Agnipath Protests: प्रदर्शनकारियों ने 5 दिन में रेलवे के फूंक डाले 1 हजार करोड़, 5 साल में हादसों की तुलना में 6 गुना ज्यादा नुकसान

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पिछले दिनों केंद्र सरकार की ओर भारतीय सेना में भर्ती की नई सैन्य भर्ती अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) शुरू किए जाने के खिलाफ बिहार और उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शन के दौरान बिहार से लेकर तेलंगाना तक कई जगहों पर रेलवे की संपत्तियों (Railway Properties) को खासा नुकसान पहुंचाया गया, उसे तोड़ दिया गया, आग लगा दी गई या बर्बाद कर दिया गया. इस हिंसक प्रदर्शन से भारतीय रेलवे (Indian Railways) को 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है, इसमें पिछले कुछ दिनों में हुए टिकट कैंसिलेशन के कारण यात्रियों को की गई भरपाई भी शामिल है.

सरकार की योजना के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सबसे ज्यादा रेलवे की संपत्ति को ही नुकसान पहुंचाया और दर्जनों ट्रेनों को आग के हवाले कर दिया. इससे पहले 18 जून को रेलवे की ओर से कहा गया था कि महज चार दिनों के विरोध प्रदर्शन में उसे 700 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इसके अलावा 60 करोड़ से अधिक टिकट भी रद्द कराए गए.

पिछले 5 सालों में पूरे देश में 313 रेल हादसों में रेलवे को 179 करोड़ से अधिक की संपत्ति का नुकसान हुआ है. 2016-17 में कुल 104 रेल हादसों में 61.43 करोड़ का तो 2017-18 में 73 हादसों में 33.56 करोड़, 2018-19 में 59 हादसों में 28.56 करोड़, 2019-20 में 55 हादसों में 26.99 करोड़ और 2020-21 में 22 हादसों में 28.46 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा था. इस तरह से पिछले 5 सालों में देश को रेल हादसों की वजह से 179 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है.

5 दिन में देशभर में फूंक डाले 21 ट्रेन

विरोध-प्रदर्शन की वजह से शुरू हुए आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों ने देशभर में 21 ट्रेनों को आग लगा दी. इनमें अकेले बिहार में 12 ट्रेनों की 60 बोगियों को आग की भेंट चढ़ा दिया गया. यही नहीं 12 रेल इंजनों को स्वाह कर दिया गया. साथ ही 21 से अधिक रेलवे स्टेशनों पर प्रदर्शनकारियों ने भारी तोड़-फोड़ की और आगजनी भी की. प्रदर्शनकारियों के हिंसक प्रदर्शन को देखते हुए ट्रेनों के परिचालन पर भी असर पड़ा और इस दौरान 922 ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह से रद्द करना पड़ गया.

बिहार की बात करें तो प्रदर्शन की वजह से अकेले यहां पर 280 करोड़ का नुकसान हुआ है. बिहार में हिंसक प्रदर्शन के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान मध्य पूर्व रेलवे जोन में हुआ. 5 दिन के प्रदर्शन में इस जोन को 241 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है.

देखा जाए तो रेलवे को एक दशक में इतनी बड़ी संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ है, जितना पिछले कुछ दिनों में प्रदर्शन के दौरान हुआ है. अब तक, भारतीय रेलवे को जितना नुकसान हुआ है वो पिछले 10 सालों के दौरान हुए कुल नुकसान से भी अधिक है.

एक स्लीपर और एसी कोच बनाने में कितनी आती है लागत?

रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, एक सामान्य कोच को तैयार करने में 80 लाख रुपये खर्च होते हैं, जबकि एक स्लीपर कोच और एक एसी कोच की लागत करीब-करीब क्रमशः 1.25 करोड़ रुपये और 3.5 करोड़ रुपये प्रति यूनिट तक बैठती है. वहीं सरकार को एक रेल इंजन बनाने के लिए 20 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने पड़ते हैं. 12 कोच वाली एक पैसेंजर ट्रेन की कीमत 40 करोड़ रुपये से अधिक होती है जबकि 24 कोच वाली ट्रेन की लागत 70 करोड़ रुपये से अधिक.

देश में किसी भी तरह का प्रदर्शन हो, चाहे विरोध हो या आंदोलन, सबसे ज्यादा नुकसान रेलवे को होता है क्योंकि रेलवे की संपत्तियों को अक्सर नुकसान पहुंचाया जाता है. इससे पहले इस साल जनवरी में, बड़ी संख्या में उम्मीदवारों ने आरआरबी-एनटीपीसी परीक्षा के परिणामों का विरोध किया और जमकर प्रदर्शन किया था.

रेल मंत्रालय से मिले आंकड़ों के अनुसार 2020-21 में बिगड़ती कानून व्यवस्था और कई विरोध प्रदर्शन से रेलवे को 467.20 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ. जबकि इससे पहले 2019-20 में इसे करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा था.

रेल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया तो 5 साल की कैद

दूसरी ओर, रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाना आपराधिक अपराध की श्रेणी में आता है और लोगों को इसके लिए 5 साल तक की कैद की सजा हो सकती है. रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 151 में दंड का प्रावधान है. धारा 151 में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी रेलवे संपत्ति को आग लगाकर, विस्फोटकों का इस्तेमाल करके, या फिर किसी अन्य तरीके से नुकसान पहुंचाता है, तो उसे जुर्माना या कैद मिल सकता है या फिर दोनों से दंडित किया जा सकता है. कैद की अवधि पांच वर्ष तक की हो सकती है.

नियम के मुताबिक रेलवे की संपत्ति में रेलवे ट्रैक, पुल, स्टेशन भवन (station buildings), गाड़ी, लोकोमोटिव, सिग्नल सिस्टम, दूरसंचार प्रणाली, इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन और ब्लॉक डिवाइस आदि आते हैं. इनके अतिरिक्त, केंद्र सरकार की वे सभी संपत्तियां, जिनके नुकसान से रेलवे के संचालन में समस्या आ सकती है, उन्हें भी रेलवे की संपत्ति के रूप में माना जाएगा.

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