Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात की इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस को है 50 सालों से जीत का इंतजार

Congress Sym Pti

गुजरात विधानसभा चुनाव (Gujarat Assembly Election) इस साल के अंत में होने हैं .ऐसे में राजनीतिक दलों की तैयारियां भी तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी जहां गुजरात में 27 सालों से सत्ता में है. ऐसे में भाजपा की कोशिश है कि इस बार भी अपनी सत्ता को बरकरार रखा जाए. इसलिए भाजपा इसबार उन 7 सीटों पर भी ज्यादा ध्यान दे रही है जो उसने 2017 के चुनाव में मामूली वोटों से गवां दी थी. जबकि कांग्रेस पाटीदार और आदिवासी इलाकों पर खास ध्यान दे रही है. हालांकि कांग्रेस को पटेल नेता हार्दिक पटेल के बीजेपी में जाने से झटका लगा है. गुजरात की 182 विधानसभा सीटों में एक सीट ऐसी भी है, जहां पर पिछले 50 सालों से कांग्रेस का खाता नहीं खुल सका है. अहमदाबाद की एलिस ब्रिज विधानसभा सीट पर 1972 के बाद कांग्रेस जीत नहीं दर्ज कर सकी है.

कैसे पड़ा विधानसभा का नाम ‘एलिस ब्रिज’

अहमदाबाद में एलिस ब्रिज एक विधानसभा सीट है. इस सीट का नाम अंग्रेजों के जमाने में बनाए गए ऐतिहासिक ब्रिज के चलते पड़ा है. यह ब्रिज साबरमती नदी पर बनाया गया है. वहीं इसी विधानसभा क्षेत्र में राज्य का सबसे पुराना कॉलेज गुजरात कॉलेज है, जिसकी स्थापना 1879 में हुई थी. गुजरात की इस विधानसभा सीट पर मतदान जातिगत समीकरण के आधार पर नहीं बल्कि धार्मिक समीकरण के आधार पर प्रभावित होते हैं. इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा हिंदू मतदाता रहते हैं, जिनमें शाह ,ब्राह्मण, पटेल मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा है. कुछ क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाता भी हैं.

यहां कांग्रेस को 50 सालों से जीत का इंतजार

एलिस ब्रिज विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने शुरुआती दौर में जीत दर्ज की थी. गुजरात के गठन के बाद पहली बार 1962 में चुनाव हुए. उस दौर में कांग्रेस की उम्मीदवार इंदुमती चिमनलाल ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी. वहीं 1967 में हुए विधानसभा चुनाव में इस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार आर के पटेल ने जीत दर्ज की. 1972 में यह सीट फिर कांग्रेस के खाते में चली गई और यहां से हरिप्रसाद व्यास ने जीत दर्ज की. 1972 की इस जीत के बाद आज तक कांग्रेस इस सीट पर जीत दर्ज करने में नाकाम साबित हुई है. 1972 से लेकर 1995 तक कई अन्य दलों ने इस सीट पर जीत दर्ज की है.

27 सालों से एलिस ब्रिज पर बीजेपी का कब्जा

अहमदाबाद की एलिस ब्रिज विधानसभा सीट पर पिछले 27 सालों से बीजेपी का लगातार कब्जा बना हुआ है. 1995 के बाद से इस सीट पर बीजेपी कभी भी चुनाव नहीं हारी है. पहली बार इस सीट पर बीजेपी के नेता हरेन पांड्या ने 1995 में जीत दर्ज की थी. इसके बाद 1998 में वह दूसरी बार विधायक चुने गए. केशुभाई पटेल के गुट के होने के चलते 2002 में उन्हें टिकट नहीं दिया गया. फिर ऐसा लगने लगा कि बीजेपी की सीट पर पकड़ कमजोर हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. 2017 में भी बीजेपी के उम्मीदवार राकेश शाह ने जीत दर्ज की. उन्हें इस सीट पर 85,000 से ज्यादा मतों से जीत मिली. इस सीट का सामाजिक समीकरण बीजेपी के पक्ष में 2002 से रहा है क्योंकि यहां के लोगों ने गुजरात दंगों की तपिश को भी झेला है. इसी वजह से यहां के ज्यादातर हिंदू मतदाता बीजेपी को पसंद करते हैं.

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