2025 तक टीबी से मुक्त होगा भारत, नि-क्षय मित्र योजना से मिलेगा लाखों मरीजों को लाभ

टीबी की बीमारी से देश को निजात दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत’ अभियान शुरू किया है. इसका लक्ष्य है कि 2025 तक भारत को पूरी तरह से टीबी मुक्त बनाया जाए.

प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत योजना के लॉन्च के वक्त राष्ट्रपति दौपदी मुर्मू और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया

टीबी की बीमारी से देश को निजात दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत‘ अभियान शुरू किया है. इसका लक्ष्य है कि 2025 तक भारत को पूरी तरह से टीबी मुक्त बनाया जाए. इसी के तहत सरकार ने ‘नि-क्षय मित्र’ योजना शुरू की है. इस अभियान को जनता का काफी समर्थन मिल रहा है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि योजना के शुरू करने के बाद से अब तक 9,57 लाख मरीजों को सपोर्ट करने के लिए लोग आगे आए हैं.

‘नि-क्षय मित्र’ प्रोग्राम के तहत कोई भी व्यक्ति, एनजीओ या गैर सरकारी संस्थान टीबी के मरीजों को ‘गोद’ ले सकते हैं. गोद लेने के बाद उन मरीजों को न्यूट्रीशन देने और दवाइयां मुहैया कराने का काम करेंगे. इस पूरे आंदोलन को जनता से बहुत अच्छा समर्थन मिल रहा है. वहीं स्वास्थ्य विभाग ने न्यूट्रीसन बास्केट के लिए शाकाहारी और मांसाहारी ऑप्शन्स दिए हैं. कुछ लोगों ने ‘नि-क्षय मित्र’प्रोग्राम से जुड़कर अपने अनुभव शेयर किए हैं आप भी पढ़िए.

‘डर था मोहल्ले वाले क्या सोचेंगे’

39 वर्षीय विकास कौशल सेव द चिल्ड्रन के स्वास्थ्य विभाग के हेड हैं. उन्होंने उस वक्त को याद किया जब उनके पिता इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. उन्होंने बताया कि ‘वह ट्रीटमेंट ले रहे थे लेकिन उन्होंने कभी इसके बारे में किसी बताया नहीं. उन्हे डर था कि जो लोग मोहल्ले में रह रहे हैं वह क्या कहेंगे.’ बता दें कि सेव द चिल्ड्रन उन कई कॉर्पोरेट और संगठनों में से एक है जिन्होंने ‘नि-क्षय मित्र’ प्रोग्राम को साइन किया है. उन्होंने कहा कि इस ऑर्गेनाइजेशन ने गुरुग्राम में 145 बच्चों को गोद लिया है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर सभी टीबी के मरीजों को सपोर्ट करने लग जाएं तो यह बीमारी जरूर खत्म होगी.

कौशल ने बताया कि वह पहले उत्तर प्रदेश में टीबी से ग्रसित बच्चों की मदद कर रहे थे. बाद में उन्होंने गुरुग्राम में इस पहल को जॉइन किया. उन्होंने कहा कि इस संस्थान का उद्देश्य है कि उपचार की जाने वाली बीमारियों से 2030 तक किसी भी बच्चे की मौत न हो.

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मदद करके अच्छा महसूस होता है

वहीं 45 वर्षीय डॉक्टर श्यामली वर्षने जो कि डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विस पंचकुला के ऑफिस से हैं उन्होंने कहा कि उन्हे एक 11 साल की मरीज को सपोर्ट करने में बहुत अच्छा महसूस होता है. मरीज बच्ची के लिए वह खुद ट्रीट तैयार करती हैं. जिसमें वह बोर्नवीटा, फ्रूट जैम, चीज और मेयोनीज शामिल करती हैं. ताकि उस मरीज के चेहरे पर मुस्कान आ सके. दरअसल टीबी के इलाज की वजह से उसके टेस्ट में दिक्कत आई है. इसलिए मैं चाहती हूं कि वह खाने के लिए प्रेरित हो.

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