TV9 Inside Story: महाराष्ट्र में राजनीतिक घमासान के बीच अनहोनी की आशंका! अलर्ट पर पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियां

Maharashtra

महाराष्ट्र में में दो दिन से मचे राजनीतिक घमासान (Maharashtra Political Crisis) के बीच क्या कोई और भी संकट सिर पर आ सकता है? अचानक से ही महाराष्ट्र पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के अलर्ट मोड पर आ जाने से यह सवाल जेहन में उठने लगा है? इन दोनों ही एजेंसियों के कान खड़े होने से इस तरह की बातें निकल कर सामने आने लगी हैं कि राज्य में चल रही राजनीतिक उठा-पटक के बीच कहीं अचानक कानून-व्यवस्था अस्त-व्यस्त होने की नौबत अचानक सिर पर न आन पड़े. लिहाजा इसीलिए वक्त रहते ही राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने अपने-अपने तरीके से इंतजाम करना शुरू कर दिए हैं. ताकि ऐन वक्त पर कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए भगदड़ का सा माहौल न बनने पाए. इस अचानक से आए अप्रत्याशित राजीनीतिक संकट को लेकर जहां राज्य में तमाम राजनीतिक दल, नेता अपने -पने स्तर पर बैठकें करने में जुटे हुए हैं. वहीं राज्य की पुलिस के अधिकारी और केंद्रीय एजेंसियां भी अपने-अपने स्तर पर खुफिया इनपुट जुटाकर, अपने काम में जुट गई हैं.

देश के खुफिया तंत्र से जुड़े उच्च पदस्थ और विश्वस्त सूत्रों की मानें तो, “भले ही सब कुछ शांति से निपट जाए, अंदर से मगर जिस तरह की कुछ जानकारियां निकल कर सामने आ रही हैं, उन्हें भी हम नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं.” आप किस तरह की संभावनाओं की ओर इशारा कर रहे हैं कुछ खुलकर बता सकते हैं तो बताएं? पूछे जाने पर देश की राजधानी दिल्ली में मौजूद इसी अधिकारी ने दबी जुबान कहा, “यह संकट कुछ और नहीं बल्कि शिवसेना पक्ष के एमएलए की उठापटक के बीच, कानून व्यवस्था को लेकर ही कुछ संभावित दिक्कतों पर हम लोग नजर रखे हुए हैं.”

क्या यह बात खुफिया और पुलिस तंत्र इस बात के बाद कह रहा है जब, शिवसेना के आला-कमान से जुड़े कुछ नेताओं ने असम के विधायकों को मुंबई आने पर उनसे दो-दो हाथ कर लेने की धमकी दी है? पूछने पर महाराष्ट्र पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, “कुछ भी समझ लीजिए. इंटेलीजेंस इनपुट जुटाना और उस पर समय रहते एहतियातन अमल करना तो हमारी वैसे भी प्राथमिकता में रहता है.” बीते दो-तीन दिनों से महाराष्ट्र की राजनीति में मची हायतौबा के बीच कुछ शिवसेना नेताओं की धमकियों ने खुफिया और पुलिस तंत्र की नींद उड़ा दी है. इसको भले ही खुफिया एजेंसियां, केंद्रीय एजेंसियां और महाराष्ट्र पुलिस खुलकर न मानें. इन सबने मगर एहतियातन जिस तरह के कदम उठाने शुरू कर दिए हैं, उससे साफ है कि कहीं न कहीं कुछ न कुछ गड़बड़ लॉ एंड ऑर्डर के नजरिए से राज्य में होने की पूरी-पूरी संभावनाएं नजर आने लगी हैं.

