भारतीय इतिहास में शबनम पहली ऐसी महिला होगी, जिसे फांसी पर लटकाया जाएगा। भारत में फांसी देने के बाद फंदे को जला दिया जाता है। माना जाता है कि फांसी की प्रथा दुनिया में 10वीं सदी में शुरू हुई थी। इससे पहले, ब्रिटेन और दूसरे देशों में सार्वजनिक तौर पर जल्लाद सिर को धड़ से अलग करके मौत की सजा देता था। हालांकि, अब फांसी की सजा का दुनियाभर में विरोध हो रहा है और उसकी जगह लीथल इंजेक्शन देकर दोषी को मौत की सजा देने की मांग की जा रही है। वैसे अमरीका समेत कुछ देशों में लीथल इंजेक्शन के जरिए दोषी को मौत की सजा दी जा रही है।

 

 

 

नाटा मलिक ने की थी फांसी के फंदे से कमाई
कुछ देशों में इस रस्सी को छोटे टुकड़ों में काटकर जेल के डेथ स्क्वॉयड को दे दिया जाता है। इसमें बड़े अधिकारियों से लेकर गार्ड तक शामिल होते हैं। भारत में फांसी वाली रस्सी जल्लाद को ही दे दी जाती है। वैसे भारत में इस रस्सी को लेकर अंधविश्वास से जुड़ी कुछ बातें सामने नहीं आई हैं। कहा जाता है कि वर्ष 2004 में जब नाटा मलिक जल्लाद ने रेप और हत्या के दोषी धनंजय चटर्जी को फांसी पर लटकाया, तब उसने इस रस्सी के टुकड़ों से कमाई की थी। बंगाल में लोगों में यह बात फैल गई कि अगर फांसी के इस्तेमाल किए हुए फंदे को घर में रखें या इसका लाकेट पहने तो किस्मत बदल जाएगी। इसमें नौकरी मिलना, कर्ज और बीमारी से छुटकारा आदि शामिल है। नाटा मलिक के घर पर लोग फंदे की रस्सी का टुकड़ा लेने के लिए दूर-दूर से आने लगे थे। मलिक के पास पहले दी गई फांसी की रस्सियां भी रखी हुई थीं, उसने उन सभी के टुकड़े दो-दो हजार रुपए में बेचे। हालांकि, अब भारत में फांसी की रस्सी को जला दिया जाता है।

 

फांसी को लेकर अंधविश्वास की घटनाएं ब्रिटेन समेत यूरोप में बढ़ती गई। इसके बाद वहां मृत्युदंड के तौर पर दोषी व्यक्ति का सिर जब धड़ से अलग किया जाने लगा तो यह बात भी फैला दी गई कि मृत व्यक्ति के शरीर का कोई अंग घर में रखें तो पुरानी बीमारियां दूर हो जाएंगी और यह किस्मत चमकाता है। ऐसे में लोग यह कारनामा भी करने से बाज नहीं आए। टॉवर हिल पर जब जल्लाद दोषी व्यक्ति का सिर धड़ से अलग करता था, तो लोग दूर-दूर से यह दृश्य देखने आते थे। उनमें कई ऐसे होते थे, जो अपने घर से कपड़ा लाते थे और उसे मृतक के खून में डुबोकर अपने साथ ले जाते थे। फ्रांस में जल्लाद इस खून को ऊंचे दाम पर बेच देते थे, जबकि चीन में इस खून को एकत्रित कर उन्हें दवा बनाने में इस्तेमाल किया जाता था।

 

 

जल्लाद रस्सी के छोटे-छोटे टुकड़े कर उसे बेच देता था
ब्रिटेन में जब फांसी दी जाती थी, तो रस्सी को जल्लाद को दे दिया जाता था। धीरे-धीरे यह बात प्रचलित हो गई कि अगर रस्सी का टुकड़ा घर पर रखें या उसका लॉकेट कोई पहने तो उसकी किस्मत बदल जाती है। इसके बाद वहां जल्लाद इन रस्सी के छोटे-छोटे टुकड़े करके बेच देते थे और लोग मोटे दाम पर उसे खरीद लेते थे। यही नहीं, यहां लंबे समय तक यह भी माना जाता रहा कि अगर कोई फांसी के इस्तेमाल किए हुए फंदे को छू ले तो, उसकी त्वचा संबंधी, पेट या गले से जुड़ी बीमारी ठीक हो जाती है। ब्रिटेन में 1965 में फांसी देने पर रोक लगा दी गई।

अजब गजब,समाचार की अन्य खबरें

लिंक कॉपी हो गया