Investment : छोटी योजनाओं में निवेश करना कहीं घाटे का सौदा तो नहीं, शेयर मार्केट से मिलेगा अच्छा रिटर्न

Better Returns From The Stock Market

Investment : अगर आप छोटी योजनाओं और सोने में निवेश करते हैं और आपको ज्यादा मुनाफा नहीं हो रहा है. कहीं आपने छोटी योजनाओं और सोने में निवेश करके घाटे का तो सौदा नहीं कर लिया. यदि आपको ऐसा लगता है तो आपके लिए शेयर बाजार में निवेश करके फायदे का सौदा कर सकते हैं. आपको बता दें कि शेयर बाजार लंबे समय में निवेशकों को अच्छा रिटर्न देता आया है और इसका यह इतिहास भी रहा है. ऐसे में निवेशकों को इस समय शेयर बाजार पर भरोसा करना चाहिए. थोड़ा बहुत उतार-चढ़ाव संभव है, फिर भी लंबे समय में इसमें दो अंकों से ज्यादा का फायदा मिल सकता है. एक रिपोर्ट के अनुसार इस पूरे सालभर में अभी तक निवेशकों को तकरीबन सभी साधनों से घाटा हुआ है. शेयर बाजार से लेकर सोने के निवेश या फिर सरकार की छोटी बचत योजनाएं हों, सभी ने महंगाई की तुलना में कम ही फायदा दिया है. लगातार सात फीसदी से ऊपर महंगाई दर बने रहने से भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा तीन बार में ब्याज दरों में 1.40 फीसदी की वृद्धि करने के बाद भी छोटी योजनाओं की ब्याज दरें अपरिवर्तित हैं.

बता दें कि अमेरिका के साथ ही बैंक ऑफ जापान, भारत और बैंक ऑफ इंग्लैंड भी अपनी मौद्रिक नीति की समीक्षा करने वाले हैं, जिसमें दरों के बढ़ने की उम्मीद दिखाई दे रही है. जिससे सोने की कीमतों में भारी गिरावट आ रही है. सोने की कीमतें इस समय साल 2020 के स्तर पर चली गई हैं. पिछले हफ्ते इसकी कीमत 2.4 फीसदी गिरी थी. पांच हफ्तों में यह चौथा हफ्ता है, जब सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है.

सोने में भी ज्यादा मुनाफ नहीं

सोने की कीमतों में हाल के समय में जमकर गिरावट आई है. इस साल जनवरी में सोने की कीमत प्रति दस ग्राम 49,100 रुपये थी. इस समय भी यह इससे मामूली ज्यादा है. यानी किसी ने अगर सोने में निवेश किया होगा तो आठ महीने में भी उसे कोई फायदा नहीं हुआ है. फरवरी में जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हुआ तो उस समय सुरक्षित माने जाने वाले इस साधन में लोगों ने जमकर निवेश किया. इससे इसकी कीमतें एक बार तो 53,000 रुपये को पार कर गईं, लेकिन इसी हफ्ते अमेरिकी फेडरल बैंक फिर से ब्याज दरों में ज्यादा इजाफा करने के पक्ष में है.

महंगाई की तुलना में कम हैं ब्याज दरें

सरकार लघु योजनाओं की ब्याज दरों में मामूली वृद्धि तो करेगी, लेकिन ब्याज दरों और महंगाई के स्तर की तुलना में वह काफी कम होता है, क्योंकि जून, 2020 से इन योजनाओं की ब्याज दरें स्थिर हैं. शेयर बाजार की बात करें तो जनवरी में सेंसेक्स जरूर ऊपर था, लेकिन यह मार्च में 58,568 पर बंद हुआ था. शुक्रवार को भी यह 58,840 पर बंद हुआ. यानी इसमें भी निवेशकों को कोई बहुत ज्यादा फायदा नहीं मिला है. हालांकि, इस दौरान आरबीआई द्वारा रेपो रेट में आक्रामक वृद्धि के बाद बैंकों ने जमा में मामूली इजाफा तो किया, पर महंगाई की तुलना में वह अभी भी बहुत कम है.

सुकन्या समृद्धि पर मिलना चाहिए 8.3 फीसदी ब्याज

सरकार की छोटी योजनाओं में शामिल सुकन्या समृद्धि योजना, सावधि जमा, रिकरिंग जमा जैसे साधनों पर अधिकतम 7.40 फीसदी का ब्याज मिल रहा है. जबकि न्यूनतम यह 4 फीसदी पर है. सबसे ज्यादा सुकन्या योजना पर है जो 7.40 फीसदी है. 10 साल के बॉन्ड की ब्याज दर अप्रैल, 2022 से 7 फीसदी के ऊपर है. जून से अगस्त के दौरान इसका औसत 7.31 फीसदी रहा है. ऐसे में सरकार इसे देखते हुए ब्याज दरों को बढ़ाने का फैसला ले सकती है. सुकन्या समृद्धि पर अभी ब्याज 7.6 फीसदी है जो 8.3 फीसदी होना चाहिए. सरकार के नियम के मुताबिक इस पर औसत तीन महीने के बाद 0.75 फीसदी ज्यादा ब्याज देना चाहिए. इस तरह से 7.6 और 0.75 के बाद ब्याज 8.3 फीसदी होना चाहिए. हालांकि सरकार इस नियम को तुरंत लागू नहीं करती है.