Sidhu Moose Wala Murder Case: पंजाब सरकार और गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का इसलिए हलक सूखना जायज है…

Lawrence Bishnoi Pti 1

पंजाब में और वहां की पुलिस कस्टडी में “कमजोर सुरक्षा और जान को खतरा” होने की एक भी दुहाई, राजस्थान के गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के किसी काम न आई. उसे कई दिन तक दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल की कस्टडी में रखे जाने के बाद अंतत: कोर्ट ने, पंजाब पुलिस के हवाले कर दिया. दरअसल दिल्ली की जेल में कैद और वहीं से आपराधिक षडयंत्रों को खामोशी से रचने में मशरूफ रहा, लॉरेंस बिश्नोई किसी भी तरह से पंजाब पुलिस की हिरासत में जाने को राजी नहीं था. यहां तक कि उसे अंदेशा था कि, कस्टडी से जबरन भागने (फरार होने के कोशिश) का आरोप लगाकर कहीं पंजाब पुलिस ही लॉरेंस बिश्नोई को ‘साफ’ न कर दे. इसीलिए उसने कोर्ट से कहा कि उसके हाथ-पांव में हथकड़ियां डालने का आदेश पुलिस को दिया जाए, ताकि पंजाब पुलिस यह कहकर उसका एनकाउंटर कर ही न पाए कि वह भागने की कोशिश करते हुए मारा गया.

पंजाब की हद और पंजाब पुलिस की कस्टडी में न जाने की जिद पर अड़े रहने की भी लॉरेंस बिश्नोई की अपनी दो निजी वजह हैं. पहली वजह, पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के कत्ल के बाद से जेल के बाहर उसके खिलाफ बने माहौल में, उसे जेल की चार दिवारी से निकल कर पंजाब की हद में पहुंचते ही अपना कत्ल हो जाने की पूरी पूरी आशंका है. क्योंकि तिहाड़ जेल में कैद दिल्ली के गैंगस्टर नीरज बवानिया ने खुला चैलेंज कर दिया था कि सिद्धू मूसेवाला के हत्यारों को उसका गैंग निपटाकर ही चैन से सोएगा. ऐसे में लाॉरेंस बिश्नोई किसी भी कीमत पर दिल्ली की जेल से निकल पंजाब पुलिस की कस्टडी में भी सुरक्षित नहीं मानता है. क्योंकि वो गैंगस्टर होने के नाते जानता है कि पुलिस कस्टडी में किसी भी बदमाश को आसानी से ठिकाने लगाया जा सकता है. मरने वाला अपराधी पुलिस कस्टडी में निहत्था होता है. लिहाजा वो जवाबी हमला भी कर पाने की स्थिति में न होकर बेबसी-लाचारी के आलम में होता है.

हमलावरों पर जबावी हमला करने की जिम्मेदारी समझिए या फिर सामर्थ्य सिर्फ और सिर्फ, लॉरेंस बिश्नोई से अपराधियों को लाने-ले जाने वाली पुलिस सुरक्षा गारद में तैनात हथियारबंद जवानों के कंधों पर ही होती है. अब तक अपने आपराधिक जीवन में तमाम लोगों की सुनियोजित हत्याओं को अंजाम दे चुका लॉरेंस बिश्नोई इन सब अंदरखाने की बातों से खूब परिचित है. क्योंकि वह और उसका गैंग खुद भी अपने किसी शिकार को तलाश कर उसे ठिकाने लगाने के लिए, इसी तरह के साम दाम दण्ड भेद वाले फार्मूलों के आधार पर षडयंत्र रचता रहता है. मतलब अपराध की दुनिया में जितना उसका नाम है वही नाम और शोहरत अब दिल्ली की जेल से उसे बाहर निकाल कर पंजाब पुलिस की कस्टडी में भेज दिए जाने पर बवाल-ए-जान बन चुकी है. ऐसा नहीं है कि लॉरेंश बिश्नोई ही अपनी जान को खतरे की आशंका से हलकान हुआ पड़ा है. पंजाब में सिद्धू मूसावाला हत्याकांड के बाद से हालत पंजाब पुलिस और वहां की हुकूमत की भी खराब है. भले ही अब क्यों न उसे कोर्ट ने पंजाब पुलिस की कड़ी निगरानी में भेज दिया हो.

