Jersey Review in Hindi : उम्मीद नहीं थी, पर ‘जर्सी’ में शाहिद कपूर ने दी है दिल को छूने वाली परफॉर्मेंस

Shahid Kapoor Jersey Trailer

फिल्म – Jersey

कास्ट – शाहिद कपूर, मृणाल ठाकुर, पंकज कपूर और शरद केलकर

निर्देशन – गौतम तिन्ननुरी

कहां देख सकते हैं – सिनेमाघरों में

रेटिंग – 3

जब भी किसी फिल्म का रीमेक बनाया जाता है, तो उसकी कामयाबी के लिए दो बातें बहुत अहम होती हैं. पहली ये कि जो मूल फिल्म है, आप उस फिल्म के स्तर को नीचे न गिराएं और दूसरा ये कि आप जिस फिल्म का रीमेक बना रहे हैं, अपनी फिल्म को उससे भी बड़े लेवल पर प्रदर्शित करें. अब क्या शाहिद कपूर (Shahid Kapoor) अपनी आज रिलीज हुई फिल्म ‘जर्सी’ के जरिए ये करने में कामयाब हुए हैं या नहीं, उसके लिए आपको ये रिव्यू पढ़ना चाहिए. शाहिद कपूर स्टारर और गौतम तिन्ननुरी द्वारा निर्देशित फिल्म ‘जर्सी’ (Jersey) तमिल स्टार नानी की इस नाम पर बनी फिल्म का रीमेक है. नानी ने इस फिल्म में बहुत ही जबरदस्त प्रदर्शन किया था. अब शाहिद, नानी की छाप पर अपनी छाप गहरी कर पाए हैं या नहीं, चलिए इसके बारे में बात करते हैं.

क्या है फिल्म की कहानी?

इस फिल्म की कहानी तमिल वाली फिल्म की कहानी जैसी ही है, लेकिन सिर्फ किरदार बदल गए हैं. यह कहानी है अर्जुन उर्फ शाहिद कपूर, पत्नी विद्या उर्फ मृणाल ठाकुर और उनके बेटे केतन उर्फ प्रीत कमानी की. अर्जुन का बेटा केतन अपने पिता पर आधारित एक किताब ‘जर्सी’ की एक कॉपी दो महिलाओं को देता है. वे उससे एक सवाल पूछती हैं, जो केतन को उस पुराने समय यानी फ्लैशबैक में ले जाता है, जहां हम क्रिकेट की दुनिया में नाम कमाने वाले अर्जुन को जबरदस्त फॉर्म में देखते हैं. अर्जुन चौके और छक्के लगाता है, वहीं ऑडियंस स्टैंड में खड़ी उसकी प्रेमिका विद्या उसे चीयर करती है.

इसके बाद दस साल का लीप होता है और अर्जुन को अपने बेटे केतन उर्फ किट्टू के साथ सोते हुए दिखाया जाता है. वहीं, सोफे पर विद्या को दिखाया जाता है. पास में कुछ कंटेनर भी पड़े होते हैं, जो छत से टपक रहे बारिश के पानी से घर को बचाने का काम करते हैं. भ्रष्टाचार के कारण अर्जुन की नौकरी चली जाती है और घर चलाने का सारा जिम्मा विद्या के कंधों पर आ जाता है. वहीं, अर्जुन के बेटे केतन को क्रिकेट वाली जर्सी चाहिए होती है, लेकिन अर्जुन के पास इतने पैसे नहीं होते कि वह अपने बेटे की इच्छा को पूरी कर सके.

