‘बैंड-बाजा लाना, पर पंगा ना बढ़ाना’, दशहरा रैली की इजाजत मिलने के बाद उद्धव ने ऐसा क्यों कहा?

Uddhav Thackeray Slams Bjp On The Occassion Of 62nd Anniversary Of Marmik

उद्धव ठाकरे ने बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा उनके गुट की शिवसेना को मुंबई के शिवाजी पार्क में दशहरा रैली करने की इजाजत दी है. उच्च न्यायालय का यह फैसला ठाकरे गुट की पहली जीत और शिंदे गुट को बड़ा झटका समझा जा रहा है. दोनों ही गुटों के लिए यह प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई थी. इसके बाद उद्धव ठाकरे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की. इसमें उन्होंने कोर्ट के फैसले पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी. एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘ हमेशा हम खराब बातें ही क्यों सोचें, वो कहते हैं ना- शुभ-शुभ बोल!’

बता दें कि कोर्ट ने ठाकरे गुट की शिवसेना को रैली की इजाजत तो दी है, लेकिन साथ ही अगर कोई तनाव या शांति-व्यवस्था को खतरे जैसी कोई स्थिति पैदा होती है तो इसकी जिम्मेदारी भी डाल दी है. ऐसा खास तौर पर इसलिए क्योंकि बीएमसी के वकील ने कोर्ट में यही तर्क दिया था कि उसने कानून-व्यवस्था के लिए कोई समस्या खड़ी ना हो, इसलिए दोनों ही गुटों को इजाजत नहीं दी है. यही वजह है कि कोर्ट ने शांति-व्यवस्था सही रखने की जिम्मेदारी ठाकरे गुट की शिवसेना पर भी डाली और ठाकरे गुट ने कोर्ट को यह गारंटी भी दी कि कहीं रैली में कोई गड़बड़ी नहीं होगी.

इसलिए कहा- गाजे-बाजे के साथ आना, पर गड़बड़ियां ना करवाना

उद्धव ठाकरे ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ‘ हमें रैली करने की इजाजत मिली है कानून व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी राज्य सरकार और पुलिस की होती है. पर हम भी अपनी तरफ से पूरी कोशिश करेंगे. गाजे-बाजे के साथ आएं, गुलाल उड़ाएं, लेकिन पूरी शांति के साथ. अपनी परंपरा को दाग ना लगे. ऐसा कोई काम ना हो. हम शिवराया के महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. बाकी लोग क्या करेंगे, मालूम नहीं.लेकिन दशहरा रैली की तरफ राज्य ही नहीं देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले मराठी भाई-बहनों की नजरें टिकी हैं.’

हमारे लिए लोकतंत्र पर निष्ठा की लड़ाई थी, उनके लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई थी

उद्धव ठाकरे ने कहा कि,’ हमारे लिए यह प्रतिष्ठा की लड़ाई नहीं थी. उनके लिए थी. हमारे लिए यह परंपरा और निष्ठा की बात थी. न्यायदेवता के प्रति हमारी निष्ठा और बढ़ी है. लोकतंत्र की जीत हुई है. मैंने एक दिन पहले ही कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का भी जो फैसला होगा वो सिर्फ शिवसेना के लिए अहम होने वाला नहीं है, यह लोकतंत्र का भी भविष्य तय करने वाला होगा.’