बारिश के बाद खेतों में नमी से प्याज की फसल में लग रही ये बीमारियां, नुकसान से बचना है तो ऐसे करें बचाव

Disease in onion crop

बारिश के बाद खेतों में इस समय काफी नमी है जो प्याज की फसल के बेहद खतरनाक है. प्याज में इन तीन बीमारियों का प्रकोप सबसे ज्यादा देखने को मिलता है. ऐसे में इगर समय रहते दनकी पहचान कर उनका उचित प्रबंध न किया जाए तो किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

प्याज की फसल को इन बीमारियों से कैसे बचाएं, इस बारे में टीवी 9 हिंदी ने बात की राजस्थान के सरमथुरा धौलपुर के सहायक कृषि अधिकारी पिन्टू मीना पहाड़ी से. वे बताते हैं कि इन दिनों एन्थ्रेक्नोज / ट्विस्टर ब्लाइट (पत्ती मोड़क/जलेबी), कंद सड़न इसके अलावा सफेद लट का भी प्रकोप प्याज की जड़ों में देखा जा रहा है जिसकी वजह से किसान बेहद चिंतित नजर आ रहे है. वे कहते हैं अगर थोड़ा भी ध्यान दिया जाए तो इनसे फसलों को बचाया जा सकता है.

अब बात करते हैं इनके नियंत्रण की

इसमे सस्ती एवं कारगर दवाई है कार्बेन्डाजिम 75%WP + मैनकोजेब 63% WP 2 ग्राम दवा को प्रति लीटर पानी के हिसाब से मिलाकर ड्रेंचिंग करें.
कॉपर ऑक्सी क्लोराइड 50% WP 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से ड्रेंचिंग करें.
यदि ये ना मिले तो एजॉक्सिस्ट्रोबिन 11% + टेबुकोनजोल 18.3% SC को 1 मिली ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से ड्रेंचिंग करें.

नोट:- एक बीघा में कम से कम 6-7 टंकी पानी का स्प्रे करें. पौधे को बरसात की तरह ढंग से भिगो दें, जिन खेतों में प्याज की गांठ (कंद) के पास से मिट्टी हट चुकी वहां पर आप मौषम ठीक होते ही पुनः मिट्टी चढ़ा दें जिससे कि प्याज का आकर और बेहतर बन सके.

काफी जगह व्हाइट ग्रब (सफेद लट ) की भी शिकायत है. इसमें क्लोरोपॉयरीफॉस 50% EC + साइपरमेथ्रिन 5% EC को 500 ग्राम प्रति बीघा के हिसाब से रेत में मिलाकर पाउडर की तरह भुरकाव करने से काफी अच्छे परिणाम मिलते हैं.
मेटारेजियम एनीसीपोली जैविक फफूंद इसमे काफी कारगर इलाज है साबित हुआ है.

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