Rajasthan: बदल रहा है ट्रांसफर का नियम, 5 श्रेणियों में टीचर्स और प्रिंसिपल को दिए जाएंगे नंबर, इसी के आधार पर होगा तबादला, देखिए पूरी लिस्ट

Rajasthan Transfer Policy

New Transfer Policy: राजस्थान में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के ट्रांसफर को लेकर एक नई पॉलिसी लाई गई है. इसका मकसद नेताओं के आगे ट्रांसफर (Rajasthan Transfer Policy) के लिए चक्कर काटने की व्यवस्था को खत्म करना है. यहां गौर करने वाली बात ये है कि ट्रांसफर नेताओं की सिफारिश पर ही होंगे, मगर पहले जितनी झंझट को दूर कर दिया जाएगा. ट्रांसफर को लेकर बनाई गई पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और बस अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंजूरी मिलना बाकी है. नई ट्रांसफर नीति के तहत ट्रांसफर पूरी तरह से डिजिटलाइज्ड कर दिया गया है. विभागीय पोर्टल व कंप्यूटर आधारित सॉफ्टवेयर की मदद से ट्रांसफर होंगे.

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, नई पॉलिसी के तहत ट्रांसफर के लिए अब अप्लाई करना होगा. इसके लिए 6 से 10 अप्रैल के बीच का टाइम फ्रेम तैयार किया गया है. एक बार अप्लाई करने के बाद 10 मई तक ट्रांसफर लिस्ट तैयार कर ली जाएगी. पॉलिसी के तहत ट्रांसफर के लिए शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों को 4 जोन में बांट दिया गया है. इसके अलावा, जिलों को भी 4 कैटेगरी में विभाजित किया गया है. ट्रांसफर सुगम तरीके से हो सके, इसके लिए जिला, संभाव व राज्य स्तर पर तबादला कमेटियों का गठन किया जाएगा. किसी भी अधिकारी का ट्रांसफर का आखिरी फैसला इन्हीं कमेटियों को लेना होगा. एक बार में हर कैडर के अधिक से अधिक 17 फीसदी लोगों के ही ट्रांसफर हो सकेंगे.

परफॉर्मेंस-स्कूल में ठहरने के आधार पर मिलेगी ट्रांसफर में प्राथमिकता

स्कूलों में ठहराव की क्या है मार्किंग?

  • Zone A- (कोई नंबर नहीं): निगम, परिषद, नगर पालिका क्षेत्र और इनकी सीमाओं के 10 किमी दायरे में मौजूद स्कूल में ठहरने पर कोई नंबर नहीं दिया जाएगा.
  • Zone B- (एक साल के लिए 2 नंबर): निगम, परिषद, नगर पालिका क्षेत्र और इनकी सीमाओं के बाहर 25 किमी दायरे में मौजूद स्कूलों में ठहरने पर हर साल दो नंबर दिए जाएंगे.
  • Zone C- (एक साल के लिए 3 नंबर): राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग व इनके 25 किमी की सीमा के बाहर मौजूद स्कूल में ठहरने पर हर साल तीन नंबर मिलेंगे. ये स्कूल Zone A और Zone B में भी नहीं होने चाहिए.
  • Zone D- (एक साल के लिए 5 नंबर): राज्य के बाकी बचे हुए स्कूलों में ठहरने पर हर साल पांच नंबर मिलेंगे.

जिलों के आधार पर क्या होगी मार्किंग?

Category A- (एक साल के लिए 1 नंबर): इस कैटेगरी के तहत जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, दौसा, भरतपुर, अलवर, अजमेर के Zone A, B, C को छोड़कर बचे स्कूल शामिल होंगे. यहां काम करने पर हर साल एक नंबर मिलेगा.

Category B- (एक साल के लिए 2 नंबर): B कैटेगरी के तहत टोंक, भीलवाड़ा, कोटा, नागौर, पाली, जोधपुर, गंगानगर, बूंदी, हनुमानगढ़, चूरू के Zone A, B, C को छोड़कर बचे स्कूल शामिल किए जाएंगे. यहां पर एक साल की सेवा पर दो नंबर दिए जाएंगे.

Category C- (एक साल के लिए 4 नंबर): इस कैटेगरी के तहत सवाई माधोपुर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, धौलपुर, करौली, राजसमंद, बीकानेर के Zone A, B, C को छोड़कर बाकी के स्कूलों में की गई सर्विस पर हर साल चार नंबर मिलेंगे.

Category D- (एक साल के लिए 5 नंबर): D कैटेगरी के तहत जालोर, सिरोही, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, प्रतापगढ़, बारां और झालावाड़ में Zone A में स्थित स्कूलों में की गई सेवा को छोड़कर बाकी के स्कूलों के लिए एक साल में पांच नंबर दिए जाएंगे.

बीमारी के आधार पर क्या होगी मार्किंग?

बीमारी नंबर
पूर्णत: दृष्टिबाधित 10 नंबर
40 से 50% दिव्यांग 5 नंबर
51 से 70% दिव्यांग 8 नंबर
70% से अधिक दिव्यांग 10 नंबर
गंभीर बीमार शिक्षक 10 नंबर
गंभीर बीमार पति/पत्नी/बच्चे 8 नंबर

स्पेशल कैटेगरी के लिए ये है मार्किंग

कैटेगरी नंबर
विधवा होने पर 8 नंबर
विधुर होने पर 5 नंबर
एकल महिला, अविवाहित होने पर 5 नंबर
पति/पत्नी राज्य-केंद्र सेवा में हों या भूतपूर्व सैनिक होने पर 5 नंबर
राष्ट्रीय पुरस्कृत शिक्षक होने पर 5 नंबर
राज्य स्तरीय पुरस्कृत होने पर 3 नंबर

रिजल्ट के आधार पर क्या है मार्किंग?

संस्था प्रधान नंबर
10वीं-12वीं में 50 से 70% स्टूडेंट्स के फर्स्ट आने पर 1 नंबर
10वीं-12वीं में 70 से 90% स्टूडेंट्स के फर्स्ट आने पर 3 नंबर
10वीं-12वीं में 90 से 100% स्टूडेंट्स के फर्स्ट आने पर 5 नंबर
10वीं-12वीं में 90 से 100% से कम रिजल्ट आने पर 3 नंबर
10वीं-12वीं में 100% रिजल्ट आने पर 5 नंबर
आठवीं में 90 से 100% से कम बच्चों को ए ग्रेड मिलने पर 1 नंबर
आठवीं में 100% को ए ग्रेड मिलने पर 3 नंबर
अन्य टीचर्स नंबर
10वीं-12वीं में 90 से 100% से कम रिजल्ट आने पर 1 नंबर
10वीं-12वीं में 100% रिजल्ट आने पर 3 नंबर
आठवीं में 90 से 100% से कम बच्चों को ए ग्रेड आने पर 1 नंबर
आठवीं में 100% को ए ग्रेड मिलने पर 3 नंबर
प्राथमिक कक्षाओं में उच्च अधिगम स्तर के लिए 2 नंबर

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