‘भारत जोड़ो यात्रा’ से बदलेंगे हालात, राहुल गांधी की छवि को मिलेगा नया आयाम, बोले जयराम रमेश

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि हमने यात्रा के 275 किमी पूरे कर लिए हैं. हम हर दिन 22 किमी की यात्रा करते हैं. राहुल गांधी चाहते हैं कि हम एक दिन में और यात्रा करें. इस पर अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिल रही है.

राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस निकाल रही ‘भारत जोड़ो यात्रा’

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कांग्रेस की ‘भारत जोड़ो यात्रा‘ इस समय केरल में है और यह यात्रा 10 सितंबर की शाम को केरल पहुंची थी. जबकि एक अक्टूबर को कर्नाटक पहुंचने से पहले यह 19 दिनों में केरल के सात जिलों से गुजरते हुए 450 किलोमीटर लंबी दूरी तय करेगी. इस यात्रा को लेकर कांग्रेस को बड़ी उम्मीदें हैं. पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि यह यात्रा राहुल गांधी की छवि को नया रूप देने का एक प्रयास है. यात्रा के बाद राहुल गांधी भी एक नए अवतार में सामने आएंगे.

भारत जोड़ो यात्रा के बीच टीवी9 डिजिटल के एग्जिक्यूटिव एडिटर कार्तिकेय शर्मा ने आज कांग्रेस के महासचिव और कम्युनिकेशन इन-चार्ज जयराम रमेश से पार्टी को लेकर लंबी बातचीत की. जयराम रमेश ने कहा, “भारत जोड़ो यात्रा एक राजनीतिक यात्रा है. यह यात्रा विपक्षी एकता के लिए नहीं है. यह कांग्रेस को मजबूत करने के लिए है. भारत जोड़ो यात्रा का इरादा कांग्रेस को एकजुट करना है. यह एक जनसंपर्क कार्यक्रम है.”

भारत जोड़ो यात्रा का मकसद क्या?

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि हमने यात्रा के 275 किमी पूरे कर लिए हैं. हम हर दिन 22 किमी की यात्रा करते हैं. उन्होंने कहा, “राहुल गांधी चाहते हैं कि हम एक दिन में और यात्रा करें. इस पर अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिल रही है. सुबह की यात्रा छोटी होती है, क्योंकि सुबह ज्यादा लोग नहीं जुट पाते. शाम को भीड़ आती है. सुबह जहां 5 हजार लोग आते हैं तो शाम तक 25 से 30 हजार लोग जुट जाते हैं.”

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को देखने की जिज्ञासा का अलग महत्व है, लेकिन लोग यह जानने में भी दिलचस्पी रखते हैं कि हम क्या कर रहे हैं. भारत जोड़ो यात्रा एक पदयात्रा है. भारत, उन लोगों के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया देता है जो धीरज के साथ परीक्षा देते हैं.

पदयात्रा का विचार कैसे आया?

जयराम रमेश ने कहा, “हमने उदयपुर में इस पर फैसला किया था. महात्मा गांधी ने 80 साल पहले भारत छोड़ो का नारा दिया था. आज भारत को एकजुट करने का समय है. हम इसे भारत जोड़ो कहते हैं.”

लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, “लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था शानदार है. कल्पना कीजिए, 170 दिनों के लिए 60 कंटेनर को रखने के लिए एक एकड़ से अधिक की जमीन की जरूरत होती है, जो हमें मिल रही है. यहां 250 लोगों के लिए खाने की व्यवस्था की जाती है. जब भी जरूरत होती है मैं ब्रेक ले लेता हूं.”

क्या विशेष वर्ग पर फोकस्ड है यात्रा?

जयराम रमेश ने कहा, “भारत जोड़ो यात्रा एक राजनीतिक यात्रा है. यह विपक्षी एकता के लिए नहीं है. यह कांग्रेस को मजबूत करने के लिए है. भारत जोड़ो यात्रा का इरादा कांग्रेस को एकजुट करना है. यह एक जनसंपर्क कार्यक्रम है. मैं यह कहने वाला पहला व्यक्ति हूं कि यह यात्रा राहुल गांधी की छवि को नया रूप देने का एक प्रयास है, जिसे इस तरह से चित्रित किया गया है जो उनकी क्षमता और हित के मुताबिक नहीं है.”

