50 सालों में 17 हजार से ज्यादा लोगों की जान लेने वाली लू आखिर चलती क्यों और इसके बनने के पीछे के भौगोलिक कारण क्या हैं!

Heat Wave

इस बार मार्च में गर्मी ने 122 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है. अप्रैल की शुरुआत से ही गर्म हवाएं और लू (Heat Wave) चलने लगी हैं. हर साल तेजी से बढ़ता तापमान (SummerTemperature) आम लोगों पर कहर बरपा रहा है. बढ़ती गर्मी हीट वेव या आम भाषा में कहें तो लू को जन्म देती हैं. लू आम लोगों के लिए काफी जानलेवा साबित होती हैं. बीते 50 सालों में 17000 से ज्यादा लोगों की जान लू के चलते गई है. लेकिन क्या आपने सोचा है कि आखिर वो कौन से भौगोलिक कारण होते हैं जिनके चलते लू चलती है? जानिए लू से जुड़े हर जरूरी सवालों के जवाब.

लू या हीट वेव क्या है?

आम भाषा में समझें तो गर्मियों में चलने वाली अत्यधिक गर्म हवाओं को लू कहा जाता है. भारत में मई और जून के दौरान सबसे ज्यादा लू चलती हैं. कई बार ये दो महीने से ज्यादा दिनों तक भी चल सकती हैं. मौसम विभाग के मुताबिक इसे सामान्य तापमान से 5 से 6 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक इजाफे के रूप में परिभाषित किया है. अगर पांच दिनों तक लगातार अधिकतम तापमान, औसत तापमान की तुलना में 5 डिग्री सेल्सियस अधिक होता है.

जब मैदानी इलाकों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी इलाकों का 30 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है तो लू चलने लगती है. तापमान के आधार पर तय किया जाता है कि लू चलना कौन सी श्रेणी में आता है, खतरनाक या कम खतरनाक? जब तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच जाता है तो उसे खतरनाक श्रेणी में माना जाता है. तटीय इलाकों में 37 डिग्री सेल्सियस पर लू चलने लगती हैं. अमेरिका की राष्ट्रीय मौसम सेवा के हिसाब से माने तो जब असामान्य रूप से गर्म और असामान्य रूप से आर्द्र मौसम दो दिन से ज्यादा या उससे अधिक भी हो सकता है.

लू क्यों चलती है!

आसान शब्दों में समझें तो लू फंसी हुई गर्म हवा होती है. ये उन हालातों में चलती है जब उच्च वायुमंडलीय दबाव एक क्षेत्र में चला जाता है और 2 या उससे ज्यादा दिनों तक बना रहता है. जब उच्च दबाव 3 हजार से 7600 मीटर ऊपर मजबूत हो जाता है और ऐसे हालात कई दिनों या हफ्तों तक रह सकते हैं. इसके बाद उच्च दाब वायु को नीचे की ओर ले जाता है और ये फोर्स धरती के पास हवा को बढ़ने से रोकता है. ये हवा एक टोपी की तरह काम करती है.

राज्यों में चलती है हीट वेव

भारत में मार्च के आखिर से जून के दौरान उत्तर-पश्चिमी भारत, मध्य, पूर्व और उत्तर प्रायद्वीपीय भारत के मैदानी इलाकों में हीट वेव यानि लू चलती है. इन क्षेत्रों में आने वाले राज्यों में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्से शामिल हैं. कई बार केरल और तमिलनाडु जैसे तटीय इलाकों में भी लू चलती है.

लू से नुकसान!

लू इंसानों के साथ साथ जानवरों को भी प्रभावित करती है. इसके चलते शरीर में पानी की कमी होना, कमजोरी, चक्कर, सिर दर्द जैसे कई लक्षण देखने को मिलते हैं. मांसपेशियों में ऐंठन, उलट और हीट स्ट्रोक भी होता है. ज्यादा दिक्कत होने पर शरीर में अकड़न, सूजन, बेहोशी और बुखार भी आ सकता है. शरीर का तापमान बढ़ने पर दौरे पड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है.

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