1.75 लाख बकाए के बदले ठेकेदार ने वसूले 48 लाख, सरकारी पंचायत भवन को किराए पर चढ़ाया

Whatsapp Image 2022 09 19 At 2.10.37 Pm

झारखंड राज्य के गिरिडीह जिले के बड़की सरिया में 16 साल पहले सरकार ने 6 लाख रुपए की लागत से एक सरकारी पंचायत भवन बनवाया गया था, लेकिन काम पूरा होने के बाद सरकारी पंचायत भवन को बनाने वाले ठेकेदार अशोक मंडल को 1.76 लाख रुपए का भुगतान नहीं मिला. पूरी राशि का भुगतान नहीं होने से ठेकेदार ने सरकारी पंचायत भवन को बजाए सरकार को हैंडओवर करने के अपने मर्जी से पूरे सरकारी पंचायत भवन को ही किराए पर चढ़ा दिया.

बता दे कि गिरिडीह जिले के बड़की सरिया में बने सरकारी पंचायत भवन के पांच कमरे के साथ-साथ बाहर की दुकानें भी ठेकेदार ने किराए पर दे दी है.बड़की सरिया में बने पंचायत भवन के 1.75 लाख रुपये भुगतान बकाया के बदले ठेकेदार पंचायत भवन को किराए पर चढ़ाकर, अब तक तक 48 लाख रुपए किराया वसूल चुका है. सबसे आश्चर्य की बात यह है कि आज तक सरकार और प्रशासन इससे बेखबर है. कभी भी अवैध कब्जा हटाने की कोई कोशिश नहीं की गई.

2006 का है मामला

दरअसल यह पूरा मामला राज्य के गिरिडीह जिले के बड़की सरिया ग्राम पंचायत भवन का है. साल 2006 में एनआरईपी की संपूर्ण ग्रामीण योजना के तहत यहां दो मंजिला पंचायत भवन बनाने का ठेका स्थानीय ठेकेदार अशोक मंडल को मिला था. ठेकेदार अशोक मंडल के अनुसार उसने-युद्धस्तर पर काम कराकर उसी साल पंचायत भवन का निर्माण पूरा कर लिया. पंचायत भवन के निर्माण में उसने सारी जमा पूंजी भी लगा दी थी.

लेकिन विभाग की ओर से केवल दो किस्तों में 4.24 लाख रुपए का ही भुगतान किया गया. बाकी के 1.76 लाख रुपए का भुगतान नहीं मिलने पर ठेकेदार ने पूरे पंचायत भवन को ही अपने कब्जे में ले लिया और पैसे वसूलने के लिए इसे किराए पर दे दिया. इससे उसे हर महीने 25 हजार रुपए मिलते हैं.

एसडीओ ने कहा- जरूर कार्रवाई करूंगा

गिरिडीह जिले में भ्रष्टाचार का अनोखा मामला उजागर होने एसडीओ कुंदन कुमार ने कहा है कि किसी ने इसे लेकर शिकायत नहीं की है, अगर पंचायत भवन पर कब्जा है , जरूर कार्रवाई करूंगा. वहीं बड़की सरिया गांव के स्थानीय लोगों ने बताया कि पंचायत भवन से कब्जा हटाने के लिए कई बार बीडीओ से लेकर डीसी तक को अवगत कराया गया है लेकिन कोई कार्यवाई नहीं हुई.

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन और सरकार मौन क्यों है? जबकि प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर नेताओं तक को सरकारी भवन पर अवैध कब्जे की जानकारी है. आखिर कौन भ्रष्टाचार को संरक्षण दे रहा है?