Russia-Ukraine War: SARMAT मिसाइल को लेकर पुतिन का बड़ा दावा, कहा- इसे नहीं रोक पाएगा दुनिया का कोई भी डिफेंस सिस्टम

Vladimir Putin

आज सबसे पहले उस मिसाइल कम्पटीशन के बारे में बताएंगे और उस रेस के बारे में समझाएंगे जो दुनिया को खत्म करने के लिए हो रही है. रूस (Russia) से लेकर चीन (China) तक ऐसे ऐसे विध्वसंक हथियार, सुपरसॉनिक से लेकर हाइपरसॉनिक मिसाइलें सामने आ रही हैं, जिनके बारे में किसी ने सोचा नहीं था. अचानक मिसाइल टेस्ट की होड़ लग गई. कोई एटमी मिसाइल चला रहा है तो फिर दुनिया खत्म करने की धमकी दे रहा है. जरा सोचकर देखिए, अगर इनमें से एक भी मिसाइल (missile) चल गई तो दुनिया का नक्शा बदल जाएगा. मुल्क के मुल्क तबाह हो जाएंगे. धरती लाशों से पट जाएगी. कुछ सवाल हैं, तीखें हैं और दुनिया के तथाकथित नेताओं से हैं.

रूस-यूक्रेन जंग के बीच बड़े-बड़े देश मिसाइल टेस्ट क्यों कर रहे हैं? रूस ने 18000 किलोमीटर तक मार करनेवाली मिसाइल को यूक्रेन जंग के बीच क्यों दिखाया? क्या पुतिन जानबूझकर जंग का दायरा बढ़ाना चाहते हैं या उन्हें पश्चिमी मुल्क ऐसा करने पर मजबूर कर रहे हैं? यूक्रेन में अब तक कंवेशनल वेपन से हमले हो रहे थे. शहर के शहर तबाह हो गए. सैकड़ों हजारों कब्रें खुद गईं. मासूमों की किलकारियां बारूदी हमले में खामोश हो गईं. लेकिन एक के बाद एक मिसाइल टेस्ट के बाद नए सवाल खड़े हो गए. क्या इससे भी बड़ी तबाही होने वाली है, इसकी जद में कितने देश आएंगे? क्या विनाश का भयानक दौर आनेवाला है. क्या युद्ध का दायरा बढ़नेवाला है? और सबसे अहम सवाल क्या इसकी आंच हम तक भी आनेवाली है?

पांच मुल्कों ने बीते कुछ दिनों में किए मिसाइल टेस्ट

सवाल तीखे हैं, डायरेक्ट हैं और सोचने पर मजबूर करने वाले हैं, लेकिन पूछना जरूरी है क्योंकि बीते कुछ दिनों में ही पांच मुल्कों ने मिसाइल टेस्ट किए हैं. इनमें अमेरिका, रूस, चीन और नॉर्थ कोरिया जैसे देश शामिल हैं. बड़ी बात ये भी है कि मिसाइल टेस्ट के नाम पर गुटबंदी भी दिखाई देने लगी. अमेरिका और यूरोप के सामने चीन, रूस और नॉर्थ कोरिया जैसे देश हैं. जिनपिंग ने तो रूस का पूरा सपोर्ट भी कर दिया बल्कि रूस के SARMAT 2 मिसाइल टेस्ट के बाद चीन ने भी YJ 21 नाम की हाइपरसॉनिक मिसाइल का टेस्ट किया.

देशों ने मिसाइल टेस्ट के नाम पर डराना-धमकाना शुरू किया

इसका मतलब साफ है कि युद्ध अब उस डायरेक्शन की तरफ मुड़ चुका है, जहां एक छोटी सी चिंगारी पूरी दुनिया को तबाही के मुहाने पर लाकर खड़ा कर देगी और ये बात रूस भी लगातार कह रहा है, अमेरिका भी कह रहा है. साथ ही यूरोपियन लीडर्स भी दोहरा चुके हैं. मतलब सबको पता है कि खतरा बढ़ गया है और देशों ने मिसाइल टेस्ट के नाम पर डराना-धमकाना शुरू कर दिया है. जिस वक्त नॉर्थ रूस में दुनिया की सबसे लंबी दूरी वाली मिसाइल SARMAT RS 28 का टेस्ट हो रहा था, उसी वक्त पुतिन ने अपने दिमाग में वर्ल्ड वॉर की नई स्क्रिप्ट तैयार कर ली. कम से कम वेस्टर्न कंट्रीज के अखबारों की हेडलाइन तो इसी बात का संकेत देती है. ब्रिटिन ऑनलाइन ने पुतिन के SATAN 2 मिसाइल के टेस्ट को पश्चिमी देशों के लिए सबसे बड़ा और नया खतरा बता दिया.

अखबार ने लिखा कि पुतिन ने उस मिसाइल का टेस्ट किया, जो पूरे ब्रिटेन को तबाह कर सकती है. ये ऐसी मिसाइल है, जिसके न्यूक्लियर वॉरहेड्स फ्रांस का नामोनिशान मिटा देंगे. रूस में ऐसी मिसाइल का टेस्ट हुआ, जिसे पुतिन के करीबी NATO और यूक्रेन को के लिए गिफ्ट बता रहे हैं यानी पुतिन का एटमी गिफ्ट तैयार और अब कभी भी वार. इस टेस्ट की टाइमिंग और इसके साथ होने वाले डेवलपमेंट को बताएं, उससे पहले मिसाइल की ताकत समझ लेते हैं. रूस की SARMAT मिसाइल को SATAN II भी कहा जाता है. इसकी रेंज 18,000 किलोमीटर है. एक मिसाइल 550 किलोटन के 16 एटम बम ले जा सकती है. सोचिए फ्रांस का कुल एरिया ढाई लाख वर्ग मील है. रूस की ये मिसाइल अगर फ्रांस पर गिर गई तो पूरा देश खत्म.

