नेट जोरो कार्बन का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हम इसे जरूर हासिल करेंगे- केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी

Nitin Gadkari

पीएम मोदी ने ग्लास्गो में 2070 तक नेट जोरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा था. इस लक्ष्य को कैसे हासिल किया जाए ? इस विषय पर दिल्ली में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने मंत्रालय के साथ-साथ इस दिशा में सरकार के द्वारा उठाए जा रहे कदमों की विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने कहा कि जोरो कार्बन एक बड़ा टास्क है. एक बड़ी चुनौती है. लेकिन, जिस तरह से हम इस दिशा में काम कर रहे हैं हमें पूरी उम्मीद है कि हम इस लक्ष्य को हासिल कर लेंगे.

देश में इलेक्ट्रिक व्हीकल की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. टाटा कंपनी जो इलेक्ट्रिक गाड़ियां बना रही हैं. अभी उसके लिए एक साल का वेटिंग है. इससे यह पता चलता है इलेक्ट्रिक कारों का देश में कितना डिमांड बढ़ता जा रहा है. सरकार ने 5000 इलेक्ट्रिक बसों का टेंडर दिया है. आज डीजल बसें चलाने में सरकार को 105 रुपए प्रति किलोमीटर का खर्च आ रहा है. वहीं, इलेक्ट्रिक बसों को चलाने का खर्च 39 रुपए प्रति किलोमीटर के क़रीब आएगा.

100 प्रतिशत बायो एथनॉल से चलेगी गाड़ी

नितिन गडकरी ने आगे कहा कि हम जल्द ही 27 ग्रीन हमसफर एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट पूरा करने जा रहे हैं. इससे हमारा लॉजिस्टिक्स कॉस्ट काफी कम हो जाएगा. अभी हमारा लॉजिस्टिक कॉस्ट 16 परसेंट है. जबकि, चीन में यह सिर्फ 9 परसेंट है. इस ग्रीन एक्सप्रेस-वे के चालू होने के साथ ही हमारा लॉजिस्टिक कॉस्ट 10 प्रतिशत तक आ सकता है. अभी हम पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिला रहे हैं. लेकिन, टोयोटा जल्दी एक ऐसी गाड़ी लेकर आ रही है, जो 100 प्रतिशत बायो एथनॉल से चलेगी. पराली का और कैसे इस्तेमाल हो सकता है? हम इस दिशा में और गंभीरता से प्रयास कर रहे हैं. इससे एक ओर हम दिल्ली एनसीआर को जहरीली और दमघोंटू हवा से बचा रहे हैं और दूसरी ओर एथनॉल तैयार कर पेट्रोल की खपत कम कर रहे हैं. जिससे किसान भाइयों की ज्यादा आमदनी भी हो रही है.

जल्द ही बायो सीएनजी बनाने बना सकेंगे

आज हम पराली से एक लाख लीटर बायो एथनॉल बना रहे हैं, लेकिन जल्द ही हम इससे बायो सीएनजी बनाने पर भी काम कर रहे हैं. हमारे देश में सिविक एजेंसियों की आर्थिक हालत ठीक नहीं है. वेस्ट टू वेल्थ के फार्मूले पर हम किस तरह से काम कर रहे हैं. उससे इन एजेंटों की माली हालत भी बहुत बेहतर हो सकती है और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी होगा.

आगे गडकरी ने कहा कि हम उन सभी सेक्टरों में काम कर रहे हैं, जहां कार्बन एमिशन को कम किया जा सके. उसके लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा ले रहे हैं. मुझे पूरी उम्मीद है कि हमें इस दिशा में सफलता जरूर मिलेगी और प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपनों को हम साकार कर सकेंगे. इस कार्यक्रम का आयोजन इंटरनेशनल सेंटर फॉर क्लाइमेट और सस्टेनेबिलिटी एक्शन फाउंडेशन ने किया था. पीएम मोदी ने जो 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है. वो कैसे पूरा होगा? उसके लिए क्या तकनीकी रोडमैप होगा? इस दिशा में कैसे काम किया जाए? इन्हीं सब विषयों पर भविष्य का खाका तैयार करने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.