उन्होंने आगे कहा कि लोगों के बीच राहुल गांधी कि जो छवि बनाई गई वह असली राहुल गांधी की नहीं है. इस यात्रा में असली राहुल गांधी सामने आ रहे हैं. वह केयरिंग, दयालु और जबरदस्त सहनशक्ति वाले व्यक्ति हैं. रोजाना 22 किमी पैदल चलना और हजारों लोगों से मिलना और सभी को सेल्फी देना और अपनी मुस्कान व संयम बनाए रखना, ये सब धीरज की परीक्षा है.” कांग्रेस में मजबूती को लेकर रमेश कहते हैं, “मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी इससे और मजबूत होकर उभरेगी. संगठन भी मजबूत होगा और राहुल गांधी भी एक नए अवतार में सामने आएंगे.”

क्या पार्टी के भीतर वैचारिक स्पष्टता पैदा होगी?

भारत जोड़ो यात्रा को लेकर जयराम रमेश ने कहा, “यह पदयात्रा कोई जादू की छड़ी नहीं है. ये जादू नहीं है कि हमने किया और कांग्रेस संगठन को संजीवनी बूटी मिल गई. यह एक बड़ा कदम है. कांग्रेस बचाव की मुद्रा में रही है. अभी हम एजेंडा तय कर रहे हैं. क्या यह अच्छा नहीं है? हम जो कर रहे हैं उसके लिए हमारी आलोचना की जा रही है, न कि हमें जो करना चाहिए था या जो नहीं किया. हम नैरेटिव सेट कर रहे हैं.”

रमेश ने कहा, “17 जून, 2022 को जब मैंने कम्युनिकेशन महासचिव के रूप में पदभार संभाला तो मेरे मन में एक स्पष्ट विचार था. मैंने अपने सहयोगियों से कहा कि मेरा आदर्श शब्द ACT है. आक्रामकता के लिए ए, कन्सासनिस के लिए सी और टाइमलीनेस के लिए टी. यह मेरा दर्शन है.” उन्होंने कहा, “राजनीतिक रणनीति के अभाव में कम्युनिकेशन एक शून्य है. संवाद करने के लिए आपको एक राजनीतिक रणनीति की आवश्यकता होती है. भारत जोड़ो यात्रा एक राजनीतिक रणनीति है और हम लगातार विभिन्न समूहों से मिल रहे हैं. कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में राहुल ने इसे अपनी तपस्या बताया था. राहुल गांधी, सहनशक्ति की एक बड़ी परीक्षा से गुजर रहे हैं.”

पद यात्रा कांग्रेस और राहुल की नई छवि तैयार करेगी?

इस सवाल के जवाब में जयराम रमेश कहते हैं, “मैं बहुत आश्वस्त हूं. 170 दिन की कन्याकुमारी से कश्मीर तक की यात्रा से हालात बदलेंगे. इसे लेकर पार्टी उत्साहित है. असम ने 800 किलोमीटर की यात्रा की घोषणा की है. पश्चिम बंगाल ने 850 किमी लंबी यात्रा की घोषणा की है. ओडिशा ने परिक्रमा यात्रा की घोषणा की है. जिन राज्यों में भारत जोड़ो यात्रा नहीं जा रही है, वहां इसी तरह की यात्राएं आयोजित की जाएंगी और यह कांग्रेस के लिए यह एक क्रांति की तरह है.

यात्रा के जरिए राहुल गांधी की छवि गढ़ने की कोशिश को लेकर उन्होंने आगे कहा, “मैं यह कहने वाला पहला व्यक्ति हूं कि यह यात्रा राहुल गांधी की छवि को नया रूप देने का एक प्रयास है, जिसे इस तरह से चित्रित किया गया है जो उनकी क्षमता के मुताबिक नहीं.”

आप अपने कदम कैसे थामे रखते हैं?

पिछले कुछ समय में कांग्रेस से कई दिग्गज नेता पार्टी छोड़ कर चले गए, ऐसे में आप अपने कदम कैसे थामे रखते हैं?, इसके जवाब में रमेश ने कहा, “मेरी पहचान कांग्रेस पार्टी से है. कांग्रेस के बिना मेरा जीवन कुछ भी नहीं. मुझे नहीं पता कि आजाद, सरमा या सिंधिया जैसे लोग कैसे ऐसा काम कर सकते हैं. मैं 68 वर्ष का हूं और अपने जीवन के ढलान पर हूं. मुझे कांग्रेस पार्टी का कर्ज चुकाना है.”

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