TV9 Initiative: विशेषज्ञों का सुझाव, खाद्य सुरक्षा के लिए जरूरी है खाद्य कलात्मक आंदोलन

Food Future

यह भोजन के भविष्य को लेकर फिर से सोच-विचार करने का समय है . अपनी कोशिशों के लंबे सफर के बाद भारत खाद्य के मामले में आत्मनिर्भर हुआ है. भारत के लिए अब अगला मुकाम ये है कि वो ये सुनिश्चित करे कि रासायनिक कीटनाशकों पर उसकी निर्भरता कम हो और लोगों को स्वस्थ और पौष्टिक पदार्थों के साथ संतुलित आहार मिले.

आज विज्ञान और तकनीकी ने मनुष्य के जीने, खाने और सफर करने के तौर-तरीकों में क्रांति ला दी है. जलवायु परिवर्तन और महामारी जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए भारत को अधिक सुरक्षित , टिकाऊ और न्यायपूर्ण खाद्य प्रणाली की जरूरत है . विशेषज्ञों का सुझाव है कि तकनीकी के इस्तेमाल , कृषि के क्षेत्र में नित नई खोज और आनुवंशिक रूप से संशोधित भोजन के बदौलत भारत खाद्य सुरक्षा प्राप्त कर सकता है , सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकता है और पौष्टिक प्रोटीन की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ इसे सभी के लिए सहज उपलब्ध करवा सकता है.

“आज सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले भोजन का उत्पादन करने के लिए बेहतर वैज्ञानिक तकनीक उपलब्ध हैं. मैं जीएम फुड के उत्पादन के लिए जेनेटिक इंजीनियरिंग की बात कर रहा हूं . जबकि हम अपने भोजन की मात्रा और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रजनन के पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आज के समय में यदि हम अपने खाद्य पदार्थों में विशिष्ट खनिज और पोषण जोड़ना चाहते हैं तो आनुवंशिक इंजीनियरिंग और हाल ही में विकसित जीनोम संपादन की तकनीक दुनिया में काफी मशहूर है, दिल्ली स्थित आईसीएआर-नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज के पूर्व निदेशक डॉ केसी बंसल कहते हैं.

डा. बंसल ने इस बात को रेखांकित किया कि आनुवंशिक रूप से संशोधित खाद्य पदार्थ भारत को काफी लाभ पहुंचा सकते हैं . और इसके लिए डॉ बंसल के मुताबिक सरकार को कृषि में नई तकनीक को अपनाने को बढ़ावा देना चाहिए.

भारत में तिलहन और दलहनी फसलों पर ज्यादा जोर देने की जरूरत है. चना और अरहर जैसी दालें पॉड बोरर (एच. आर्मिगेरा) नामक कीट की वजह से प्रतिकूल रूप से प्रभावित होती हैं . इनके अलावे और दूसरे फसलों की सुरक्षा के लिए आनुवंशिक संशोधन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. हम उम्मीद करते हैं कि भारत सरकार बिना किसी देरी के इस तकनीक को किसानों के खेतों तक लेकर आएगी. इन तकनीक को इस्तेमाल करने के पीछे विचार ये है कि इन विनाशकारी कीटों और रोगजनकों से फसलों की रक्षा और कीटनाशकों पर निर्भरता कम की जाए. इसलिए, जीएम तकनीक न केवल भोजन की मात्रा बल्कि इसकी गुणवत्ता को भी बढ़ाने में मदद करेगी , प्रो. बंसल का सुझाव है.

विनाशकारी कीट से निपटने के अलावा, खाद्य विज्ञान हमें मजबूत और पौष्टिक प्रोटीन युक्त भोजन का विकल्प प्रदान करने मदद करता है. यह भारत को पोषण सुरक्षा दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

हमें एक समुदाय, उद्योग और सरकार के रूप में एक साथ मिलकर खाद्य विज्ञान का लाभ उठाना चाहिए. हमें एक ऐसे भोजन का निर्माण करना चाहिए जो कि स्वाद में अच्छा हो और कम कीमत पर लोगों को उपलब्ध हो. इससे उपभोक्ता अपने दैनिक जीवन में सही भोजन विकल्पों का चुनाव कर सकते हैं. खाद्य विज्ञान के उपयोग में काफी संभावनाएं हैं . पौधे आधारित मांस जैसे उत्पादों को लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं. इस तरह के नवीन उत्पादों में मांस का स्वाद होता है जिसे उपभोक्ता जानते हैं और प्यार करते हैं. ये आम लोगों और स्वास्थ्य के लिए भी काफी बेहतर है , द गुड फूड इंस्टीट्यूट के प्रबंध निदेशक वरुण देशपांडे कहते हैं.

न्यूट्रीवेल हेल्थ इंडिया की संस्थापक और जानी-मानी पोषण विशेषज्ञ डॉ. शिखा शर्मा का सुझाव है कि खाद्य विज्ञान के इस्तेमाल से खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण और परिवहन के मामले में भी अनावश्यक खर्चे को कम किया जा सकता है.

सब्जियों जैसी ताजा उपज का लगभग 60 प्रतिशत नष्ट हो जाता है क्योंकि वे गोदामों में ठीक से न तो रखे जाते हैं और न ही ट्रांसिट के दौरान उनका रख-रखाव किया जाता है. हमने ऐसे कई मामले देखे हैं जहां खराब स्टोरेज होने की वजह से चूहों द्वारा कई टन अनाज या तो खराब कर दिए जाते हैं या फिर खा लिया जाता है. यहि हम खाद्य भंडारण, प्रसंस्करण और वितरण के लिए वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल करने लगें तो खाद्य सुरक्षा में काफी सुधार होगा, डॉ शिखा शर्मा कहती हैं.

सीमित संसाधनों के साथ खाद्यान्न के उत्पादन को बढ़ाने में प्रौद्योगिकी की भूमिका के बारे में डॉ बंसल सुझाव देते हैं , बीज खाद्य उत्पादन के लिए एक मौलिक इनपुट होता है. जीनोम एडिटिंग जैसी नई प्रौद्योगिकियां कम कृषि रसायनों, और कम भूमि , पानी और उर्वरकों का उपयोग करके बीजों को बेहतर उपज प्रदान करने में सक्षम करता है . यदि भारत निकट भविष्य में अपने खाद्यान्न उत्पादन को 300 मिलियन टन से अधिक करना चाहता है और वो भी एक स्थायी रूप से तो हमें इन अच्छी तरह से जांची परखी तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता होगी.

खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी में जबरदस्त तरक्की हो रही है. खाद्य के मामले पर अगर एक कलात्मक आंदोलन हो तो निश्तित तौर पर ये भारत को पोषण और खाद्य सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करेगा.

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