Feng shui: धन की कमी का कर रहे हैं सामना? फेंगशुई के ये टिप्स बदल सकते हैं आपकी किस्मत

Feng Shui Tips For Home

वास्तु और ज्योतिष शास्त्र की तरह फेंगशुई ( Feng shui tips for home ) शास्त्र में भी कई ऐसे उपाय बताए गए हैं, जो हमारे लिए कई मायनों में लाभकारी होते हैं. चीनी सभ्यता से संबंध रखने वाले फेंगशुई वास्तु को आज भारत में भी लोग बड़ी संख्या में फॉलो कर रहे हैं. इसके नियमों को अपनाकर और उपायों को करके जीवन में आसानी से सुख एवं समृद्धि लाई जा सकती है. जिस तरह भारत में जीवन की ज्यादातर रुकावटों को दूर करने के लिए वास्तु शास्त्र ( Vastu tips for house dosh ) काम आता है, उसी तरह चीन का फेंगशुई भी नेगेटिविटी को दूर करने में कारगर माना जाता है. फेंगशुई में फेंग का अर्थ वायु और शुई का संबंध जल से है.

ज्यादातर फेंगशुई नियम जल और वायु के आधार पर बने हुए हैं. देखा जाए, तो लोग अब घरों में फेंगशुई में बताई गई चीजों को रखकर शुभता बढ़ाते हैं. हम आपको कुछ ऐसे फेंगशुई टिप्स के बारे में बताएंगे, जिन्हें अपनाकर आप सुखी जीवन व्यतीत कर सकते हैं. जानें इन टिप्स के बारे में…

विंड चाइम लगाएं

फेंगशुई में बताया गया है कि घर के मेन गेट या खिड़कियों पर विंड चाइम लगाने से घर में पॉजिटिविटी बनी रहती है. इसकी आवाज मन में पॉजिटिविटी लाती है और हमें बुरी चीजों से दूर रखती है. कहते हैं कि विंड चाइम से व्यापार और नौकरी में भी तरक्की हासिल की जा सकती है. धन के लाभ के लिए आज ही घर में विंड चाइम ले आएं.

बांस का पवित्र पौधा

जिन लोगों के पास पैसा आता है और हाथ में टिकता नहीं है, उन्हें फेंगशुई शास्त्र की मदद लेनी चाहिए. फेंगशुई में बांस के पौधे को बहुत शुभ बताया गया है. घर में बांस का पवित्र पौधा लाकर रखें और नियमों के अनुसार इसकी देखरेख करें. कहते हैं कि इस पौधे को लगाने से धन कमाने के नए रास्ते तो खुलेंगे, साथ ही आपका रुका हुआ धन भी वापस मिल सकता है. इसके अलावा घर में मौजूद नेगेटिव एनर्जी भी ये दूर कर सकता है.

लाफिंग बुद्धा

सुख, शांति और धन का प्रतीक माने जाने वाले लाफिंग बुद्धा का फेंगशुई शास्त्र में विशेष महत्व बताया गया है. कहा गया है कि इसे घर में लगाने से शुभता आती है और आपसी झगड़े भी नहीं होते. लाफिंग बुद्धा को अगर बच्चे के स्टडी रूम में रख दिया जाए, तो ये उसे पढ़ाई में ध्यान लगाने में भी मदद कर सकता है.

(यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है.)

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