Maharashtra Political Crisis: जब भी लोग कहते हैं ‘उद्धव खत्म हो गया है’ होता उल्टा ही है! यकीन नहीं हो रहा तो पढ़ें इनसाइड स्टोरी

Uddhav

जब भी लगता है मामला अब पूरी तरीके से हाथ से जा चुका है तभी कुछ समय बाद ऐसा होता है कि पूरी की पूरी बाजी पलट जाती है. यह लाइन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर सटीक बैठती है. फिर बात चाहे बालासाहब ठाकरे के बाद पार्टी की कमान संभालने की हो, पार्टी प्रमुख के पद पर खुद को आसीन करने की हो या बिना भाजपा के चुनावी मैदान में ताल ठोकने की हो.

वो भी दिन देखा और सुना गया जब कहा जाता था कि राज ठाकरे की आक्रामकता उद्धव ठाकरे को आगे नहीं आने देगी. लेकिन हकीकत में हुआ कुछ और ही. जब भी लोगों ने कहा कि उद्धव ठाकरे खत्म हो गए, हुआ उल्टा! पिछले कुछ वर्षों में हमने यही देखा है. उद्धव ठाकरे जब भी कमजोर होते दिख रहे हैं, तुरंत नहीं, लेकिन उन्होंने एक निश्चित समय निकालकर अपनी काबिलियत साबित की है.

फिलहाल महाराष्ट्र में एक बार फिर सियासी संकट खड़ा हो गया है और ये संकट उद्धव ठाकरे से लिए नाक की लड़ाई साबित होता दिख रहा है. इस संकट के बीच उद्धव ठाकरे कोरोना संक्रमित हुए, लेकिन फिर भी उन्होंने फेसबुक लाइव किया और कैबिनेट से भी बात की. उन्होंने फुल फ्रंट पर बल्लेबाजी की, ऐसा महसूस हो रहा था कि फेसबुक लाइव उनकी घरेलू पिच है. उन्होंने अपनी भूमिका बताते हुए मुख्यमंत्री आवास को छोड़ दिया और मातोश्री लौट आए. उद्धव ठाकरे की मातोश्री तक की इस यात्रा को पूरे महाराष्ट्र ने देखा.

चाहे वह उद्धव ठाकरे का भावनात्मक स्पर्श हो, या फिर एक सामान्य व्यक्ति की तरह दिखने वाला नरम और सामान्य बोलने वाला स्वभाव, ये सब बातें उद्धव ठाकरे के रास्ते को आसान बनाती दिखाई पड़ती थीं. लेकिन हुआ एकदम उल्टा. यह पिछले कुछ वर्षों की घटनाओं से रेखांकित होता है. वरिष्ठ पत्रकार संजय अवाटे पांच घटनाओं के माध्यम से इस बात को बताते हैं…

1. 2005 में जब राज ठाकरे ने बगावत की तो लोगों ने कहा, राज के करिश्मे की वजह से उद्धव का अंत हुआ.

2. बालासाहेब का 2012 में निधन हो गया था. लोगों ने कहा, उद्धव खत्म हो गए हैं.

3. मोदी लहर के बाद शिवसेना ने 2014 का विधानसभा चुनाव भाजपा के खिलाफ लड़ा था. लोगों ने कहा, उद्धव खत्म हो गए हैं.

4. 2019 के विधानसभा नतीजों के बाद मोदी-शाह को सीधी चुनौती देते हुए उन्होंने अभूतपूर्व रास्ता चुना. तब लोगों ने कहा कि उद्धव खत्म हो गए हैं.

5. ये पांच बार उद्धव कभी खत्म नहीं हुए. इसके विपरीत, वे अधिक से अधिक सफल होते जा रहे हैं.आज भी लोग कह रहे हैं, ‘उद्धव का काम हो गया!’

धवल कुलकर्णी ने अपनी किताब ‘द कजिन्स ठाकरे’ में एक महत्वपूर्ण घटना दर्ज की है. यह राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के बारे में है. अपने दोस्तों के साथ बैडमिंटन खेलने आते थे राज ठाकरे, उद्धव ठाकरे भी दादर आते रहते थे. इस बीच उद्धव एक बार खेलते हुए गिर पड़े थे, तब सब उन पर हंस रहे थे.

उसके बाद धवल कुलकर्णी ने लिखा कि उनका दादर आना अचानक बंद हो गया. इसके बाद उद्धव ठाकरे ने ऐसा ही किया. उन्होंने बांद्रा में एमआईजी क्लब में नियमित बैडमिंटन प्रशिक्षण लिया. छह महीने बाद जब वह खेलने के लिए लौटे तो चैंपियन की तरह खेल रहे थे.

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