Ilaiyaraaja Old Summons : आरोपों में घिरे इलैयाराजा पर फिर उठे सवाल, PM मोदी की प्रशंसा और GST समन के बीच संबंध होने की बात पर किया इनकार

Ilaiyaraaja Old Summons

मश्हूर संगीतकार इलैयाराजा (Ilaiyaraaja) ने हाल ही में अपनी पुस्तक का विमोचन किया था. अपने विमोचन के दौरान इलैयाराजा ने कुछ ऐसा बयान दिया था जिसको लेकर वामपंथियों (leftist) ने उनपर जमकर तीखा प्रहार किया था. इलैयाराजा की पुस्तक का शीर्षक था अंबेडकर एंड मोदी: रिफॉर्मर्स आइडियाज, परफॉर्मर्स इम्प्लीमेंटेशन. इस पुस्तक की प्रस्तावना में, इलैयाराजा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की तुलना चर्चित विचारक भीमराव अम्बेडकर से कर दी थी. तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों व्यावहारिक व्यक्ति थे जो कहने के बजाय करने में विश्वास करते थे. काफी आलोचनाओं के बावजूद इलैयाराजा अपने विचारों पर अडिग रहते हुए अपना बयान बदलने से इनकार कर दिया.

जिसके बाद इलैयाराजा एक बार फिर से चर्चा में हैं. उन्हें सेवा कर का भुगतान न करने के लिए माल और सेवा कर खुफिया महानिदेशालय, चेन्नई जोनल यूनिट से दो समन जारी किया गया है. ये समन 28 फरवरी और 1 मार्च को जारी किया गया था. समन में कहा गया है कि इलैयाराजा या उनके प्रतिनिधि को बकाया राशि का भुगतान कराने के सबूत या दस्तावेज उपलब्ध कराने चाहिए. सम्मन में जीएसटी कार्यालय में दस्तावेज/सबूत जमा करने की समय सीमा भी तय की थी. पहले समन ने 10 मार्च, 2022 को समय सीमा निर्धारित की थी जबकि दूसरे समन में तारीख को बढ़ाकर 28 मार्च, 2022 कर दिया गया.

सम्मन के बाद जीएसटी निदेशालय की ओर से संगीतकार इलैयाराजा पर कई आरोप लगााए गए हैं. जिसमें कहा गया कि संगीतकार ने अम्बेडकर और मोदी-रिफॉर्मर्स आइडियाज, परफॉर्मर्स इम्प्लीमेंटेशन नामक पुस्तक की प्रस्तावना में खुद को टैक्स के मुद्दे से छुटकारा दिलाने के लिए मोदी की प्रशंसा की.

इलैयाराजा के वकील बोले- भुगतान के बाद भी नहीं बंद हुआ मामला

एक इंटरव्यू के दौरान इलैयाराजा ने प्रधानमंत्री के लिए उस्ताद की प्रशंसा के पीछे कोई भी मकसद होने की बात को स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि समन एक ‘एक वाला’ था, “यह 2017 का मुद्दा है – सेवा कर का भुगतान न करने का एक पुराना मामला था. इस दौरान इलैयाराजा के वकील भी मौजूद थे. उनका कहना था कि हमने मामले को सुलझा लिया है और सभी बकाया का भुगतान कर दिया है, लेकिन इसके बाद भी यह मामला किसी तरह बंद नहीं हुआ है. इसके आगे वकील ने कहा कि जीएसटी सम्मन तब भी आया जब इलैयाराजा को प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा करने के लिए ट्रोल किया जा रहा है.

आपको बता दें, प्रस्तावना में लिखा था कि, ये दोनों हड़ताली व्यक्तित्व समाज के सामाजिक रूप से अक्षम वर्गों के लोगों के सामने आने वाली बाधाओं के खिलाफ सफल हुए हैं. दोनों ने गरीबी और सामाजिक ढांचे को करीब से देखा है और उन्हें खत्म करने का काम भी किया है. लेकिन, दोनों व्यावहारिक व्यक्ति हैं जो केवल विचार अभ्यास के बजाय कार्रवाई में विश्वास करते हैं.”

इलैयाराजा को राज्यसभा में सीट की पेशकश

सोशल मीडिया पर प्रस्तावना फैलने के बाद, संगीतकार को ‘संघी’ करार दिया गया और जमकर ट्रोल किया गया. प्रस्तावना में यह भी अटकलें लगाईं गई कि 78 वर्षीय इलैयाराजा को राज्यसभा में एक सीट की पेशकश की जा रही थी. जबकि जेपी नड्डा (भाजपा अध्यक्ष), के अन्नामलाई (भाजपा तमिलनाडु प्रमुख), तमिलिसाई सुंदरराजन (तेलंगाना के राज्यपाल) आदि समेत बीजेपी नेता संगीतकार की मदद के लिए उतरे. साथ ही, विपक्षी पार्टी के नेताओं ने भी उनकी आलोचना की.

हालांकि, इलैयाराजा की टीम ने अबतक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि संगीतकार राजनीति में शामिल होने के इच्छुक हैं या नहीं. वहीं, दूसरी ओर उनके भाई गंगई अमरन, एक प्रसिद्ध संगीत निर्देशक और लोकप्रिय गीतकार हैं जिन्होंने साल 2017 में भाजपा का दामन थामा था.

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