Pakistan: शहबाज शरीफ की कैबिनेट में शामिल नहीं हुए बिलावल भुट्टो, देश के इस बड़े ‘पद’ पर टिकी हैं उनकी निगाहें, समझें पूरा खेल

Bilawal Bhutto Zardari Pakistan

पाकिस्तान के भुट्टो-जरदारी परिवार के उत्तराधिकारी बिलावल भुट्टो जरदारी (Bilawal Bhutto Zardari) ने मंगलवार को शपथ नहीं ली. इससे प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Shairf) के नेतृत्व वाली सरकार में उनके शामिल होने की अनिच्छा की अटकलों को बल मिला. 33 वर्षीय बिलावल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष हैं. पीपीपी 11 अप्रैल को प्रधानमंत्री शरीफ के नेतृत्व में बनी गठबंधन सरकार में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है. गठबंधन दलों के बीच मतभेदों खासकर पीपीपी द्वारा मंत्रिमंडल में शामिल होने से प्रारंभिक इनकार के कारण इसके गठन में कई दिनों तक देरी हुई.

हालांकि, शहबाज यह चाहते थे कि बिलावल की पार्टी उनकी सरकार में शामिल हो. लेकिन, मंत्रिमंडल गठन के पहले चरण में बिलावल की अनुपस्थिति से कई सवाल उठे, क्योंकि ऐसा कहा जा रहा था कि उन्हें विदेश मंत्री बनाने का भरोसा दिया गया था. पीपीपी के सूत्रों ने कहा कि बिलावल अभी भी मंत्रिमंडल में शामिल होने के लिए अनिच्छुक हैं, क्योंकि इससे चुनाव से पहले उनकी राजनीतिक गतिविधियों में बाधा आ सकती है, जो साल के अंत तक होने की संभावना है. लेकिन प्रधानमंत्री इस पर अड़े हैं कि उन्हें इसमें शामिल होना चाहिए.

पीपीपी और पीएमएल-एन बारी-बारी पाकिस्तान की सत्ता में रहीं

पाकिस्तान में दो मुख्य राजनीतिक दल-बिलावल की पीपीपी और शरीफ की पीएमएल-एन बारी बारी से सत्ता में रहे हैं, जब सेना देश पर शासन नहीं कर रही थी. देश के 75 साल से ज्यादा के इतिहास में आधे से अधिक समय तक सेना ही सत्ता में रही है. एक अन्य सूत्र ने कहा कि बिलावल के पिता आसिफ अली जरदारी ने इमरान खान (Imran Khan) के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से पहले राजनीतिक दलों से वादे किए थे और बिलावल यह सुनिश्चित करना चाहेंगे कि सरकार का समर्थन करने वाले सभी दलों को मंत्रिमंडल में शामिल होने से पहले शामिल किया जाए.

नवाज शरीफ से मिलने लंदन जाएंगे बिलावल

एक्सप्रेस न्यूज पोर्टल ने अपने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि पीपीपी और पीएमएल-एन के बीच विदेश मंत्री पद को लेकर कोई गतिरोध नहीं है. सूत्रों ने कहा कि बिलावल पूर्व प्रधानमंत्री और पीएमएल-एन सुप्रीमो नवाज शरीफ से मिलने के लिए लंदन जाएंगे. लंदन से लौटने के बाद वह विदेश मंत्री के रूप में शपथ लेंगे. अगर बिलावल मंत्रिमंडल में शामिल होते हैं, तो यह पहली बार होगा कि वह मंत्री होंगे. वह पहली बार 2018 में संसद के लिए चुने गए थे.

आखिर क्यों कैबिनेट में शामिल नहीं हुए बिलावल

दरअसल, पाकिस्तान में इस साल के आखिर में चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में बिलावल को उम्मीद है कि वह प्रधानमंत्री पद की रेस में शामिल हो सकते हैं. ऐसे में अगर वह विदेशी मंत्री या किसी और मंत्री पद को स्वीकार करते हैं, तो उनकी छवि को धक्का लग सकता है. बड़े नेताओं के बीच उनका कद छोटा हो सकता है. माना जा रहा है कि यही वजह है कि बिलावल मंत्री पद हासिल करने को अनिच्छुक नजर आ रहे हैं. इसके अलावा, इस बात की भी चर्चा है कि बिलावल को लगता है कि अगर वह विदेश मंत्री बन जाते हैं, तो वह अपनी पार्टी पीपीपी को पाकिस्तान में चुनाव के लिए ठीक ढंग से हैंडल नहीं कर पाएंगे.

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