऐसे लोग जुड़े हैं, जोकि कई तरह का काम करते हैं.

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा पकड़ा गया वसीम उर्फ बबलू, पीएफआई का उत्तर प्रदेश का अध्यक्ष है. उसने लखनऊ के साथ ही बाराबंकी, बहराइच, गोरखपुर, वाराणसी, कानपुर, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा में संगठन के नाम पर कई मीटिंग की. इसमें जुड़ने वालों को कट्टरता का पाठ पढ़ाने के साथ धर्म के नाम पर देश के माहौल खराब करने के लिए उकसाया. वसीम ने एआरसीआईएस के विरोध में भी जमकर हिस्सा लिया था. जिसके बाद वसीम एजेंसियों के निशाने पर आया.

ये है PFI की नई विंग के किरदार

बहराइच से गिरफ्तार किया गया करीमुद्दीन पेशे से यह कारपेंटर है और फर्नीचर का काम करता है. इसको पीएफआई से जुड़े 5 साल से ऊपर हो चुका है. वहीं, बाराबंकी से पकड़ा गया लॉ स्टूडंट नदीम वकालत की पढ़ाई कर रहा है. कई सालों से यह भी पीएफआई से जुड़ा हुआ है. कई बार पुलिस इसके घर पर छापा मार चुकी है. सीएए विरोधी दंगों में विमुख आरोपियों के नाम के आने के बाद गिरफ्तार हो चुका है. शामली से गिरफ्तार किया गया साजिद पेशे से मौलाना है, जोकि पीएफआई के लिए फंडिंग इकट्ठा करने का काम करता है. ब्रेनवाश का भी काम इसी को सौंपा गया है. मौलाना साजिद 2019 में भी गिरफ्तार हो चुका है, जिसके ऊपर दिए विरोधी दंगों में आपत्तिजनक पोस्टर बांटने का आरोप लगा था.

100 करोड़ से ज्यादा का लेनदेन

सूत्रों के मुताबिक, पीएफआई के बैंकों में करीब 100 करोड़ से ज्यादा की रकम का लेनदेन हुआ है. जिसको देने वालों के बारे में कोई जानकारी संगठन मुहैया नहीं करा पाया. यह रकम संगठन को हवाला और धर्म के नाम पर दी गई है एनआईए और एटीएस की जांच में सामने आया है कि फंड पीएफआई टेरर फंडिंग के इस्तेमाल कर रहा है इसके लिए प्रदेश के कई जिलों में सभा कर के युवाओं का ब्रेनवाश किया जा रहा है

16 साल पहले केरल में PFI का गठन

पीएफआई की स्थापना 16 साल पहले केरल में हुई थी. साल 1992 में अध्याय कांड के बाद इसकी सत्यता बड़ी साल 2001 में 9 बटा 11 हमले के बाद भारत की सीमा पर बैन लगने के बाद नवंबर 2006 में इसका आधिकारिक संगठन तैयार हो गया. यूपी में 2020 हाथरस में युवती से रेप के बाद धार्मिक हिंसा भड़काने में सिद्दीकी कप्पन जरवल वगैरा का जीके मसूद अहमद की गिरफ्तारी हुई.

वह इससे पहले पीएफआई का प्रदेश अध्यक्ष वसीम ने सीएए के विरोध के नाम पर साथियों के साथ पूरे प्रदेश में दंगा फैलाने की कोशिश की थी, जिसमें प्रदेश में 108 लोगों की गिरफ्तारी की गई है. जिनका पीएफआई से कनेक्शन माना जा रहा है. कई अहम दस्तावेज एनआईए द्वारा बरामद किया गया है.

106 गिरफ्तारियां की गई

पीएफआई के 106 नेताओं और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां हुई है. इनमें से एनआईए ने 45 लोगों को गिरफ्तार किया है, उसमें केरल में 19, तमिलनाडु में 11, कर्नाटक में सात, आंध्र प्रदेश में चार, राजस्थान में दो और यूपी और तेलंगाना में एक-एक गिरफ्तारी की है. बाकी और राज्यों की पुलिस ने 61 लोगों को गिरफ्तार किया है. एनआईए ने जो 5 एफआईआर दर्ज की है, उसमें यूएपीए लगाया गया है. छापेमारी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, नकदी, धारदार हथियार और बड़ी संख्या में डिटेल उपकरण जब किए गए हैं.