कहना है कि जब ज्योति उन्हें मिली तो उन्होंने शगुन के तौर पर ज्योति को शहद चटाया और उसे लोरी गाकर सुलाया।

यहाँ तक कि रात को जब वो भूखी होती थी और उठ जाती थी तो उसे बोतल से दूध भी पिलाया। वही ज्योति चाहती थी, कि वो बड़ी होकर नौकरी करे और अपने पैरो पर खड़ी होकर दिखाए। ऐसे में डिंपल बाबा ने ज्योति के इस सपने को पूरा किया और उसे खूब पढ़ाया। अगर सीधे शब्दों में कहे तो जब ज्योति के माँ बाप ने अपनी पांचवी बेटी को अपनाने से इंकार कर दिया, तो डिंपल बाबा ने उसकी पूरी जिम्मेदारी उठायी। हालांकि ज्योति की शादी के बाद डिंपल बाबा काफी उदास है, लेकिन उन्हें ख़ुशी इस बात की है, कि भगवान् ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी थी, उन्होंने उस जिम्मेदारी को पूरी तरह से निभाया।

ज्योति जब पांच साल की हुई तो उसे इलाके के स्कूल में दाखिल करवाया गया। जब ज्योति की विदाई का समय आया और उससे उसके माँ बाप की याद आने के बारे में पूछा गया, तो ज्योति ने कहा कि डिंपल बाबा ही मेरे सब कुछ है। बता दे कि डिंपल बाबा ने पहले उसे ग्रेजुएशन करवाई और फिर कंप्यूटर में डिप्लोमा भी करवाया। ऐसे में ज्योति का कहना है कि जिस तरह से उन्होंने मुझे पाला, वैसे मेरे अपने माता पिता भी नहीं पाल सकते। ज्योति भगवान् का शुक्रिया अदा भी करती है कि उसे बाबा जैसे माता पिता मिले, जिन्होंने उसकी हर छोटी से छोटी इच्छा को पूरा किया।

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