हमारी मिसाइल को नहीं रोक पाएगा दुनिया का कोई भी डिफेंस सिस्टम- पुतिन

लेकिन बात सिर्फ फ्रांस तक नहीं रुकती. दावा किया जा रहा है कि SATAN II मिसाइल की जद में एक तरफ से पूरी दुनिया है, दुनिया के बड़े बड़े शहर हैं. रूस के मुताबिक ये मिसाइल नॉर्थ से लेकर साउथ पोल तक तो कवर कर सकती है. मॉस्को से लंदन की दूरी करीब 2900 किलोमीटर है जबकि मॉस्को से वॉशिंगटन की दूरी 7800 किलोमीटर है यानी satan ii की जद में लंदन से लेकर वॉशिंगटन है. पुतिन का दावा है कि उनकी मिसाइल इतनी तेज है कि दुनिया का कोई भी डिफेंस सिस्टम इसे रोक नहीं पाएगा. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि ये हथियार हमारी सेना की ताकत को बढ़ाएगा. रूस को बाहरी खतरों से बचाएगा और जो लोग रूस के खिलाफ जंग की बातें करते हैं, हमें धमकाते हैं वो जरा दो बार सोच लें.

अब रूस के मिसाइल टेस्ट की टाइमिंग को समझते हैं. रूस-यूक्रेन के बीच 57 दिन से जंग चल रही है. पुतिन का पूरे यूक्रेन पर कब्जे का प्लान अब भी अधूरा है, ऐसा इसलिए क्योंकि यूक्रेन को अमेरिका समेत दूसरे मुल्कों की तरफ से लगातार हथियारों की सप्लाई हो रही है. बारूद से बारूद टकरा रहा है. सैनिक मारे जा रहे हैं. घर के घर उजड़ रहे हैं, लेकिन जंग थम नहीं रहीं इसलिए वेस्टर्न कंट्रीज को लगता है कि अब रूस ऐसे विनाशक हथियार दिखाकर जंग का दायरा बढ़ाना चाहता है. रूस के मिसाइल टेस्ट के बाद से अमेरिका और NATO की टेंशन क्यों बढ़ गई, ये जानने के लिए रूस और चीन की दोस्ती का नया चैप्टर भी समझना होगा. चीन वो मुल्क है जिसने रूस-यूक्रेन वॉर के बीच अभी तक बीच की लाइन ली हुई थी, लेकिन जैसे ही रूस ने SATAN II मिसाइल का टेस्ट किया, चीन को भी अपनी ताकत दिखाने का मौका मिल गया. यूं समझिए कि चीन बस मौके का इंतजार कर रहा था, इसकी वजह भी इंटरेस्टिंग है.

बुधवार को अमेरिका के डिफेंस सेक्रेटरी Lloyd Austin ने 15 महीने में पहली बार अपने चाइनीज counter part से बातचीत की. अमेरिका की तरफ से कहा गया कि रूस-यूक्रेन वॉर समेत दूसरे मुद्दों पर बात हुई. लेकिन चीन की डिफेंस मिनिस्ट्री ने जो बयान जारी किया, उसमें कहा गया था कि अमेरिकी रक्षा मंत्री को साफ-साफ बता दिया गया कि ताइवान चीन का हिस्सा था, है और रहेगा इसका मतलब अमेरिका जिस तरह ताइवान को सपोर्ट करने की बात कर रहा है उससे चीन नाराज है और इसे अपने internal matter में दखल मानता है. गौर करनेवाली बात ये है कि जैसे ही मीटिंग खत्म हुई, उसके कुछ देर बाद ही चीन ने पहली बार YJ-21 हाइपरसोनिक मिसाइल का प्रदर्शन किया. इस मिसाइल की टारगेट रेंज 1400 किलोमीटर है, यानी चीन ने अमेरिका को क्लीयर कर दिया कि ये मिसाइल टेस्ट ताइवान को देखते हुए किया गया.

जिनपिंग ने पुतिन का किया पूरा सपोर्ट

इस बीच रीजनल इकॉनॉमिक फोरम में शी जिनपिंग ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का पूरा सपोर्ट किया. शी जिनपिंग ने रूस के ऊपर लगे सैंक्शन्स का भी जमकर विरोध किया. जिनपिंग ने रूस पर लगे सैंक्शन्स को Cold War Mentality करार दिया. जिनपिंग ने अपने संबोधन में Unilateralism और Hegemonism शब्दों का इस्तेमाल किया, जो वो अक्सर अमेरिका के खिलाफ करता है. इसका मतलब साफ है कि रूस-चीन अब वेस्टर्न कंट्रीज के सामने एक साथ मजबूती से खड़े है. बेलारूस और ईरान जैसे मुल्क भी रूस की तरफ झुके हुए हैं और जहां तक अमेरिका की बात है तो फिलहाल उसके पास आर्थिक प्रतिबंध लगाने के अलावा कोई और विकल्प मौजूद नहीं, लेकिन अगर बात मिसाइल वॉर तक आई और इसमें और कौन-कौन से देश कूदेंगे. अमेरिका की क्या ताकत है, ये जानना भी दिलचस्प है.

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