फेसबुक ने 1 लाख 39 हजार करोड़ में WhatsApp के निर्माता जैन कौम और ब्रायन एकटॉन से WhatsApp खरीदा था और वो वहीं काम भी कर रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे WhatsApp का इस्तेमाल व्यापारिक गतिविधियों के लिए होने लगा और लोगों की निजता का हनन शुरू हुआ तो WhatsApp के फाउंडर ने कंपनी से इस्तीफा दे दिया। आज स्थिति ये है कि यदि कोई व्यक्ति WhatsApp का इस्तेमाल कर रहा है तो उसका पूरा डेटा फेसबुक के पास जा चुका है और रही बची कसर इस नई प्राइवेसी पॉलिसी के बाद पूरी हो जाएगी।

WhatsApp की इस नई पॉलिसी की हकीकत सामने आने के बाद इसका जमकर विरोध किया जा रहा है। स्थिति ये है कि ट्विटर पर लोग खुलकर WhatsApp की नई प्राइवेसी पॉलिसी का विरोध कर रहे हैं और WhatsApp से इस निर्णय को वापस लेने की बात कर रहे हैं।

 

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अब लोग इस WhatsApp से ऊब कर दूसरे मैसेजिंग एप्लिकेशंस की ओर रुख करने की बात करने लगे है, क्योंकि लोग अपनी निजता से खिलवाड़ करने के मूड में नहीं हैं। WhatsApp के गोपनीयता मामले पर यूजर ये तक कह रहे हैं कि ‘हमने अबतक सांप को पाल रखा था’।

 

लोगों द्वारा बायकॉट करने में एक स्थिति ऐसी भी आ जाएगी कि अलोकप्रियता के कारण एप्लिकेशन खुद ब खुद ही कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा। दुनिया के सबसे लोकप्रिय एप्लिकेशन के इस तरह बर्बाद होने की वजह केवल जुकरबर्ग की व्यापारिक लालसा ही बनेगी।

 

दूसरी ओर WhatsApp की नई प्राइवेसी पॉलिसी किसी भी देश के नागरिकों की निजता का सीधा-सीधा उल्लंघन है। ऐसे में भारत सरकार को इस पूरे मसले पर दखल देने की आवश्यकता है क्योंकि ये भविष्य में सुरक्षा मानकों के लिए भी खतरा बन सकती है, लेकिन जुकरबर्ग को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा क्योंकि उनका मुद्दा व्यापार है।

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