Chanakya Neeti: युवाओं का भविष्य बिगाड़ सकती हैं ये चीजें, इनसे रहिए दूर


चाणक्य कहते हैं कि युवाओं को अगर सफल इंसान बनना है तो इन चीजों से परहेज करना पड़ेगा नहीं तो वर्तमान के साथ भविष्य भी अधर में लटक जाएगा.



TV9 Bharatvarsh | Edited By: प्रदीप तिवारी



Sep 18, 2022, 7:00 AM IST





आचार्य चाणक्य की नीतियां न सिर्फ शासन के लिए बल्कि मनुष्य के जीवन में काफी मददगार साबित होती हैं. ऐसे में चाणक्य ने अपने नीति शास्त्र सफल इंसान को लेकर कई बातें बताई हैं. चाणक्य ने इन युवाओं को इन चीजों से दूर रहने की सलाह दी है.

आलस: आलस युवा पीढ़ी की सबसे बड़ी दुश्मन है.  चाणक्य कहते हैं कि आलस युवाओं को सफल होने से रोकता है. व्यक्ति जितना अनुशासित होगा तरक्की उसके कदम चूमेगी. समय बहुत कीमती है इसका सदुपयोग करें.

आलस: आलस युवा पीढ़ी की सबसे बड़ी दुश्मन है. चाणक्य कहते हैं कि आलस युवाओं को सफल होने से रोकता है. व्यक्ति जितना अनुशासित होगा तरक्की उसके कदम चूमेगी. समय बहुत कीमती है इसका सदुपयोग करें.

क्रोध: कामयाबी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा होता है क्रोध. गुस्सा व्यक्ति बुद्धि को क्षीण कर देता है. युवा हो या फिर बच्चा गुस्से में सभी का नुकसान होता है. चाणक्य कहते हैं कि क्रोध पर काबू करना सीखें वरना ये आपकी उन्नती में बाधा बनता है.

क्रोध: कामयाबी की राह में सबसे बड़ा रोड़ा होता है क्रोध. गुस्सा व्यक्ति बुद्धि को क्षीण कर देता है. युवा हो या फिर बच्चा गुस्से में सभी का नुकसान होता है. चाणक्य कहते हैं कि क्रोध पर काबू करना सीखें वरना ये आपकी उन्नती में बाधा बनता है.

संगत: अच्छी और बुरी दोनों संगत मनुष्य जीवन को बहुत प्रभावित करती है. गलत लोगों की संगत व्यक्ति में बुरे कर्म करने की सोच पैदा करती है. नशा, कामवासना, लड़ाई-झगड़ा इन चीजों से जितना दूरी बनाकर रहेंगे सफलता करीब आती जाएगी.

संगत: अच्छी और बुरी दोनों संगत मनुष्य जीवन को बहुत प्रभावित करती है. गलत लोगों की संगत व्यक्ति में बुरे कर्म करने की सोच पैदा करती है. नशा, कामवासना, लड़ाई-झगड़ा इन चीजों से जितना दूरी बनाकर रहेंगे सफलता करीब आती जाएगी.

ईर्ष्या: आचार्य चाणक्य कहते हैं कि क्रोध की तरह ईर्ष्या भी मनुष्य की सबसे बड़ी क्षत्रु है. ईर्ष्या मनुष्य को आगे नहीं बढ़ने देती. ईर्ष्यालु इंसान हमेशा अपने और दूसरे के रास्ते में बाधा बनता है.

ईर्ष्या: आचार्य चाणक्य कहते हैं कि क्रोध की तरह ईर्ष्या भी मनुष्य की सबसे बड़ी क्षत्रु है. ईर्ष्या मनुष्य को आगे नहीं बढ़ने देती. ईर्ष्यालु इंसान हमेशा अपने और दूसरे के रास्ते में बाधा बनता है.






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