BJP प्रभारी तावड़े पर चिराग को मनाने और सहनी को साधने का जिम्मा,ये है NDA का प्लान

Chirag Paswan Mukesh Sahni

बिहार में नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद एनडीए का कुनबा सिमट गया है. बीजेपी के साथ अब पशुपति पारस गुट की एलजेपी ही रह गई है. जिसके बाद बीजेपी एनडीए में दूसरे दलों को शामिल कराने और मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है. कहा जा रहा है कि बिहार बीजेपी के नए प्रभारी विनोद तावड़े को सात दलों वाले महागठबंधन की राह रोकने के लिए बीजेपी का कुनबा मजबूत करने का टॉस्क दिया है. बीजेपी अपने पुराने सहयोगी रहे चिराग पासवान और मुकेश सहनी की एनडीए वापसी करना चाह रही है.
दरअसल बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले एक ऐसा वोट बैंक तैयार करना चाह रही है जो जातीय आधार पर मजबूत दिख रही महागठबंधन की राह रोक सके. इसके लिए बीजेपी के नेता चिराग पासवान से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं. मुकेश सहनी का भी मन टटोल रहे हैं.

VIP को साथ लाने की कोशिश

केंद्रीय नेतृत्व ने राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े जो अभी बिहार बीजेपी के प्रभारी बनाए गए हैं. उन्हें दूसरे मुद्दों के साथ पुराने सहयोगियों को फिर से बीजेपी से जोड़ने के लिए काम करने का निर्देश दिया है. मुकेश सहनी जिनकी पार्टी के तीन विधायकों को तोड़ कर बीजेपी ने अपने पाले में कर लिया था, उन्हें मनाने की कोशिश की जा रही है. इधर सहनी को भी अपनी डूबती राजनीतिक नैया पार लगाने के लिए किसी मजबूत सहारे की जरूरत है.

सहनी नहीं खोल रहे हैं अपने पत्ते

महागठबंधन से उन्हें ज्यादा तवज्जो मिलता नहीं दिख रहा है. इसके बाद बीजेपी उनके लिए फिर से मुफीद ठिकाना हो सकता है, लेकिन सहनी जानते हैं कि जितनी जरुरत उन्हें बीजेपी की है उतनी ही जरुरत बीजेपी को भी नए सहयोगियों की है. यही वजह है कि सहनी कोई हड़बड़ाहट में नहीं हैं. वैसे भी बिहार की राजनीति में उनके पास खोने के लिए कुछ बचा नहीं है. यही वजह है कि वह अपने पत्ते खोलने में जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं.

चिराग और सहनी का बढ़ा महत्व

इधर चिराग पासवान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जिस गठबंधन में उनके चाचा रहेंगे उसमें वह शामिल नहीं होंगे. साथ ही चिराग पासवान ने यह शर्त भी रखी है कि उन्हें यह विश्वास दिलाया जाए कि एनडीए में अब नीतीश कुमार की कभी वापसी नहीं होगी. इसके साथ कहा यह भी जा रहा है कि उन्होंने मंत्री पद की भी डिमांड की है. बिहार के नए राजनीतिक हालात में विनोद तावड़े जब प्रभारी बने हैं और उन्हें कुनबा मजबूत करने की पार्टी ने जिम्मेदारी दी हैं उस स्थिति में चिराग पासवान और मुकेश सहनी का महत्व बढ़ गया है.