वह अपने दोस्तों से पैसे मांगता है, लेकिन कोई मदद नहीं करता. वह विद्या से भी पैसे मांगता है, लेकिन विद्या उसे काम न करने का ताना मारते हुए पैसे देने से इनकार कर देती है और साथ ही घर छोड़कर जाने की धमकी भी देती है. अब अर्जुन सिर्फ अपने बेटे की इच्छा किसी भी तरह पूरी करना चाहता है, क्योंकि वह कहता है कि उसके बेटे ने पहली बार उससे कुछ चीज मांगी है. इस बीच अर्जुन को अपने बेटे की जर्सी के लिए क्रिकेट के मैदान में एक बार फिर से उतरना पड़ता है. जहां पर उनसे कोच भल्ला उर्फ पंकज कपूर उसका पूरा साथ देते हैं. बेटे की इच्छा को पूरी करने के चक्कर में वह अपने क्रिकेट के जुनून को फिर से जी लेता है. लोग उसे लूजर बुलाते हैं, लेकिन वह अपने बेटों की नजरों में हीरो होता है. कहानी अर्जुन और उसके बेटे की इसी प्यार भरी जिंदगी को बयां करती है.

कैसी है फिल्म?

जर्सी में एक सीन है, जहां अर्जुन अपने बेटे को देखता है, जो अपने पिता की क्रिकेट मैच में एक प्रभावशाली पारी के बाद स्टैंड में खड़ा ताली बजाता है और चीयर करता है. उस क्षण वह अपने बेटे की आंखों में वो सम्मान पाता है, जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की होती. फिल्म का ये सीन दर्शकों को भावात्मक रूप से जोड़ेगा. गौतम तिन्ननुरी ने तमिल फिल्म जर्सी का भी निर्देशन किया था. जिस तरह से उन्होंने नानी वाली फिल्म को इमोशन के साथ दर्शकों के साथ जोड़ा, उसी तरह वह शाहिद वाली फिल्म के साथ करने भी कामयाब हुए हैं. हर पिता का पहला हीरो उसका पिता होता है, ये बताने में गौतम एक बार फिर से सफल रहे हैं. जिन लोगों ने नानी वाली जर्सी देखी है, उन्हें शायद फिल्म में कुछ नयापन न दिखाई दे, लेकिन जो पहली बार फिल्म शाहिद स्टारर जर्सी देखने वाले हैं, उन्हें यह फिल्म काफी पसंद आएगी.

अभिनय

2019 में रिलीज हुई जर्सी में एक असफल क्रिकेटर लेकिन प्यारे पिता के अपने किरदार के लिए नानी ने खूब वाहवाही लूटी थी. शाहिद कपूर इस फिल्म के हिंदी रीमेक में इस उपलब्धि को हासिल करने में सफल रहे हैं. जहां गौतम कहानी कहने के मामले में पहली ही फिल्म की तरह खरे उतरे हैं, वहीं पर शाहिद कपूर एक अभिनेता के रूप में बहुत सी नई चीजें सामने लाए हैं. जर्सी में शाहिद ने हमें उस पिता से मिलवाया, जो किसी भी सूरत में अपने बेटे को निराश नहीं करना चाहता. शाहिद कपूर ने एक पिता के रूप में अपने किरदार को बखूबी निभाया है. इस बार उनका थोड़ा हटकर रूप देखने को मिला है.

वहीं, अभिनेत्री मृणाल ठाकुर अपनी भूमिका के साथ पूरा न्याय करती हैं. मृणाल ने अपने किरदार में इमोशन लाने की भरपूर कोशिश की और वह इसमें कामयाब भी हुईं. पंकज कपूर ने एक बार फिर से साबित किया कि उन्हें भारतीय सिनेमा का बेहतरीन कलाकार क्यों कहा जाता है. अगर शाहिद कपूर फिल्म जर्सी का दिल हैं, तो उनके पिता पंकज कपूर इस फिल्म की बैकबोन हैं. भले ही दोनों फिल्म में कोच और स्टूडेंट बने हैं, लेकिन फिल्म में दोनों के कई सीन ऐसे हैं, जो दिल को छूते हैं. इसके अलावा शरद केलकर, प्रीत और गीतिका भी अपने किरदार के साथ न्याय करने में कामयाब रहे हैं.

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