FY23 में 7-7.8% की दर से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था, जानें क्या कहते हैं अर्थशास्त्री

indian economy to grow at seven to more than seven percent says economists

भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) में इस वित्त वर्ष में 7 से 7.8 फीसदी की ग्रोथ रह सकती है. कई जाने-माने अर्थशास्त्रियों ने कहा कि इसकी वजह बेहतर कृषि (Agriculture) उत्पादन और रूस-युक्रेन युद्ध (Russia Ukraine) के बीच वैश्विक रूकावटों के बीच दोबारा सुधर रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) है. जाने-माने अर्थशास्त्री और बीआर अम्बेडकर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के वाइस चांसलर एन आर भानुमूर्ति ने कहा कि मौजूदा समय में भारतीय अर्थव्यवस्था कई रूकावटों का सामना कर रही है, जिसमें से ज्यादातर बाहरी स्रोतों से हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध ने पैदा की चुनौती

इस बात का जिक्र करते हुए कि वैश्विक महंगाई का दबाव और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा हुआ है, जो घरेलू मैक्रो फंडामेंटल्स के बेहतरीन प्रबंधन के साथ मजबूत रहा है. उन्होंने कहा कि दूसरों से अलग, भारत का कोरोना प्रोत्साहन पैकेज, खासतौर पर वित्तीय पॉलिसी के मोर्चे पर फैसलों से ग्रोथ बढ़ेगी और महंगाई पर कम असर होगा. उन्होंने कहा कि बेहतर कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के साथ भारत मौजूदा तिमाही में वैश्विक रूकावटों के बावजूद भारत मौजूदा तिमाही में 7 फीसदी की ग्रोथ पर पहुंच सकता है.

इन्हीं बात का समर्थन करते हुए, मशहूर अर्थशास्त्री और इंस्टीट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट (ISID) के डायरेक्टर नागेश कुमार ने कहा कि संकेतक इस बात की इशारा करते हैं कि 2022-23 में ग्रोथ का मोमेंटम मजबूत रहेगा, जिसमें रियल जीडीपी ग्रोथ 7 से 7.8 फीसदी के बीच कहीं रहेगी.

कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी की उम्मीद

फ्रांस के अर्थशास्त्री Guy Sorman ने कहा कि भारत पर ऊर्जा की ज्यादा कीमत और उवर्रकों के आयात से बड़ा असर हो सकता है. उन्होंने कहा कि हालांकि, क्योंकि भारत अभी भी बड़े तौर पर कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था है, कम ग्रोथ का सामाजिक असर शहर के कर्मियों के अपने गांव में वापस जाने से संतुलित हो जाएगा. उन्होंने कहा कि इससे कृषि उत्पादन और गेहूं के निर्यात में बढ़ोतरी हो सकती है.

वर्ल्ड बैंक ने मौजूदा तिमाही के लिए भारत के आर्थिक ग्रोथ के अनुमान को घटाकर 7.5 फीसदी कर दिया है. उसने इसके पीछे बढ़ती महंगाई, सप्लाई चैन में रूकावटों और भू-राजनीतिक दबाव से रिकवरी पर असर को वजह बताया है. 2022-23 की तीसरी मॉनेटरी पॉलिसी में, केंद्रीय बैंक ने जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को मौजूदा तिमाही के लिए 7.2 फीसदी पर रखा है.

(PTI इनपुट के साथ)

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