लारेंस बिश्नोई की सुरक्षा में पंजाब पुलिस ने भी अपना भारी भरकम लाव-लश्कर लगा दिया है. इसके बाद भी मगर लॉरेंस बिश्नोई की सुरक्षा में तैनात पंजाब पुलिस के जवान और पंजाब पुलिस का स्थानीय खुफिया तंत्र भी हर लम्हा अलर्ट मोड पर है. ऐसे में यह नहीं भूलना चाहिए कि अक्सर इस तरह के कुख्यात गैंगस्टर्स-अपराधियों को कोर्ट लाने ले जाने के दौरान ही उनके दुश्मन ठिकाने भी लगाते रहे हैं. बीते साल दिल्ली की रोहिणी कोर्ट के अंदर दो गैंगस्टर्स का कत्ल कोर्ट के भीतर इसका सबसे बड़ा नमूना है. यही डर बार बार लॉरेंस बिश्नोई को सता रहा है कि कहीं रोहिणी कोर्ट जैसा हादसा उसके साथ भी पंजाब में न हो जाए! ऐसा नहीं होगा इसकी लिखित गारंटी हालांकि कोई भी नहीं दे सकता है. उधर पंजाब पुलिस के आईजी स्तर के आला अफसर ने अपनी पहचान उजागर न करने की शर्त पर कहा, “वो गैंगस्टर (लॉरेंस बिश्नोई) है. मौजूदा हालातों में पूछताछ के लिए उसे हमें अपनी कस्टडी में लेना जरूरी था. हमारी (पंजाब पुलिस) कस्टडी में आने से बचने के लिए ही वो यह सब बहानेबाजी कर रहा है. वरना हमने सुरक्षा के उसके पूरे इंतजाम किए हुए हैं.”

बात यहां अगर पंजाब की मौजूदा हुकूमत के किरदार की हो तब, बताना जरूरी है कि जितना ज्यादा सजग या चिंतित गैंग्स्टर लॉरेंस बिश्नोई अपनी सुरक्षा को लेकर है, तो उससे कहीं ज्यादा होश पंजाब सरकार के उड़े हुए हैं. इसीलिए उसने (पंजाब सरकार ने) आईंदा कोई जोखिम न उठाने की गरज से पंजाब पुलिस के तमाम जवान लॉरेंस बिश्नोई के सुरक्षा बेड़े में शामिल कर रखे हैं. पंजाब में मौजूद आम आदमी पार्टी की पहली बार बनी सरकार को चिंता इस बात की है कि अगर, लॉरेंस बिश्नोई की सुरक्षा में कोई कमी सामने आई, तो फिर हमारी (पंजाब सरकार) ही खाल पंजाब की जनता खींचना शुरू कर देगी. क्योंकि पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या ठीक उसके दो दिन के अंदर ही हो गई थी, जब पंजाब सरकार ने उनकी सुरक्षा से अपने कई जवान वापस ले लिए थे. सिद्धू मूसेवाला की सुरक्षा में महज चार सुरक्षाकर्मी ही बाकी छोड़े थे. पंजाब सरकार ने यह कदम अपनी ही एक उस रिपोर्ट के आधार पर उठाया था कि, अब सिद्धू मूसेवाला की जान को कोई खतरा नहीं है. पंजाब सरकार ने बिश्नोई की सुरक्षा में करीब 100 जवान तैनात किए हैं, साथ ही उसे बुलेट प्रूफ भी दी गई है.

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