10 हजार की रिकवरी के लिए एजेंट ने कुचलकर की हत्या, महिंद्रा ने जताई सिंपैथी

Anand Mahindra

झारखंड के हजारीबाग में एक किसान की बेटी का महिंद्रा फाइनेंस कंपनी के एक रिकवरी एजेंट द्वारा ऐलानिया कत्ल का मामला सामने आया है. एजेंट ने ट्रैक्टर लोन के ब्याज के रूप में दस हजार रुपये ना चुकाने पर एक गर्भवती युवती को कुचलकर मार दिया. वहीं जब इस मामले में केस दर्ज होने के बाद कंपनी की किरकिरी होने लगी तो अब महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा और सीईओ अनीश शाह सामने आए हैं. दोनों ने पीड़ित परिवार के प्रति सिंपैथी जताई है और मामले की नए सिरे से जांच कराने का भरोसा दिया है.

उन्होंने कहा कि रिकवरी के दौरान थर्ड पार्टी द्वारा किए जाने वाले व्यवहार का भी आंकलन किया जाएगा. यह वारदात 15 सितंबर की दोपहर का है. बता दें कि हजारीबाग में हाईवे के पास रहने वाले मिथिलेश मेहता ने महिंद्रा फाइनेंस कंपनी से लोन लेकर ट्रैक्टर खरीदा था. लॉकडाउन के दौरान कंपनी का कलेक्शन एजेंट वसूली के लिए नहीं आया, इसलिए इस अवधि में वह कंपनी की किश्तें नहीं चुका पाए थे. लॉकडाउन खुलने के बाद जब वह किश्तें जमा करने पहुंचे तो कंपनी ने ब्याज के नाम पर मोटी राशि उनके खाते में जोड़ दी. बाद में मामला सेटल होने के बाद भी दस हजार रुपये का अंतर रह गया था.

यही दस हजार रुपये नहीं चुकाने पर कंपनी के रिकवरी एजेंट ने 15 सितंबर को उनका ट्रैक्टर उठा लिया, वहीं जब उनकी गर्भवती बेटी ने रोकने की कोशिश की तो रिकवरी एजेंट ने उसे कुचलने का ऐलान करते हुए उसके ऊपर ट्रैक्टर चढ़ा दिया था. अब महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने ट्वीट कर घटना के लिए शोक जताया है. परिवार को उन्होंने भरोसा दिया कि वह दुख की इस घड़ी में उनके साथ हैं.

घटना को लेकर क्षेत्र में आक्रोश

इस घटना को लेकर हजारीबाग समेत आसपास के इलाकों में खासा आक्रोश है. मिथिलेश ने खुद सवाल उठाया है कि क्या दो जिंदगियों की कीमत केवल दस हजार रुपये है? आखिर महज इतनी सी राशि के लिए कैसे कंपनी वालों ने उनकी बेटी और उसके अजन्मे बच्चे का ऐलानिया कत्ल कर दिया. बताया कि उनकी आंखों की सामने एजेंट ने उनकी आंखों की सामने उनकी बेटी के ऊपर दो बार गाड़ी चढ़ा दी. जबकि घटना के वक्त उनकी बेटी दो माह की गर्भवती थी.

किसान महासभा का हल्लाबोल

घटना को लेकर झारखंड किसान महासभा ने कंपनी के खिलाफ हल्ला बोल दिया है. महासभा के अध्यक्ष पंकज रॉय ने कहा कि प्राइवेट बैंक आसान प्रक्रिया का हवाला देकर भोले भाले किसानों को झांसे में लेते हैं और फिर रिकवरी के नाम पर आए दिन उन्हें प्रताड़ित करते हैं. एक बार लोन ले लेने के बाद किसानों के पास भी मरने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता. उन्होंने रिकवरी एजेंट द्वारा बुरा बर्ताव किए जाने पर भी सवाल उठाया. कहा कि उन्हें धमकी भरे फोन कॉल किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि ताजा मामले में ही यदि किसान लोन नहीं चुका पा रहा है तो उसका ट्रैक्टर नीलाम करना चाहिए, ना कि किसान या उसके परिवार को कुचलकर मार डालना चाहिए.

2018 में खरीदा था ट्रैक्टर

मिथिलेश मेहता ने बताया कि कोविड काल से ठीक पहले उन्होंने खेती के लिए ट्रैक्टर खरीदा था. इसके लिए वह सरकारी बैंक से लोन लेना चाहते थे, लेकिन महिंद्रा फाइनेंस कंपनी के प्रतिनिधियों ने उन्हें आसान प्रॉसेसिंग का झांसा दिया और लोन देकर ट्रैक्टर खरीदवा दिया. उन्होंने बताया कि नया ट्रैक्टर खरीदने से पूर्व उन्होंने ना केवल अपना पुराना ट्रैक्टर जमा कराया, बल्कि कुछ रकम अग्रिम के तौर पर भी जमा कराई. इसके बाद तय हुआ कि बाकी की रकम 14, 300 की 44 किश्तों में जमा करेगा. लेकिन दूसरे लॉकडाउन के दौरान छह माह की किश्तों के रूप में 86, 800 रुपये नहीं जमा कर पाए. उन्होंने बताया कि लॉकडाउन खुलने के बाद जब वह बैंक पहुंचे तो पता चला कि उनके खाते में 33,200 रुपये ब्याज के रूप में जोड़ दिया गया है.

कागजात मांगने पर चढ़ाई गाड़ी

मिथिलेश ने बताया कि उनकी बेटी पढ़ी लिखी थी और अपने अधिकार जानती थी. जब रिकवरी एजेंट ट्रैक्टर उठाने लगे तो उनकी बेटी ने विरोध किया. उनसे ट्रैक्टर जब्त करने संबंधी दस्तावेज दिखाने को कहा. इस बात पर रिकवरी एजेंट इस कदर भड़क गए कि गाली गलौज करने लगे. कहा कि ‘सीजर लिस्ट मांगती है, अभी तुम्हें गाड़ी से कुचलकर दिखा देंगे’ इसके बाद आरोपियों ने गाड़ी चढ़ा दी. फिर देखा कि उनकी बेटी जिंदा बच गई तो दोबारा से उसके ऊपर गाड़ी चढ़ाई और ट्रैक्टर छोड़ कर भाग गए. हजारीबाग के एसपी मनोज रतन चोथे ने बताया कि केस दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी है.