Maharashtra Political Crisis: सरकार संकट में, अब शिवसेना को बचाने की तैयारी, उद्धव ठाकरे ने शाम 7.30 बजे मुंबई के सभी कॉरपोरेटर्स को बुलाया

Maharashtra Cm Uddhav Thackeray

महाराष्ट्र की राजनीतिक उठापटक (Maharashtra Political Crisis) के बीच मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी, अपनी सरकार और अपना अस्तित्व बचाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं. शिवसेना के 55 विधायकों में से करीब 40 विधायक और 6 शिवसेना समर्थक निर्दलीय विधायकों द्वारा साथ छोड़ दिए जाने के बाद शिवसेना के 18 सांसदों में से 8 से ज्यादा एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) गुट के संपर्क में होने की खबरें आने के बाद मुंबई के 3 से ज्यादा और ठाणे, कल्याण-डोंबिवली के दो दर्जन से ज्यादा कॉरपोरेटरों के एकनाथ शिंदे के समर्थन में कूदने की खबरें तेज हो गईं. ऐसे में दोपहर में जिलाप्रमुखों की बैठक के बाद आज (24 जून, शुक्रवार) शाम उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) ने कॉरपोरेटरों की अहम बैठक बुलाई है.

उद्धव ठाकरे की रणनीति साफ समझ आ रही है कि अगर राज्य में सरकार चली भी गई तो ग्रास रुट में शिवसेना की जड़ें मजबूत रहें ताकि एक बार फिर संघर्ष कर इस झटके से उबरने का हौसला रहे, हिम्मत रहे, उम्मीद बनी रहे. यही वजह है कि आज शिवसेना की बैठक जिला प्रमुखों, जिला संपर्क प्रमुखों से हो रही हैं और नगरसेवकों से हो रही हैं. यह रणनीति अपनाए जाने के अलावा आगामी स्थानीय निकायों और महापालिका चुनावों को देखते हुए कोई और रास्ता भी नहीं है.

शिवसेना भवन में जिला प्रमुखों और जिला संपर्क प्रमुखों की बैठक

शिवसेना पार्टी प्रमुख ने नगरसेवकों की मीटिंग से पहले जिला प्रमुखों और जिला संपर्क प्रमुखों की बैठक दोपहर 12 बजे शिवसेना भवन में बुलाई. अब शाम को नगरसेवकों के साथ अहम बैठक है. इस बैठक पर सबकी नजरें लगी हुई हैं.

मुंबई महानगरपालिका कॉरपोरेटर्स एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में?

मुंबई महानगरपालिका के कुछ कॉरपोरेटर्स एकनाथ शिंदे के लगातार संपर्क में बताए जा रहे हैं. विधायक यामिनी जाधव भी शिंदे गुट में शामिल हो चुकी हैं. जाधव पुर्व कॉरपोरेटर हैं. उनके पति यशवंत जाधव मुंबई महानगरपालिका के स्थायी समिति के अध्यक्ष हैं. ऐसे में यामिनी जाधव को लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि वे महानगरपालिका के कॉरपोरेटर्स को शिंदे गुट की ओर खींचने की कोशिश करेंगी. हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि मुंबई महानगरपालिका के ज्यादातर कॉरपोरेटर्स शिंदे गुट में नहीं जाएंगे. खतरा मुंबई में नहीं बल्कि कल्याण-डोंबिवली के ज्यादा कॉरपोरेटर्स के शिंदे गुट में जाने का है.

मुंबई में ठाकरे नाम का करिश्मा चलता है. यहां एकनाथ शिंदे का उतना असर नहीं है. फिर भी शिवसेना सावधानियां बरत रही हैं. ऐसे में इन बैठकों पर सबकी नजरें लगी हुई है. शिवसेना अपने सबसे मजबूत किले को लेकर कोई ढिलाई बरतने को अफोर्ड नहीं कर सकती. बीएमसी को शिवसेना का ऑक्सीजन माना जाता है. पहले सांस और धड़कनें बची रहें पार्टी का विस्तार आगे होता रहेगा. बाकी मुश्किलों से पार पाने का काम चलता रहेगा.

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