ऑफिस में यदि बॉस करे कोई गन्दी हरकत तो ऐसे दे जवाब,जानिए

जब औरत शक्ति प्रदर्शन पर उतारू हो जाती है, पुरूष कहीं न कहीं उसे नीचा दिखाने की कोशिश करता है।

दरअसल यह एक आदिम खेल है। इसी से मनुष्य की निरंतरता भी बनी हुई है। औरत सजती संवरती है, बदन उघाडू ड्रेसेज पहनती है इसलिए ताकि लोग उसे देखें और तारीफ करें। पुरूष की लोलुप दृष्टि उसे गहरी संतुष्टि देती है वर्ना वो बहनजी टाइप बन कर काम की जगह क्यों नहीं जाती। पुरूष का नोटिस न लेना उसे अपमानित कर सकता हैं। वह बढ़ावा देती है, तब बेचारा भंवरा क्या करे। कलियन की मुस्कान न समझ नादान बना रहे। (भंवरा बड़ा नादान है, जाने न जाने न, कलियन की मुस्कान) मगर बाॅस तो अक्सर मंजे खिलाड़ी होते हैं। वे मुस्कान का मतलब खूब समझते ही नहीं, गंभीर से गंभीर चेहरे को गुदगुदा कर हंसाना भी जानते हैं।

माॅडर्न कल्चर के नाम पर स्वतंत्रा उच्छृंखल व्यवहार में शामिल है सेक्रेटरी को बाँहों में लपेटना, कंधे थपथपाना, कमर में  हाथ डालकर चिपकाना। लड़की माॅडर्न दिखने और बाॅस को खुश रखने के लिए हंस कर सब झेल जाती है।

लेकिन हर औरत के संस्कार उस के नैतिक मूल्य, चरित्रा एक से नहीं होते। सब को बाॅस का व्यवहार पसंद नहीं आता। यह सिर्फ हमारे देश की ही बात नहीं, यूरोप अमेरिका में भी जहां की सम्यता में ”सब चलता है’, जैसी सोच के तरह यौन उन्मुक्तता का वातावरण विद्यमान है, कई लड़कियों व महिलाओं को बाॅस की छेड़खानी, आशिकमिजाजी व लिबर्टी लेना रास नहीं आता। अपनी अस्मिता का खंडन समझती हैं वे इसे।

बाॅस का अपनी महिला मातहत से अभद्र व्यवहार यह सिद्ध करता है कि उसके लिए वह एक कर्मचारी न होकर महज ‘सैक्स आब्जेक्ट’ है। महिला की अपनी कोई अस्मिता नहीं है। वह मानों बाॅस की निजी संपत्ति है जिसे वह मनचाहे ढंग से इस्तेमाल कर सकता है।
नारी का आत्मसम्मान ऐसी हरकतों को बर्दाश्त न कर विद्रोह करता है लेकिन उन औरतों को क्या कहें जो बाॅस की इस कमजोरी का फायदा उठाती हैं, उसे एनकैश करती हैं।

वे स्वयं बाॅस को बढ़ावा देती है, झूठी कहानियां गढ़ कर उसकी सहानुभूति बटोरती हैं। कभी-कभी कमउम्र लड़कियां बगैर इरादे के, अनजाने में ही उसके ‘मेल अट्रैक्शन’ से मोहित होकर संयम भूल बहक जाती हैं जिसे बाॅस केवल इस्तेमाल करता है और बोर होने पर पुरानी कमीज की तरह ‘डिसकार्ड’ कर देता है।

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