Monkeypox Outbreak: मंकीपॉक्स 42 देशों में फैला, 3,300 से ज़्यादा मामले, आपात्काल घोषित करने पर WHO कर रहा विचार

Monkeypox declared a pandemic

मंकीपॉक्स (Monkeypox) को विश्व स्वास्थ्य नेटवर्क (WHN) ने महामारी घोषित करने का फैसला किया है. इसके 42 देशों में करीब 3,300 मामले सामने आ चुके हैं. डब्ल्यूएचएन ने अपने बयान में यह भी कहा है कि यह दुनिया के कई देशों में तेज़ी से फैल रहा है और बिना वैश्विक स्तर पर कदम उठाए रोक पाना मुश्किल है. हालांकि इस मामले पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Healh Organistaion) का फैसला आना अभी बाकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी आपात्कालीन टीम को इसकी जांच करने और इसको वैश्विक आपात्काल घोषित किए जाने के फैसले पर विचार-विमर्श करने का निर्देश दिया है. संगठन की तरफ से ख़बर लिखे जाने तक कोई फैसला नहीं आया है. जबकि संगठन के जांच के आदेश के निर्देश की भी आलोचना हो रही है.

न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ एक अफ्रीकी वैज्ञानिक ने कहा है कि मंकीपॉक्स के मामले सालों से उनके क्षेत्र में पाए जाते रहे हैं. जानकार का मानना है कि अगर ऐसा किया जाता है तो जिस तरह कोविड महामारी के दौरान ग़रीब और अमीर देशों के बीच असमानता देखी गई थी – फिर से वैसे ही हालात पैदा हो सकते हैं. जानकार कहते हैं कि अगर विश्व स्वास्थ्य स्वास्थ्य संगठन मंकीपॉक्स को वैश्विक आपात्काल घोषित करता है तो इसका मतलब होगा कि मंकीपॉक्स को डब्ल्यूएचओ एक “असाधारण घटना” मानता है. इसका मतलब होगा कि बीमारी के और भी देशों में फैलने का ख़तरा है. कई वैज्ञानिक मानते हैं कि इस तरह के फैसले से बीमारी को काबू करने में और मुश्किलें आएगी. हाल के दिनों में मंकीपॉक्स के मामले विकासशील देशों में देखे जा रहे हैं जिन्होंने प्रतिबंधों को लागू करना शुरु कर दिया है.

सपसे पहले नाइजीरिया में पाया गया था मंकीपॉक्स

जानकार बताते हैं कि मंकीपॉक्स की वजह से सेंट्रल और पश्चिमी अफ्रीका में दशकों तक कम से कम दस फीसदी लोग मारे गए हैं. अफ्रीकाभर में महामारी के दरमियान एक भी मौतें नहीं हुई हैं. एक नाइजीरियाई वायरोलॉजिस्ट ओयवेल तोमोरी ने कहा कि, “अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन को सच में चिंता होती तो वो अपनी आपात्कालीन टीम को साल 2017 में ही जांच के निर्देश देता – जब यह सबसे पहले नाइजीरिया में पाया गया था (Monkeypox first emerged in Nigeria) और तब हम में से कोई नहीं जानता था कि अचानक सैकड़ों मामले कैसे सामने आ गए.” उन्होंने कहा कि “यह थोड़ा उत्सुक करने वाला है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन अपने एक्सपर्ट को तभी बुलाता है जब बीमारी व्हाइट देशों में पाए जाते हैं.”

रिपोर्ट के मुताबिक़ अमेरिकी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने 42 देशों में 3,300 मामलों की पुष्टि की है – जहां इस बीमारी के एक भी मामले पहले नहीं देखे गए थे. 80 फीसदी से ज़्यादा मामले यूरोपीय देशों में पाए गए हैं. इससे पहले पिछले साल अफ्रीका में 62 मौतों के साथ 1,400 मामलों की पुष्टि हुई थी. आपको बता दें काउंसिल ऑफ फॉरेन रिलेशंस में वैश्विक स्वास्थ्य के वरिष्ठ फेलो डेविड फिडलर का कहना है कि बीमारी के अफ्रीका के बाहर फैल जाने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन का हालिया ध्यान ग़रीब और अमीर देशों के बीच की विभाजन को अनजाने में और बिगाड़ने जैसा होगा – जैसा हमने कोरोना महामारी के समय देखा था.

उन्होंने कहा कि – “बीमारी को लेकर विश्व स्वास्थ्य सगंठन की सक्रीयता के पीछे कोई वैध कारण होंगे कि आख़िर वो इसके अमीर देशों में फैलने के बाद ही क्यों इसपर ध्यान दे रहा है लेकिन ग़रीब देशों को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के कदम में दोहरी मापदंड है.”

‘अब मंकीपॉक्स को काबू करने में पश्चिम की दिलचस्पी, तभी एक्शन में WHO’

उन्होंने कहा कि “जबतक अफ्रीकी सरकार वैक्सीन नहीं मांगती है, इस बीच उन्हें वैक्सीन भेजना संरक्षण पाने जैसा होगा क्योंकि अब बीमारी को रोकने में पश्चिम की दिलचस्पी है.” विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक वैक्सीन शेयरिंग मेकेनिज़्म स्थापित करने का प्रस्ताव भी पेश किया है जो उन देशों में भेजी जाएगी जहां बीमारी हालिया समय में तेज़ी से फैल रही है – जैसे ब्रिटेन – जहां इस बीमारी के सबसे ज़्यादा मामले दर्ज किए जा रहे हैं.

जानकार यह भी बताते हैं कि मंकीपॉक्स के मामले सिर्फ गे और बायसेक्शुअल में ही देखे जा रहे हैं या उन पुरुषों में देखे जा रहे हैं जिन्होंने दूसरे पुरुषों के साथ संबंध बनाए हैं. हालांकि वैज्ञानिकों ने इस बीमारी से संक्रमित मरीज़ों के साथ नज़दीकी बनाने, उनके कपड़े, बेडशीट के इस्तेमाल को लेकर चेतावनी भी दी है. मंकीपॉक्स से संक्रमित मरीज़ों को बुखार, शरीर में दर्द और खरोच जैसे लक्षण (Monkeypox Symptoms) देखे जा रहे हैं – इनमें ज़्यादातर बिना किसी इलाज के सप्ताहभर में ठीक हो जाते हैं. ऐसे में अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन इस बीमारी को वैश्विक आपात्काल भी घोषित करता है तो यह साफ नहीं है कि इसका ज़्यादा कुछ प्रभाव पड़ेगा.

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