Agnipath Scheme Protest: हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में होगी अग्निपथ योजना की ‘अग्निपरीक्षा’

Agnipath Scheme Protest
तीनों सेनाओं में भर्ती के लिए अग्निपथ स्कीम (Agnipath Scheme) से वह राज्य फोकस में आ गए हैं जो अपने क्षेत्र से हजारों जवानों को सेना में भेजते हैं. क्योंकि इन राज्यों में इसके खिलाफ काफी उग्र विरोध प्रदर्शन हुए. दिलचस्प है कि 2019-20 में सेना द्वारा चुने गए 80,572 उम्मीदवारों में से 7 फीसदी (5,882 जवान) उम्मीदवार हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के थे. जहां इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव (Assembly Election) होने हैं. हिमाचल उत्तर भारत के उन शीर्ष 10 राज्यों में शामिल है जहां से सेना ने अपने अधिकतर जवानों को शामिल किया है. इस साल संसद में रक्षा मंत्रालय द्वारा पेश किए गए 2019-2020 के भर्ती आंकड़ों के अनुसार, सेना में शीर्ष 10 प्रमुख योगदानकर्ताओं में आठ प्रदेश उत्तर भारतीय राज्य हैं. ऐसे में इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि अग्निपथ योजना को लेकर उत्तर प्रदेश, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में सबसे ज्यादा हिंसा और आगजनी हुई.
2017 से 2019 के बीच हिमाचल की प्रति दस लाख आबादी में 420 लोग सेना शामिल हुए. इस लिहाज से यह राज्य सबसे ऊपर है, जबकि प्रति दस लाख व्यक्तिों में चार भर्तियों के साथ गोवा सबसे निचले पायदान पर है. रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात ने हर 10 लाख गुजरातियों पर लगभग 16 लोगों को सेना में भेजा. सेना ने उत्तर प्रदेश में प्रत्येक 10 लाख लोगों पर 28, उत्तराखंड में प्रत्येक 10 लाख लोगों पर 271 और पंजाब में प्रत्येक 10 लाख की आबादी पर 174 लोगों की भर्ती की. हिमाचल प्रदेश प्रत्येक 10 लाख पर 402 पुरुषों के साथ इस टेबल में शीर्ष पर है.

कांग्रेस का आरोप है कि अग्निपथ योजना युवा विरोधी है

ये आंकड़े आपको बताएंगे कि इस योजना की वजह से बीजेपी के लिए हिमाचल विधानसभा चुनाव क्यों भारी पड़ सकता है. करीब 76 लाख की आबादी वाले इस पहाड़ी राज्य में लगभग 1.20 लाख लोग सेना के मौजूदा जवान हैं और करीब-करीब इतनी ही संख्या में पूर्व सैनिक हैं. हिमाचल के अधिकतर सैनिक कांगड़ा, बिलासपुर, हमीरपुर और ऊना जैसे क्षेत्रों से आते हैं. इन इलाकों को बीजेपी का गढ़ माना जाता है. अग्निपथ योजना को लेकर उम्मीदवारों में नाराजगी को देखते हुए, हिमाचल कांग्रेस के नेताओं को विधानसभा चुनाव में इन क्षेत्रों से बड़ी संख्या में वोट मिलने की उम्मीद है. साथ ही कांग्रेस की नजर पेंशन योजना को लेकर सरकारी कर्मचारियों में फैली नाराजगी पर भी टिकी है.

कांग्रेस का आरोप है कि अग्निपथ योजना युवा विरोधी है और यह सेना को “खत्म” कर देगी. हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के सीनियर नेता सुखविंदर सिंह सुक्खू के हवाले से मीडिया में आई खबरों में कहा गया है, “अग्निपथ योजना में चार साल के छोटे अनुबंध के कारण हिमाचल प्रदेश से सेना में शामिल होने वाले हजारों युवाओं को कोई फायदा नहीं होगा. इससे चुनाव पर असर पड़ेगा.” पूर्व मंत्री और एआईसीसी सेक्रेटरी सुधीर शर्मा और हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव केवल सिंह पठानिया ने इस योजना के खिलाफ कांगड़ा जिला प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा है. कांग्रेस ने शिमला में अग्निपथ योजना के खिलाफ जुलूस निकाला. हिमाचल के राजनीतिक परिदृश्य में आम आदमी पार्टी की नई एंट्री हुई है. यह पार्टी अब अग्निपथ योजना को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है. इसने पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन किया है. आप की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष सुरजीत ठाकुर ने अग्निपथ योजना के खिलाफ राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर को पत्र भी लिखा है. अपने पत्र में ठाकुर ने लिखा है, “सेना में इस विवादास्पद अनुबंध भर्ती ने कई उम्मीदवारों के सपने को बर्बाद कर दिया है. सरकार को तुरंत इसे वापस लेना चाहिए और नियमित भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू करना चाहिए.”

गुजरात, जो उन राज्यों में से है जहां सेना में सबसे कम लोग शामिल होते हैं, मेंअग्निपथ योजना का विरोध काफी कम हो गया है. हालांकि, विभाजित कांग्रेस अग्निपथ योजना विरोधी भावनाओं को भुनाने की कोशिश कर रही है. प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा कि उनकी पार्टी इस योजना के खिलाफ रैली करेगी. उनके मुताबिक, “अग्निपथ योजना के फायदे गिनाने वाले बीजेपी नेताओं को पहले अपने अतीत को देखना चाहिए. कांग्रेस सरकार के दौरान, खुद बीजेपी नेता वीके सिंह रिटायरमेंट की उम्र 60 से बढ़ाकर 65 करने के लिए कोर्ट गए थे. पेंशन राशि बढ़ाने के लिए भी उन्होंने अदालत का रुख किया था. वह अग्निपथ योजना के फायदे कैसे बता सकते हैं?”

बैकफुट पर भविष्य के सैनिक?

सेना ने 2018-19 में 53,431 और 2019-20 में 80,572 उम्मीदवारों की भर्ती की थी. इसके अगले दो वर्षों तक कोई भर्ती नहीं हुई. 2020-21 और 2021-22 के दौरान नौसेना और वायुसेना में की गई भर्तियों की संख्या क्रमशः 8,269 और 13,032 थी. 2020-21 में, 97 भर्ती रैलियों की योजना बनाई गई थी, जिनमें से केवल 47 रैलियां आयोजित की जा सकीं और भर्ती प्रक्रिया के निलंबन से पहले इनमें से केवल चार रैलियों के लिए कॉमन इंट्रेंस एग्जाम (CEE) आयोजित की जा सकी. इसके अलावा, वर्ष 2021-22 में 87 भर्ती रैलियों की योजना बनाई गई थी, जिनमें से अब तक केवल चार आयोजित की गई हैं लेकिन कॉमन इंट्रेंस एग्जाम (CEE) नहीं लिया जा सका है. खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें. (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, आर्टिकल में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं.)

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