IARI ने धान किसानों के लिए जारी किया अलर्ट, इस मौसम में फसल को नुकसान पहुंचा सकता है यह रोग, ऐसे करें बचाव

Paddy Diseases

देश में खरीफ के मौसम में सबसे अधिक धान की खेती की जाती है. सिंतबर का महीना बीतने में अब सिर्फ 10 दिनों का समय बचा है ऐसे में धान की फसल  भी अब बाली देने लगेगी. धान के पौधों के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण होता है. इस समय में किसानो को अपने खेतों पर खास ध्यान देना चाहिए. इसलिए भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के धान के किसानों के लिए सलाह जारी किया है.उसके मुताबिक किसान अपने धान की खेती को सुरक्षित रख सकते हैं. किसान भाई इससे नुकसान से बच सकते हैं.

अब से कुछ दिनों बाद फसल कटाई के लिए तैयार हो जाएंगे. ऐसे में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के वैज्ञानिकों ने धान किसानों को सतर्क कर दिया है. संस्थान के वैज्ञानिकों ने बताया है कि  इस मौसम में धान में ब्लाइट रोग होने की संभावना रहती है. यह एक बैक्टिरिया जनित रोग है, जिसका प्रकोप पूरे खेत में एक साथ शुरू नहीं होता बल्कि पैच में होता है. इसके कारण प्राथमिक स्तर पर इस रोग की पहचान करना और इलाज शुरू करना मुश्किल हो जाता है.

ब्लाइट रोग के लक्षण और उपाय

घान में ब्लाइट रोग होने पर इसकी पत्तियां, फूल, फल और तने में भूरे धब्बे दिखाई देते हैं. या फिर पीलापल दिखाई देता है. इसके कारण पौधे मुरझाने लगते हैं और मरने लगते हैं. अगर आपको अपने खेत में ऐसे लक्षण दिखाई दे तो 150 लीटर पानी में 1.25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से कैम्फर हाइड्रॉक्साइड का पौधों पर छिड़काव करें. इसका छिड़काव 15 दिनों के अंतराल पर करें.

बासमती चावल के लिए सलाह

इस मौसम में बासमती की फसल में फाल्स स्मट नामक रोग के आने की संभावना काफी अधिक होती है. इस रोग के कारण धान के दाने आकार में फूल जाते हैं.  इसके उपचार के लिए  ब्लाइटोक्स  50 को 500 ग्राम प्रति एकड़  पानी में मिलाकर छिड़काव करें और 10 दिनों के अंतराल पर 2-3 बार छिड़काव करें.

बाजरा, मक्का के लिए सलाह

इस सीजन में बाजरा , मक्का , सोयाबीन और सब्जियों के पौधों को खरपतवार से दूर रखना सबसे जरूरी है. इसके साथ साथ सभी दलहनी फसलों, मक्का और सब्जियों में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें.

सब्जी की खेती के लिए सलाह

जिन किसानों के टमाटर, हरी मिर्च, बैगन और अगेती फूलगोभी के पौधे तैयार हैं, उन्हें मौसम को ध्यान में रखते हुए उचित जल निकासी के साथ उभरे क्यारियों (या मेड़) पर लगाया जाना चाहिए.

फसलें जो अभी बोई जा सकती हैं

किसान इस मौसम में स्वीट कॉर्न (माधुरी, विन ऑरेंज) और बेबी कॉर्न (HM-4) बो सकते हैं. इसके लिए जल निकासी की समुचित व्यवस्था करें. सरसों की अगेती बुवाई के लिए पूसा सरसों-28, पूसा तारक आदि के बीजों की व्यवस्था कर खेत की तैयारी करें.इस मौसम में किसान उच्च मेड़ पर मूली (पूसा चेतकी), पालक (पूसा भारती), चौलाई (पूसा लाल चौलाई, पूसा किरण) आदि फसलें बो सकते हैं. प्रमाणित या उन्नत बीज से ही बुवाई करें. साथ ही इस मौसम में किसान मेड़ों पर गाजर की बुआई कर सकते हैं. बीज दर 4.0 किग्रा प्रति एकड़ होगी. बिजाई से पहले बीज का उपचार करें. खेत में देशी खाद, पोटाश और फास्फोरस उर्वरक अवश्य डालें.

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