Rahul Bhat: राहुल भट्ट की हत्या को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन, सरकारी नौकरी वाले कश्मीरी पंडितों ने दी ‘इस्तीफे’ की धमकी

Rahul Bhat

जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में कश्मीरी समुदाय (Kashmiri Pandits Murder) से ताल्लुक रखने वाले 36 साल के सरकारी कमर्चारी की हत्या के बाद लोगों ने शुक्रवार को सड़कों को ब्लॉक कर लिया, नारे लगाए और 350 सरकारी कर्मचारियों ने नौकरी से इस्तीफा देने की धमकी दी. उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने एसआईटी का गठन करने का ऐलान किया है, जो राहुल भट्ट (Rahul Bhat Killing) की मौत के मामले की जांच करेगी. साथ ही उनकी पत्नी को नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया. लेकिन प्रशासन को लेकर समुदाय के भीतर भरा गुस्सा बढ़ रहा है. इसी समुदाय के लोगों को इससे पहले 90 के दशक में उग्रवाद के चलते घाटी छोड़कर जाना पड़ा था.

राहुल भट्ट राजस्व अधिकारी के तौर पर काम करते थे. आतंकियों ने बडगाम जिले के चडूरा गांव में तहसीलदार के दफ्तर में प्रवेश कर भट्ट को गोली मार दी थी. उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. उनकी कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के लिए एक विशेष पैकेज के तहत नियुक्ति हुई थी, जिसके बाद से वह बीते 10 साल के इस जिले में काम कर रहे थे. राहुल भट्ट के भाई सनी भट्ट ने कहा, ‘मैं इस बात की जांच चाहता हूं कि कैसे आतंकी सरकारी दफ्तर में दाखिल हुए और मेरे भाई को गोली मार दी. सरकार घाटी में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की बात करती है लेकिन उनके खुद के पंडित कर्मचारी सरकारी दफ्तर के भीतर तक सुरक्षित नहीं हैं.’

चार महीनों से बनाया जा रहा निशाना

जम्मू कश्मीर में बीते करीब चार महीनों से लगातार आम नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है. अब इस नई घटना से 4000 कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, जो कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में शिविरों में रह रहे हैं. इन्हें 2010 में विशेष पैकेज के तहत सरकारी नौकरी दी गई थीं. गुरुवार को हुई राहुल भट्ट की मौत के बाद से सैकड़ों की संख्या में कश्मीरी पंडितों ने सड़कों को ब्लॉक करते हुए जम्मू के मुथी, हजारीबाग और बनतालाब इलाकों में टायर जलाए. कश्मीर में भी सैकड़ों लोगों ने कुलगाम में हाईवे को ब्लॉक कर लिया. उन्होंने अपनी सुरक्षा में विफलता का जिम्मेदार केंद्र सरकार को बताया है.

350 कश्मीरी पंडितों ने लिखा पत्र

सरकारी विभागों में काम करने वाले करीब 350 कश्मीरी पंडितों ने सिन्हा को पत्र लिखते हुए कहा कि अब उनके पास ‘कोई विकल्प नहीं बचा’ है. कश्मीरी पंडित अमित सिन्हा ने पत्र दिखाते हुए कहा, ‘हमें यहां असुरक्षित महसूस हो रहा है, हम जम्मू डिवीजन में शिफ्ट होना चाहते हैं. अभी तक प्रशासन ने हमारी मांग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. वह बजाय इसके हमपर लाठी चार्ज कर रहे हैं.’ वहीं बडगाम के डिप्टी कमिश्नर शाबाज मिर्जा ने कर्मियों के इस्तीफा देने की खबरों से जुड़ी रिपोर्ट्स को आधारहीन बताया है. उन्होंने कहा, ‘प्रशासन को किसी तरह का इस्तीफे से जुड़ा पत्र नहीं मिला है.’

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