#Ab Uttar Chahiye: मज़हबी शोर पर ‘पाबंदी’, सभी धर्मों की रज़ामंदी? आपसी सौहार्द के लिए सिर्फ एकता का दिखावा नाकाफी

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देश में आज सार्वजनिक तौर पर होने वाले धार्मिक कार्यक्रम को लेकर टकराव और तनाव जैसा माहौल बना हुआ है. ऐसे में सिर्फ गंगा-जमुनी संस्कृति कहने से काम नहीं चलेगा. तथाकथित भाईचारा दिखाने के लिए फोटो खिंचवाने से काम नहीं चलेगा. अगर दिखावे से ही काम चल जाता तो आज भारत को यह दिन नहीं देखना पड़ता. 2022 के भारत में 8 से ज्य़ादा राज्यों में रामनवमी और हनुमान जयंती पर हिंसा हुई. ऐसे हालात में देश को आज सिर्फ सर्वधर्म सम्मेलन की जरूरत नहीं है, इससे मजहबी हिंसा नहीं रुक सकती. इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत है.

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