2022-23 में अब तक 30 लाख टन गेहूं का निर्यात, सरकार कुछ और देशों के लिए दे सकती है एक्सपोर्ट को मंजूरी

Wheat export

सरकार ने बुधवार को कहा कि भारत ने इस वित्त वर्ष में अब तक लगभग 30 लाख टन गेहूं का निर्यात (Wheat Export) किया है और कुछ देशों से अनाज की आपूर्ति के अनुरोधों पर विचार कर रहा है. यानि भारत जरूरत पड़ने पर मित्र देशों को गेहूं (Wheat) का निर्यात कर सकता है. वहीं आटा निर्यात पर प्रतिबंध लगाने की योजना पर, खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा कि सरकार स्थिति की निगरानी कर रही है और उचित समय पर कदम उठाएगी. दरअसल देश में गेहूं की आपूर्ति को बनाए रखने और कीमतों में नियंत्रण के लिए सरकार ने 13 मई के गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी है. हालांकि सरकार ने उसी वक्त साफ किया था कि वो जरूरतमंद देशों की स्थितियों को देखते हुए अन्य देशों को गेहूं का निर्यात कर सकती है.

कई देशों से गेहूं के लिए अनुरोध मिले

खाद्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव पार्थ एस दास ने आज संवाददाताओं से कहा कई देशों से गेहूं के लिए अनुरोध आए हैं, उन पर विचार किया जा रहा है. दास ने हालांकि उन देशों के नामों का खुलासा नहीं किया जिन्होंने भारतीय गेहूं के लिए अनुरोध किया है. अधिकारी ने कहा कि कुछ देशों के लिए कुछ मात्रा को मंजूरी दी गई है. उदाहरण के लिए, 1.5 लाख टन गेहूं बांग्लादेश को निर्यात किया गया है. उन्होंने कहा कि देश ने चालू वित्त वर्ष में 14 जून तक कुल 29.70 लाख टन गेहूं का निर्यात किया है. इसी अवधि में गेहूं के आटे का निर्यात 2.59 लाख टन था. वहीं
वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) योजना के तहत राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी पर, सचिव ने कहा कि इसे अब पूरे भारत में लागू कर दिया गया है, इस योजना को लागू करने वाला असम अंतिम राज्य है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों और अन्य केंद्रीय मंत्रालयों को सही नीतियां और कार्यक्रम तैयार करने के लिए ओएनओआरसी के डेटा का उपयोग करने के लिए कहा गया है. डेटा का उपयोग आयुष्मान भारत, पीएम-किसान, ई-श्रम जैसी अन्य योजनाओं में किया जा सकता है.

गेहूं का उत्पादन घटने से निर्यात पर रोक

पिछले साल के मुकाबले इस साल देश से गेहूं के निर्यात में काफी तेजी आई है. हालांकि अब निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इस साल समय से पहले गर्मी शुरू होने से गेहूं की फसल पर बुरा असर पड़ा है और उत्पादन में कमी आई. जिसकी वजह से सरकार ने घरेलू सप्लाई को बनाए रखने और कीमतों पर नियंत्रण के लिए निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया है. हालांकि सरकार उपलब्धता और जरूरतमंद देशों के आग्रह पर विचार कर रही है.

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