100-200 साल तक कैसे जिंदा रहते हैं कुछ जीव? रिसर्च कर वैज्ञानिकों ने बताया- कुछ जीवों की उम्र क्यों बहुत लंबी होती है

Longest Live Creatures

कोई इंसान कितनी लंबी आयु तक जिंदा रह सकता है? 100-125 साल तक. यही न! लेकिन दुनिया में जीवों की कुछ ऐसी प्रजातियां हैं, जो सैकड़ों साल तक जिंदा रहती हैं. सबसे पहले आपके मन में कछुए का खयाल आया होगा! क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि कुछ जीव सैकड़ों साल तक कैसे जिंदा रह जाते हैं? शायद रीढ़ की हड्डी (कशेरुकी) वाले अन्य जानवरों के जीवनकाल को समझने से इस रहस्य का खुलासा होने में मदद मिल सकती है. आप भी कछुओं (Tortoise) को एक लंबा और धीमा जीवन जीने वाले जीव के तौर पर जानते होंगे! 190 साल की उम्र में, सेशेल्स का जोनाथन नामक विशाल कछुआ भूमि का सबसे उम्रदराज प्राणी (Oldest Creature) हो सकता है. लेकिन कुछ अन्य जीव भी हैं, जो दूसरों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहते हैं.

रिसर्च जर्नल साइंस में प्रकाशित फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी के रिसर्चर माइक गार्डनर और उनके अन्य साथी शोधकर्ताओं की एक शोध प्रकाशित हुआ है. यह शोध उन अलग-अलग कारणों की जांच करता है, जिनकी वजह से कुछ जीवों की उम्र बहुत लंबी होती है. यह रिसर्च सरीसृप और उभयचरों में दीर्घायु यानी लंबे जीवनकाल और उम्र बढ़ने को प्रभावित करने वाले कारकों की पड़ताल करता है.

77 प्र​जातियों के जीवों पर हुई स्टडी

माइक गार्डनर लिखते हैं, “हमने सरीसृपों और उभयचरों की 77 विभिन्न प्रजातियों (सभी ठंडे खून वाले जानवर) के दीर्घकालिक डेटा का उपयोग किया. हमारा काम 100 से अधिक वैज्ञानिकों के बीच एक सहयोग पर आधारित है जिसमें जानवरों पर 60 साल तक का डेटा है जिन्हें पकड़ा गया, चिह्नित किया गया, छोड़ दिया गया और फिर से पकड़ा गया.
इन आंकड़ों की तुलना गर्म खून वाले जानवरों की मौजूदा जानकारी से की गई, और उम्र बढ़ने के बारे में कई अलग-अलग विचार सामने आए.”

शोधकर्ताओं ने पता लगाना चाहा कि आखिर कौन-से कारक महत्वपूर्ण हो सकते हैं?

ठंडे खून वाले या गर्म खून वाले

शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने इस लोकप्रिय विचार के साथ काम किया कि ठंडे खून वाले जानवर जैसे मेंढक, सैलामैंडर और सरीसृप लंबे समय तक जीवित रहते हैं क्योंकि उनकी उम्र बढ़ने की रफ्तार धीमी होती है.

इन जानवरों को अपने शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए बाहरी तापमान पर निर्भर रहना पड़ता है. परिणामस्वरूप उनमें ‘चयापचय’ प्रक्रिया धीमी होती है. चयापचय से मतलब है- जिस दर पर वे जो खाते हैं और पीते हैं उसे ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं.

जानवर जो छोटे और गर्म खून वाले होते हैं, जैसे कि चूहे, छोटी उम्र के होते हैं क्योंकि उनका चयापचय तेज होता है – और कछुए की उम्र धीरे बढ़ती है क्योंकि उनका चयापचय धीमा होता है.

इस तर्क से, ठंडे खून वाले जानवरों में समान आकार के गर्म खून वाले जीवों की तुलना में कम चयापचय होना चाहिए.
हालांकि, शोधकर्ताओं ने पाया कि ठंडे खून वाले जानवर समान आकार के गर्म खून वाले जानवरों की तुलना में जल्दी बूढ़े नहीं होते हैं.

वास्तव में, शोधकर्ताओं ने जिन सरीसृपों और उभयचरों को देखा, उनमें उम्र बढ़ने की भिन्नता पहले की भविष्यवाणी की तुलना में बहुत अधिक थी. ऐसे में रीढ़ की हड्डी वाले जानवरों की उम्र के कारणों का पता लगाना अधिक जटिल है.

पर्यावरणीय तापमान और ग्लोबल वॉर्मिंग

एक अन्य संबंधित सिद्धांत यह है कि पर्यावरणीय तापमान (Environmental Temperature) भी जीवों की बड़ी उम्र के लिए एक कारण हो सकता है. उदाहरण के लिए, ठंडे क्षेत्रों में जानवर अधिक धीरे-धीरे भोजन संसाधित करते हैं और उनमें निष्क्रियता की अवधि होती है, जैसे हाइबरनेशन में, जिससे जीवनकाल में समग्र वृद्धि होती है.

इस परिदृश्य के तहत, ठंडे क्षेत्रों में ठंडे और गर्म रक्त वाले दोनों जानवर गर्म क्षेत्रों के जानवरों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहेंगे. शोधकर्ताओं ने पाया कि यह एक समूह के रूप में सरीसृपों के लिए सही था, लेकिन उभयचरों के लिए नहीं.

महत्वपूर्ण रूप से, यह खोज ग्लोबल वार्मिंग के प्रभावों से जुड़ी है, जिसका मतलब है कि स्थायी रूप से गर्म वातावरण में सरीसृपों की उम्र तेजी से बढ़ सकती है.

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