Power Crisis: बिजली संकट से जूझ रहा पंजाब, अभी भी बंद पड़े हैं 4 पावर प्लांट्स, कई जगहों पर कोयला खत्म

Power Cut

देश में बढ़ती गर्मी के बीच बिजली की मांग (demand of power) में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और कई जगहों पर बिजली में भारी कटौती हो रही है. बिजली की मांग बढ़ने के बावजूद देश भर के थर्मल पावर प्लांट (thermal power plant) कोयले की कमी से कई दिनों से जूझ रहे हैं. कई राज्य थर्मल प्लांटों में अपर्याप्त कोयले के भंडार (insufficient coal stocks) के कारण मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पाटने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं. ज्यादा उत्पादन नहीं होने की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में 4-5 घंटे की कटौती हो रही है.

पंजाब में एक स्वतंत्र बिजली उत्पादक (independent power producer) की दोनों इकाइयों समेत थर्मल प्लांट की चार इकाइयां पिछले कुछ दिनों से बंद पड़े हैं. पंजाब के राजपुरा थर्मल प्लांट (Rajpura thermal plant) में कोयले का स्टॉक 15 दिन का और तलवंडी साबो थर्मल प्लांट (Talwandi Sabo thermal) का स्टॉक डेढ़ दिन का बचा हुआ है. जबकि जीवीके थर्मल पावर प्लांट में कोयले का स्टॉक खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है. रोपड़ थर्मल प्लांट और लहरा मोहब्बत थर्मल प्लांट (Lehra Mohabbat thermal plant) में स्टॉक क्रमशः 9 और 7 दिनों के लिए ही शेष है.

मांग से कम पैदा हो रही बिजली

पंजाब में अभी करीब 15400 मेगावाट बिजली की मांग है जबकि सप्लाई सिर्फ 13400 मेगावाट के आसपास ही हो पा रही है. जबकि मई महीने में धान की बिजाई का सीजन आने पर ये मांग 16000 मेगावाट से भी ज्यादा पहुंच सकती है.

कोयले की कमी के कारण पंजाब में गोइंदवाल साहिब में 540 मेगावाट के जीवीके पावर प्लांट के दोनों यूनिट बंद हो गए हैं. जबकि तलवंडी साबो पावर प्लांट की 660 मेगावाट की यूनिट भी खराब चल रहा है, जिसके कारण बिजली उत्पादन में 1200 मेगावाट की कमी आई है. इस पावर प्लांट द्वारा 5680 मेगावाट की क्षमता के मुकाबले महज 3150 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही है क्योंकि यहां पर भी सीमित मात्रा में कोयला भंडार है. जबकि 1980 मेगावाट के पावर प्लांट का एक यूनिट काम भी नहीं कर रहा है. दोनों कम लोड पर काम कर रहे है और केवल 750 मेगावाट बिजली पैदा कर रहे हैं क्योंकि प्लांट में महज एक दिन का कोयला भंडार बचा है.

प्लांट के 2 यूनिट में से एक पिछले कुछ दिनों से बंद था और दूसरा सोमवार देर रात कोयले की कमी के कारण बंद हो गया है. पंजाब के अन्य थर्मल पॉवर प्लांट्स में भी कोयले की कमी से हालात गंभीर बने हुए हैं. पावरकॉम ने कमी को पूरा करने के लिए बाहर से बिजली खरीदी है, लेकिन पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में 4-5 घंटे की कटौती हो रही है.

अंग्रेजी वेबासइट टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के प्रवक्ता वीके गुप्ता ने कहा कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (Central Electricity Authority) की नई दैनिक कोयला रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू कोयले का उपयोग करने वाले कुल 150 थर्मल पावर स्टेशनों में से 81 पावर स्टेशन में स्टॉक बचा हुआ है. जबकि निजी क्षेत्र के थर्मल प्लांट्स की हालत भी उतनी ही खराब है, 54 प्लांट्स में से 28 प्लांट्स में कोयला भंडार में भारी कमी है. उन्होंने कहा, “राजस्थान और उत्तर प्रदेश दोनों राज्य सबसे ज्यादा पीड़ित हैं क्योंकि राजस्थान में 7,580 मेगावाट की क्षमता वाले सभी सात थर्मल प्लांट्स के पास कोयले का भंडार कम हो रहा है.”

आयातित कोयले का भार उपभोक्ताओं पर पड़ेगा!

दूसरी ओर, घरेलू कोयले की किल्लत के कारण बिजली संकट गहराने की बढ़ती आशंका के बीच बिजली मंत्रालय ने उच्च कीमत वाले आयातित कोयले का भार उपभोक्ताओं पर ही डालने की राय का समर्थन किया है. केंद्रीय बिजली सचिव आलोक कुमार ने समाचार एजेंसी पीटीआई-भाषा से बात करते हुए कहा कि दिसंबर 2022 तक कुछ कोयला-आधारित बिजली संयंत्रों के लिए आयातित कोयले पर आने वाली उच्च लागत का भार उपभोक्ताओं पर डालने देने पर सहमति बनी है.

उन्होंने कहा कि अगर आयातित कोयले पर आधारित बिजली संयंत्र पूरी क्षमता से नहीं चलेंगे, तो बिजली की बढ़ती मांग के कारण घरेलू कोयला आधारित इकाइयों पर दबाव पड़ेगा. इस कदम से बिजली की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी क्योंकि अडाणी समूह, टाटा पावर और एस्सार जैसी आयातित कोयला आधारित इकाइयां बिजली पैदा करने और राज्य वितरण कंपनियों को बेचने में सक्षम होंगी.

अप्रैल महीने की शुरुआत में बिजली मंत्री आरके सिंह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में एस्सार के 1,200 मेगावाट के सलाया संयंत्र और मुंद्रा में अडाणी के 1,980 मेगावाट संयंत्र जैसी इकाइयों को शामिल करते हुए आयातित कोयले की ऊंची लागत को उपभोक्ताओं पर ही डालने को लेकर सहमति बनी थी.

इनपुट- भाषा

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