वरना यूं ही खाली बैठे-बिठाए भला कोई एजेंसी इस तरह अलर्ट मोड पर खुद को क्यों लाएगी? वो भी तब जब, बागी विधायकों को लेकर शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत कह चुके हैं कि उन्होंने अपने सभी विधायकों को मुंबई लौटने का आमंत्रण दिया था. शिवसेना चाहती है कि सदन के पटल पर शक्ति प्रदर्शन हो. ताकि दूध का दूध और पानी का पानी जमाने के सामने हो सके. जहां तक बात महाराष्ट्र पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के अलर्ट मोड पर आ जाने की है तो, यहां ध्यान रखना होगा कि, संजय राउत का कहना, कि हमने अपने सभी विधायकों को मुंबई वापस आने का न्योता दिया था. अब हम उन्हें मुंबई आने की चुनौती दे रहे हैं. शिवसेना के नेताओं की ओर से इस बात का भी जिक्र किया गया है था कि अभी शिवसेना के कार्यकर्ता अपने बागी हुए एमएलए के खिलाफ सड़कों पर नहीं उतरेंगे.

सड़कों पर उतरेंगे शिवसैनिक!

हालांकि वहीं दूसरी ओर शिवसेना के कुछ नेताओं का कहना है कि उनके कार्यकर्ताओं के सड़कों पर उतरने का विकल्प भी खुला हुआ है. मतलब कुल जमा ऐसी बयानबाजी के बीच अगर महाराष्ट्र पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अलर्ट मोड पर आ चुकी हैं. तो भला इसमें गलत क्या है? एहतियातन यह किसी भी सुरक्षा एजेंसियों को करना भी चाहिए. शिवसेना के नेताओं के इस बयान के बाद महाराष्ट्र पुलिस न सिर्फ सक्रिय हुई है बल्कि केंद्रीय जांच एजेंसियों ने इस पूरे मामले पर नजर बना ली है. खुफिया जांच एजेंसी से जुड़े महाराष्ट्र के एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि फिलहाल अभी कोई ऐसी स्थिति तो नजर नहीं आ रही है, जिसमें कानून व्यवस्था बिगड़ रही हो. फिर भी एहतियातन हमारा पुलिस बल इस पूरे मामले पर नजर जरूर रखे हुए है. कहा तो यह भी जा रहा है कि महाराष्ट्र के कुछ बड़े जिलों की इकाइयों से जुड़े शिवसेना के पदाधिकारी, मुंबई में शिवसेना के बड़े नेताओं के लगातार संपर्क में हैं.

शिवसेना की एक जिला इकाई से जुड़े वरिष्ठ नेता के मुताबिक, जिस तरीके से महाराष्ट्र में शिवसेना से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे विधायकों का व्यवहार सामने आया है, उसे अब सिर्फ और सिर्फ आंदोलन से ही शांत किया जा सकता है. इनके मुताबिक इसके लिए शिव सैनिक अपने शिवसेना सुप्रीमो (आलाकमान) के एक इशारे भर का इंतजार कर रहे हैं. ऐसे में यहां उल्लेखनीय है कि शिवसेना के नेता संजय राउत के सड़क पर उतरने वाले बयान के बाद से ही, महाराष्ट्र के अलग-अलग जिलों की शिवसेना इकाइयां और उनसे जुड़े शिव सैनिकों ने बैठकों का दौर शुरू कर दिया है. दरअसल महाराष्ट्र में पैदा हुए राजनीतिक संकट के दौरान पहले तो शिवसेना के नेता असम में बैठे बागी विधायकों को महाराष्ट्र आने के लिए कहते रहे.

जब बात सीधी उंगली से नहीं बनी तो शिवसेना आलाकमान ने उन सबको (बागी विधायकों) मुंबई आने की चेतावनी भरे लहजे में बुलाना शुरू कर दिया. जिसके बाद महाराष्ट्र राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के कान खड़े हो जाना लाजिमी है. इसके अलावा एनसीपी के नेता शरद पवार को लेकर भी संजय राउत ने भाजपा के नेता पर धमकी देने का आरोप लगाया. उनकी इस धमकी को भी नजरअंदाज करना या फिर हल्के में लेना किसी नई मुसीबत को जन्म दे या दिलवा सकता है. असम के होटल में मौजूद शिवसेना के बागी विधायकों में से कुछ कहा कहना है कि फिलहाल भले ही यह मामला राजनैतिक हो लेकिन, जिस तरीके से महाराष्ट्र से उन्हें धमकियां मिल रही हैं, उससे कानून व्यवस्था बिगड़ने का खतरा पैदा होना तय है.

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