आज यूपी विधानमंडल में रचेगा इतिहास, महिला विधायकों के लिए होगा स्पेशल सत्र

आजादी के बाद विधानमंडल के दोनों सदनों में महिला विधायकों को खुलकर अपनी बात रखने का यह मौका पहली बार मिल रहा है. यूपी विधानसभा में इस बार सबसे ज्यादा 47 यानी 10.90% महिलाएं जीतकर पहुंची हैं.

उत्तर प्रदेश विधानसभा (फाइल फोटो).

उत्तर प्रदेश विधानसभा का यह मानसून सत्र इतिहास बनाएगा. इस सत्र में 22 सितंबर का दिन इतिहास में दर्ज होगा, क्योंकि विधानमंडल के इतिहास में पहली बार एक दिन (22 सितंबर) दोनों सदनों की कार्यवाही महिला विधायकों के नाम रहेगी. उस दिन सदन में सिर्फ महिला विधायक बोलेंगी, महिलाओं के मुद्दे उठेंगे. प्रश्नकाल के बाद सदन में सिर्फ महिला विधायकों को बोलने का मौका दिया जाएगा. हालांकि उस दिन सदन में सभी विधायक मौजूद रहेंगे, लेकिन बोलने का अवसर सिर्फ महिला सदस्यों को मिलेगा.

आजादी के बाद विधानमंडल के दोनों सदनों में महिला विधायकों को खुलकर अपनी बात रखने का यह मौका पहली बार मिल रहा है. यूपी विधानसभा में इस बार सबसे ज्यादा 47 यानी 10.90% महिलाएं जीतकर पहुंची हैं. इससे पहले इतनी बड़ी संख्या में महिला विधायक चुनाव जीतकर विधानसभा नहीं पहुंची थीं. यही वजह है कि यूपी की राजनीति में महिला विधायकों को स्पीकर, सभापति, दलों की नेता और संसदीय कार्य मंत्री बनाए जाने में किसी भी राजनीतिक दल ने पहल नहीं की, जबकि दो महिला मुख्यमंत्रियों ने यूपी की सत्ता संभाली.

कांग्रेस की तरफ से महिला विधायक ही नेता विधानसभा

इस विधानसभा में कांग्रेस ने अपना नेता महिला विधायक बनाकर इस दिशा में पहल की तो अब भारतीय जनता पार्टी के सीनियर नेता रहे और वर्तमान में विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पूरे एक दिन सदन की कार्यवाही महिला विधायकों के नाम करने का फैसला ले लिया. सतीश महाना का कहना है कि अब यूपी की विधानसभा बदल रही है तो महिलाएं चाहती हैं कि उनकी जिम्मेदारी भी बढ़े. इसलिए हमने भी उस दिशा में कदम बढ़ाया है.

CM योगी ने फैसले की सराहना की

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस कदम की सराहना की है. उन्होंने 22 सितंबर को महिलाओं को ही पीठासीन अधिकारी बनाए जाने का अनुरोध किया है. यूपी विधानसभा के इतिहास को देखें तो अब तक विधानसभा में 28 नेता विरोधी दल बनाए जा चुके हैं, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल ने एक भी महिला विधायक को नेता विरोधी दल नहीं बनाया. यही नहीं विधान परिषद में भी 20 नेता विरोधी दल बने, लेकिन उनमें भी महिला विधायकों को जगह नहीं मिली. इसी प्रकार यूपी में अब तक विधानसभा के 18 स्पीकर बनाए जा चुके हैं, जिनमें एक भी महिला नहीं है. विधान परिषद में भी 13 सभापति हुए, लेकिन इनमें भी कोई महिला नहीं रही.

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आजादी के बाद पहली बार दिखेगा ऐसा नजारा

इस बार 47 महिला विधायक सदन पहुंची हैं. पहली विधानसभा से अब तक 20 ऐसी महिला विधायक हैं, जो चार से छह बार विधानसभा पहुंच चुकी हैं. छह बार चुनाव जीतने वाली विधायकों में विमला राकेश और बेनी बाई शामिल हैं. शकुंतला देवी, शारदा देवी, राजपत देवी, प्रेमलता कटियार, गुलाब देबी (वर्तमान सरकार में मंत्री) पांच बार विधानसभा पहुंच चुकी हैं. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के अनुसार 22 सितंबर को प्रत्येक महिला सदस्य को कम से कम तीन मिनट और अधिकतम आठ मिनट का समय दिया जाएगा. महाना ने दावा किया कि आजादी के बाद से पहली बार विधानमंडल में ऐसा नजारा देखने को मिलेगा.

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