Paddy Farming: धान की नर्सरी डाल चुके किसान हो जाएं सावधान वरना हो जाएगा नुकसान

Paddy Farming Nursery

देश के ज्यादातर हिस्सों में किसानों ने धान की नर्सरी लगा दी है. कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि जिन किसानों ने धान की पौधशाला लगा दी है वे बकानी रोग की निगरानी करते रहें. बकानी रोग से ग्रस्त पौधा अन्य पौधों की तुलना में अधिक लंबा हो जाता है. ऐसे पौधे कुछ दिनों में ही सूख जाते हैं. जिससे नुकसान हो जाता है. धान की खेती (Paddy Farming) में यह लक्षण पाए जाने पर कार्बेन्डिजम 2.0 ग्राम प्रति लीटर पानी घोल कर छिड़काव करें. भारतीय कृषि अनुसंधान के वैज्ञानिकों ने कहा है कि धान की पौधशाला में यदि पौधों का रंग पीला पड़ रहा है तो इसमे लौह तत्व की कमी हो सकती है. पौधों की ऊपरी पत्तियां यदि पीली और नीचे की हरी हो तो यह लौह तत्व की कमी दर्शाता है. इसके लिए 0.5 फीसदी फेरस सल्फेट+0.25 परसेंट चूने के घोल का छिड़काव करें.

कृषि वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस मौसम में किसान मक्का (Maize) फसल की बुवाई के लिए खेतों को तैयार करें. इसकी संकर किस्में एएच-421 व एएच-58 हैं. उन्नत किस्में पूसा कम्पोजिट-3, पूसा कम्पोजिट-4 हैं. बीज किसी प्रमाणित स्रोत से ही खरीदें. बीज की मात्रा 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें. पंक्ति-पंक्ति की दूरी 60-75 सेमी तथा पौधे से पौधे की दूरी 18-25 सेमी रखें. मक्का में खरपतवार नियंत्रण के लिए एट्राजिन 1 से 1.5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर 800 लीटर पानी में घोल कर स्प्रे करें.

इस समय इन फसलों की बुवाई कर सकते हैं किसान

यह समय चारे के लिए ज्वार की बुवाई के लिए अच्छा समय है. इसलिए किसान पूसा चरी-9, पूसा चरी-6 या अन्य सकंर किस्मों की बुवाई करें. बीज की मात्रा 40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें. लोबिया की बुवाई का भी यह सही समय है. यह समय मिर्च, बैंगन व फूलगोभी (सितम्बर में तैयार होने वाली किस्में) की पौधशाला बनाने के लिए अच्छा है.

किसान पौधशाला में कीट अवरोधी नाईलोन की जाली का प्रयोग करें, ताकि रोग फैलाने वाले कीटों से फसल (Crop) को बचाया जा सके. पौधशाला को तेज धूप से बचाने के लिए छायादार नेट द्वारा 6.5 फीट की ऊंचाई पर ढंक सकते हैं. बीजों को केप्टान (2.0 ग्राम/ किग्रा बीज) के उपचार के बाद पौधशाला में बुवाई करें.

मिर्च, बैंगन व फूलगोभी की रोपाई करें

जिन किसानों (Farmers) की मिर्च, बैंगन व फूलगोभी की पौध तैयार है, वे मौसम को ध्यान में रखते हुए रोपाई की तैयारी करें. कद्दूवर्गीय सब्जियों की वर्षाकालीन फसल की बुवाई करें. लौकी की उन्नत किस्में पूसा नवीन, पूसा समृद्वि, करेला की पूसा विशेष, सीताफल की पूसा विश्वास, पूसा विकास, तुरई की पूसा चिकनी धारीदार, पूसा नसदार तथा खीरा की पूसा उदय, पूसा बरखा आदि किस्में हैं.

मिर्च के खेत में विषाणु रोग से ग्रसित पौधों को उखाड़कर जमीन में दबा दें. उसके बाद इमिडाक्लोप्रिड @ 0.3 मिली/लीटर की दर से छिड़काव करें. फलों के नऐ बाग लगाने वाले गड्डों की खुदाई कर उनको खुला छोड़ दें. ताकि हानिकरक कीटो-रोगाणुओं तथा खरपतवार के बीज आदि नष्ट हो जाएं.

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