नई दिल्ली/मेरठ । आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में किसान महापंचायत को संबोधित किया। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश के किसानों के सामने अब ‘करो या मरो’ की स्थिति है। इसलिए किसान दिल्ली के बाॅर्डर पर तीन महीने से बैठे हैं और अब तक 250 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं। किसानों के लिए यह तीनों कानून डेथ वारंट जैसा है। केंद्र सरकार किसानों की खेती चंद पूंजीपतियों को सौंपना चाहती है। ऐसा होने पर किसान अपने ही खेत में मजदूर बनने को मजबूर होगा। उन्होंने कहा, मेरठ में आयोजित किसान महापंचायत में केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ हर तरफ गुस्सा देखने को मिला। चारों तरफ से यही आवाज आ रही थी कि कृषि से जुड़े काले कानून वापस हों। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दाखिल कर कहा है कि हम एमएसपी लागू नहीं करेंगे। किसानों पर जितना अत्याचार केंद्र की भाजपा सरकार ने किए हैं, उतना तो अंग्रेजों ने भी नहीं किए। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता कह रहे हैं कि एमएसपी है और रहेगी, तो यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ एक मंडी बता दें, जहां एमएसपी पर फसल ली जा रही हो।
मेरठ में आयोजित किसान महापंचायत में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के अलावा कैबिनेट मंत्री राजेंद्र पाल गौतम, भगवंत मान, ‘आप’ के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष सभाजीत, दिलीप पांडे, खाप के चौधरी, किसान नेता और अन्य विधायक मौजूद रहे। इस दौरान सीएम अरविंद केजरीवाल ने चौधरी चरण सिंह और चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रृद्धांजलि दी।

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज मेरठ में आयोजित किसान महापंचायत को संबोधित किया। ‘आप’ संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज हमारे देश का किसान बहुत ज्यादा पीड़ा में है, आज हमारे देश का किसान बहुत ज्यादा दुखी है। किसानों को 3 महीने से ज्यादा हो गए। पिछले 95 दिनों से कड़कती ठंड में दिल्ली के बॉर्डर पर हमारे किसान भाई अपने परिवार और छोटे-छोटे बच्चों के साथ धरने पर बैठा हुआ है। ऐसे धरना करने में किसी को मजा नहीं आता है। ऐसे ठंड में अपने शरीर को गलाने में किसी को मजा नहीं आता है। 250 से अधिक किसान भाइयों की शहादत हो चुकी है। पिछले 3 महीने के अंदर 250 से अधिक किसान शहीद हो चुके हैं,

लेकिन केंद्र सरकार के उपर जू नहीं रेंग रही है। पिछले 70 साल में इस देश के किसान ने केवल और केवल धोखा देखा है। सारी पार्टियों और सरकारों ने अपने किसानों को धोखा दिया। 70 साल में कई सरकारी आईं। 70 साल में इस देश के लोगों ने लगभग हर पार्टी को सरकार बनाने का मौका दिया, लेकिन सभी पार्टियों की सरकारों ने किसानों को धोखा दिया। किसान पिछले 70 साल से क्या मांग रहा है? वह कहता है कि मेरी फसल का सही दाम दे दो। सभी पार्टियों के घोषण पत्र उठा कर देख लो। पिछले 70 साल में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर इतने चुनाव हो लिए। हर पार्टी की घोषणा पत्र में लिखा होगा कि हमारी सरकार बना दो, हम तुम्हें सही दाम देंगे। यह सभी पार्टियां कहती हैं। चुनाव से पहले सारी पार्टियां कहते हैं कि हम आपको सही दाम देंगे, लेकिन एक भी पार्टी की सरकार ने आज तक किसानों को फसल का सही दाम नहीं दिया। अगर आज फसल के सही दाम मिल जाते, तो हमारे देश का किसान आत्महत्या नहीं करता, हमारे देश के किसान को लोन नहीं लेना पड़ता। आज हमारे देश का किसान कहता है कि हमारा लोन माफ कर दो। सारी पार्टियां चुनाव के पहले कहती हैं हमको वोट दे दो, हम तुम्हारा लोन माफ कर देंगे। हर पार्टी चुनाव के पहले कहती है, लेकिन किसी पार्टी में नहीं किया और जीतने के बाद कहते हैं कि पैसा नहीं है।

-केंद्र सरकार के लाए गए तीनों कृषि कानून किसानों के लिए डेथ वारंट जैसा है : अरविंद केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले 25 साल से मैं 3.50 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं। यह कोई छोटी बात नहीं है। हर चुनाव के पहले पार्टियां कहती हैं, तुम्हारे बच्चों को नौकरियां देंगे, लेकिन किसी पार्टी में नौकरी नहीं दी। किसी सरकार ने नौकरी नहीं दी। मैं सोच रहा था कि यह किसान बॉर्डर के ऊपर क्यों क्यों बैठे हैं, वह इतनी ठंड में क्यों बैठे हैं, वह अपना शरीर क्यों गला रहे हैं, अपनी शहादत क्यों दे रहे हैं, अपनी जिंदगी क्यों दे रहे हैं, क्योंकि अब जिंदगी और मौत की लड़ाई आ गई है? यह जो तीन कानून केंद्र सरकार ने बनाए हैं, यह किसानों का डेथ वारंट (मौत के वारंट) हैं। यह तीनों कानून लागू होने के बाद किसानों की जो बची खेती है, उसे केंद्र सरकार उठा कर के अपने तीन-चार बड़े-बड़े पूंजीपति साथियों के हाथों में सौंपना चाहती है। सबकी खेती चली जाएगी, सबकी खेती उन पूंजीपतियों के हाथ में चली जाएगी और जो किसान आज अपने खेत के अंदर हल जोतता है और किसानी करता है। वह किसान अपने खेत में मजदूर बनने के लिए मजबूर हो जाएगा, जो आज किसान अपने खेत का मालिक है। यह लड़ाई करो या मरो की लड़ाई है। इसलिए किसान आज बॉर्डर के ऊपर बैठा हुआ है, अपने शरीर को गला रहा है और अपनी शहादत दे रहा है।

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