Maharashtra Political Crisis: मुंबई में ही बसती है उद्धव की शिवसेना, बाकी महाराष्ट्र में खोजते रह जाओगे?

Uddhav Thackeray

महाराष्ट्र में सियासी संकट (Maharashtra Political Crisis) अभी भी बना हुआ है. शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे करीब 40 विधायकों के अपने पक्ष में होने का दावा कर रहे हैं, जिससे उद्धव ठाकरे की कुर्सी मुश्किल में नजर आ रही है. एकनाथ शिंदे के बागी तेवर को देखते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Uddhav Thackeray) के भविष्य को संकट में डाल दिया है. अभी महाराष्ट्र में बैठकों का दौर जारी है, जिसमें बीजेपी भी एक्टिव हो गई है. महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के घर पर हलचल तेज हो गई है. बीजेपी विधायक फडणवीस के घर पहुंचने लगे हैं. वैसे, अगर एकनाथ शिंदे की गुगली चल जाती है तो ना सिर्फ ठाकरे की कुर्सी चली जाएगी, जबकि शिवसेना भी मुंबई तक सीमित हो जाएगी.

दरअसल वर्तमान परिस्थितियां इशारा कर रही है कि पूरे राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे सिर्फ मुंबई तक ही सीमित हो जाएंगे. उद्धव ठाकरे के मुंबई तक सीमित होने की बात इसलिए पुख्ता होती दिख रही है कि क्योंकि आज जो सही में उद्धव ठाकरे के ‘अपने’ हैं, उनमें अधिकतर मुंबई के ही जनप्रतिनिधि हैं. जी हां, शिवसेना से ‘बागी’ हुए एकनाथ शिंदे ने जिन विधायकों के साथ या उनके दम पर महाराष्ट्र में खेला किया है, वो मुंबई से बाहर के हैं. एकनाथ शिंदे का साथ देने वाले विधायकों में अधिकतर विधायक मुंबई से बाहर के हैं और उनकी संख्या इतनी ज्यादा है कि वो बताते हैं कि अब मुंबई के बाहर उद्धव ठाकरे की पकड़ नहीं रही है, क्योंकि वहां के विधायक भी अब ठाकरे परिवार के साथ नहीं है.

अगर मान लीजिए ये सभी विधायक अपनी पार्टी बदलते हैं तो यह कहना गलत नहीं होगा कि शिवसेना अब मुंबई की पार्टी बनकर रह गई है. इसके बाद संख्याबल में जब बदलाव होगा तो महाराष्ट्र के नक्शे में सिर्फ मुंबई में ही शिवसेना के विधायक दिखाई देंगे. लेकिन, अभी यह देखना होगा कि एकनाथ शिंदे किस तरह से अपनी फील्डिंग सेट करते हैं. अगर वे शिवसेना में रहते हुए ही अपना प्लान में कामयाब हो जाते हैं तो परिस्थियां कुछ अलग होंगी.

अभी क्या कहते हैं नंबर्स?

अगर महाराष्ट्र विधानसभा के नंबर्स की बात करें तो महाराष्ट्र विधानसभा में 288 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए बहुमत का जरूरी आंकड़ा 145 का है. साल 2019 में बीजेपी को 105, शिवसेना को 56, एनसीपी को 54 और कांग्रेस को 44 सीटें मिली थी. अभी शिवसेना के बाद 55 विधायक हैं. अब इसमें एकनाथ शिंदे और मीडिया के अलग अलग दावे हैं. एकनाथ शिंदे ने दावा किया था कि उनके साथ शिवसेना के 40 विधायक हैं. वहीं, कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि शिवसेना के 41 विधायक शिंदे के पास है. वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि अब शिवसेना के पास अपने 16 विधायक ही बचे हैं. ऐसे में समझा जा सकता है कि 40 के आस-पास विधायक ठाकरे की पकड़ से बाहर है.

अब क्या है परिस्थिति?

अगर मान लीजिए शिंदे दो तिहाई से ज्यादा विधायक अपनी तरफ कर लेते हैं तो शिवसेना में निर्णायक भूमिका में आ जाएंगे और वो किसी भी अन्य पार्टी के साथ सरकार बनाने में सफल हो जाएगे. लेकिन, अगर वो नहीं कर पाते हैं तो सीधे में बीजेपी में शामिल होकर सरकार बना सकते हैं. लेकिन, अब ये शिंदे पर निर्भर करता है कि वो आगे क्या फैसला लेते हैं. लेकिन, अगर वो शिवेसना दो तिहाई विधायकों को अपनी ओर कर लेते हैं तो कहा जा सकेगा कि ठाकरे के पास सिर्फ 16 विधायक (वर्तमान स्थिति के हिसाब से) बचे हैं. अगर ये सभी विधायक किसी और पार्टी में जाते हैं तो शिवसेना का दायरा ही काफी कम हो जाएगा और पार्टी 16 विधायकों तक सीमित हो जाएगी.

मुंबई तक कैसे सीमित हो गए ठाकरे?

अगर मान लीजिए शिवसेना के जिन 40 विधायकों की बात हो रही है, वो अगर शिवसेना से दूर जाते हैं तो शिवसेना के पास सिर्फ 15-16 विधायक ही बच पाएंगे. ऐसे में बताया जा रहा है कि जो ये 15-16 विधायक हैं, उनमें अधिकतर सांसद मुंबई या आसपास से आते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन 16 विधायकों की बात हो रही है, उनमें उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे, सुनील राऊत (विखरोली), रविंद्र वायकर (जोगेश्वरी ईस्ट), सुनील प्रभू (दिंदोषी), दिलीप लांडे (चेंडीवली), प्रकाश फार्तफेकर (चेंबूर), संजय पोतनीस (कालिना), अजय चौधरी (शिवडी), भास्कर जाधव (गुहागर) आदि शामिल हैं. ये सभी विधायक मुंबई और उसके-पास के क्षेत्र से आते हैं.

इनके अलावा ठाकरे के साथ कुछ विधायक बताए जा रहे हैं, जिनमें चिमणराव पाटील, राहुल पाटील, संतोष बांगर, वैभव नाईक आदि नाम शामिल हैं. सिर्फ ये ही विधायक हैं, जो महाराष्ट्र के दूसरे इलाके और मुंबई से 200-300 किलोमीटर दूर से आते हैं. शिंदे कोई भी फैसला ले, लेकिन यह लगभग तय है कि ठाकरे का राजनीतिक प्रभाव मुंबई तक रह जाएगा, वहीं शिंदे के दूसरे कदम से पूरी शिवसेना का प्रभाव मुंबई तक सीमित हो जाएगा.

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