बिहार विधान परिषद में मशहूर शायर अल्लामा इकबाल को लेकर भाजपा और जदयू के सदस्य ही आमने-सामने हो गए। जदयू के गुलाम गौस ने उर्दू के बड़े नाम का जिक्र करते हुए मशहूर शायर इकबाल का नाम लिया। इस पर कृषि मंत्री व भाजपा नेता अमरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि इकबाल ने ‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा… जरूर लिखा मगर वह बंटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए।

उनके इस बयान का सदन में जदयू के सदस्यों ने ही विरोध किया। खालिद अनवर और तनवीर अख्तर ने कहा कि इकबाल के पाकिस्तान जाने की बात गलत है। इकबाल का निधन तो आजादी के पहले ही 1938 में हो गया था। इस पर विरोधी दल के सदस्यों ने भी मेज थप-थपाकर समर्थन दिया। सच्‍चाई यही है कि अल्‍लामा जब तक जिंदा थे, पाकिस्‍तान बना ही नहीं था।

वह देश की आजादी और विभाजन के पहले ही दिवंगत हो गए थे। हाला‍ंकि बाद के दिनों में उनके विचारों में आमूल-चूल बदलाव हुआ था। शुरुआती दिनों में पक्‍के हिंदुस्‍तानी अल्‍लामा बाद के दिनों में मजहब को लेकर ज्‍यादा फिक्रमंद हो गए थे।

उनका झुकाव भी मुस्लिम राष्‍ट्र के प्रति हो गया था। कहा जाता है हिंदुस्‍तान के विभाजन और पाकिस्‍तान की स्‍थापना का विचार सबसे पहले उन्‍होंने ही लाया था। उनका जन्‍म सियालकोट में जबकि निधन लाहौर में हुआ था।

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