Boris Johnson In India: क्या है पाल-दाधव नरसंहार? देश में ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन से माफी मांगने की मांग

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन (British PM Boris Johnson) भारत यात्रा (India Visit) पर पहुंचे हैं, लेकिन उनसे गुजरात (Gujarat) में उपनिवेशकाल में हुए नरसंहार (Pal-Dadhvav massacre) के 100 साल बाद माफी की मांग की जा रही है. गुजरात में 1200 लोग ब्रिटिश शासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए मारे गए थे. पिछले महीने ही पाल-दाधव के 100 साल पूरे हुए हैं. जब भारतीय इतिहासकारों का कहना है कि समाज सुधारक मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में लगभग 2,000 आदिवासी लोग शोषण, जबरन श्रम और उच्च करों के विरोध में एकत्र हुए थे.

वहीं गुजरात सरकार के अनुसार, इसी दौरान ब्रिटिश मेजर एचजी सटन ने अपने सैनिकों को गोली चलाने का आदेश दे दिया था. एक युद्ध के मैदान की तरह, पूरा क्षेत्र लाशों से भर गया था. दो कुएं ‘लाशों से पटे हुए थे.’ इस साल की वार्षिक गणतंत्र दिवस परेड में गुजरात की आधिकारिक झांकी में इस घटना को ‘आदिवासियों की बहादुरी और बलिदान की अनकही कहानी’ के रूप में दर्शाया था.

जलियांवाला बाग हत्याकांड के तीन साल बाद हुआ था हादसा

पाल-दाधव नरसंहार अंग्रेजों द्वारा लगभग 1,200 आदिवासी क्रांतिकारियों (भील) की हत्या से जुड़ा है. यह 7 मार्च 1922 को साबरकांठा जिले के पाल-चितरिया और दाधवाव गांवों में हुआ था. यह उस समय इडर राज्य (वर्तमान गुजरात राज्य) का हिस्सा था. यह नरसंहार जलियांवाला बाग हत्याकांड के तीन साल बाद हुआ था. मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में एकी आंदोलन के हिस्से के रूप में पाल, दधव और चितरिया के ग्रामीण हेइर नदी के तट पर एकत्र हुए थे.यह नरसंहार जलियांवाला बाग हत्याकांड के तीन साल बाद हुआ था. मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में एकी आंदोलन के हिस्से के रूप में पाल, दधव और चितरिया के ग्रामीण हेइर नदी के तट पर एकत्र हुए थे. इतिहासकारों के मुताबिक, यह आंदोलन अंग्रेजों और सामंतों द्वारा किसानों पर लगाए गए भू-राजस्व कर (लगान) के विरोध में था.

क्या था पूरा मामला

मोतीलाल तेजावत के पोते महेंद्र ने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, ‘जिस समय ये हत्याएं हुईं उस समय ब्रिटिश शासन था, अगर ब्रिटिश पीएम यहां आ रहे हैं, तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए. ’77 वर्षीय ने कहा, ‘मेरे दादाजी केवल गरीब, मासूम और अनपढ़ आदिवासियों के लिए एक अभियान चला रहे थे.’ उन्होंने कहा, ‘अगर उन्हें लगता है कि निहत्थे आदिवासियों के साथ जो हुआ वह गलत था, तो उन्हें खेद व्यक्त करना चाहिए इतिहासकारों के मुताबिक, यह आंदोलन अंग्रेजों और सामंतों द्वारा किसानों पर लगाए गए भू-राजस्व कर (लगान) के विरोध में था. तेजावत के नेतृत्व में हुए आंदोलन में अंग्रेजों की गोलियों में यहां लगभग 1200 आदिवासी मारे गए थे. ब्रिटेन और भारत के बीच संबंध लंबे समय से औपनिवेशिक शासन की क्रूर विरासतों से रंगे हुए हैं. ब्रिटेन ने कई दशकों तक जबरन भारत पर राज किया और दुनिया के दूसरे सबसे अधिक आबादी वाले देश को अपने साम्राज्य के मुकुट के लिए लूटता रहा.

वहीं बता दें पीएम मोदी खुद गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री हैं, जिनके कार्यकाल में नरसंहार पीड़ितों के लिए एक स्मारक बनाया गया था. लेकिन गुजरात विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रमुख अरुण वाघेला को उम्मीद नहीं है कि ब्रिटिश प्रधानमंत्री इस मुद्दे को संबोधित करेंगे. उन्होंने साइट पर फील्ड रिसर्च किया है और कहा है कि 20 साल पहले भी निवासियों को पेड़ों और गहरे कुओं में पड़े कंकालों में पुरानी गोलियां मिल रही थीं.बोरिस जॉनसन का जहाज अहमदाबाद (Ahmedabad) में उतरा. साथ ही वो आज निवेशक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे.

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