हैरतअंगेज: प्रोफेसर द्वारा ट्रांसजेंडर छात्र को ‘सर’ बोलने पर फजीहत, यूनिवर्सिटी देगी 3 करोड़ का मुआवजा

प्रोफेसर और एक ट्रांसजेंडर छात्र (Transgender Student) की मुंहजुबानी लड़ाई के फेर में यूनिवर्सिटी बे-वजह ही फंस गई. उस हद तक फंस गई कि अब छात्र और प्रोफेसर एक तरफ हो गए. अपने गले में फंसे इस फंदे को निकालने के लिए यूनिवर्सिटी (Shawnee State University) अब प्रोफेसर को, चार लाख अमेरिकी डॉलर यानी 3 करोड़ भारतीय मुद्रा देकर अपनी गर्दन इस आफत से निकाल सकेगी. इस अजीबोगरीब मगर बेहद दिलचस्प लड़ाई (American University) में खास बात यह है कि जिन दो पक्षों में झगड़ा शुरू हुआ था. उनकी लड़ाई तो खत्म भी हो चुकी है. लेकिन इसके बाद भी यूनिवर्सिटी को अपनी जेब से भारी-भरकम मुआवजा राशि भरनी पड़ रही है. अपितु यूनिवर्सिटी ने भी मामले को सही तरीके से समझे बिना ही, जल्दबाजी में प्रोफेसर (Professor Nicholas Meriwether) से पंगा ले लिया था.

उसी पंगा की कीमत अब यूनिवर्सिटी को चार लाख अमेरिकी डॉलर के रूप में अदा करनी पड़ रही है. दरअसल यह किस्सा है दुनिया के सुपर पावर देश अमेरिका की Shawnee State University का. फिलॉसफी के प्रोफेसर का नाम है निकोलस मेरीवेदर (Professor Nicholas Meriwether). बात है सन् 2018 की जब प्रोफेसर निकोलस मेरीवेदर ने क्लास में एक ट्रांसजेंडर छात्र को “सर” के संबोधित कर दिया. क्लास में तो छात्र चुप्पी साधे रहा. जब क्लास खतम हुई तब छात्र ने प्रोफेसर से कहा कि वे (प्रोफेसर साहब) उसे (ट्रांसजेंडर छात्र को) पुल्लिंग (सर) से नहीं वरन् स्त्रीलिंग के सर्वनाम से संबोधित किया करें.

छात्र की शिकायत से हड़बड़ाई यूनिवर्सिटी

इसके पीछे ट्रांसजेंडर स्टूडेंट ने यह तर्क भी अपने प्रोफेसर को दिया कि मैं यानी वह छात्र खुद को महिलाओं की श्रेणी में मानता है. प्रोफेसर निकोलस मेरीवेदर से पीड़ित छात्र ने यह भी कहा था कि, वे (प्रोफेसर) क्लास में उसे केवल उसके (छात्र के) पहले या अंतिम नाम से ही बुलाएं. इतने पर ही मगर गुस्साए छात्र को तसल्ली नहीं हुई. लिहाजा उसने प्रकरण की शिकायत यूनिवर्सिटी प्रशासन से कर दी. न्यूज एजेंसी CNA के मुताबिक, यूनिवर्सिटी ने आरोपों की अपनी एक आंतरिक कमेटी से जांच कराई. जिसमें प्रोफेसर को यूनिवर्सिटी ने तत्काल एक शोकॉज नोटिस जारी कर दिया. यूनिवर्सिटी ने उस शोकॉज नोटिस में आरोपी प्रोफेसर से पूछा था कि, वे यूनिवर्सिटी में प्रतिकूल वातावरण फैला रहे हैं.

हड़बड़ाई यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर को घेरा

जोकि किसी भी स्तर पर नाकाबिले बर्दाश्त है. इतना ही नहीं यूनिवर्सिटी ने आरोपी प्रफेसर को इस मामले में सख्त लहजे में कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही तक ही धमकी दे डाली. यूनिवर्सिटी ने यहां तक चेतावनी प्रोफेसर को दे डाली कि, उनका निलंबन और उनके खिलाफ उनका वेतन भी यूनिवर्सिटी द्वारा रोका जा सकता है. यूनिवर्सिटी का यह व्यवहार प्रोफेसर को बेहद नागवार गुजरा. लिहाजा बे-वजह ही यूनिवर्सिटी द्वारा मामले को दिए जा रहे तूल के चलते, प्रोफेसर घटना की सुनवाई जिला अदालत में ले गए. कोर्ट में जब सभी पक्षों के बयान हुए तो मामला पलट गया. पता चला कि जिन प्रोफेसर को आरोपी बनाकर यूनिवर्सिटी ने उन्हें तमाम चेतावनियां दे डाली थीं.

‘सर, मिस और मिस्टर’ के फेर में बवाल

वे सब अनुचित थीं. दरअसल यूनिवर्सिटी ने प्रोफेसर के खिलाफ यह सब उस स्टूडेंट के आरोपों से घबरा के कर डाला था, जिसके साथ प्रोफेसर का ‘सर-मिस्टर और मिस” बोलने-बुलवाने को लेकर मन-मुटाव हो गया था. छात्र ने यूनिवर्सिटी को धमकी दी थी कि अगर उसके द्वारा प्रोफेसर के खिलाफ तत्काल सख्त अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं की गई. तो वो कोर्ट चला जाएगा. लिहाजा छात्र की इस धमकी से हड़बड़ाई यूनिवर्सिटी ने बिना आगे पीछे और प्रोफेसर की कोई बात सुने, प्रोफेसर को ही तमाम तरह की बेतुकी चेतावनियां दे डाली थीं. जिसका परिणाम यह रहा कि छात्र की धमकियों से बचने के चक्कर में यूनिवर्सिटी अब प्रोफेसर को बे-वजह प्रताड़ित करने के फेर में फंस गई है.

यूनिवर्सिटी का यह दांव उल्टा पड़ गया

लिहाजा अब प्रोफेसर को प्रताड़ित करने और उनके अधिकारों का हनन करने की आरोपी यूनिवर्सिटी, प्रोफेसर को करीब 4 लाख यूएस डॉलर यानी करीब 3 करोड़ भारतीय मुद्रा अदा करके, आगे के कानूनी लफड़ों में फंसने से अपनी जान छुड़ाने में जुटी है. प्रोफेसर को जल्दी ही तीन करोड़ रुपए जैसी मोटी धनराशि बतौर मुआवजा अदा करने की बात यूनिवर्सिटी ने मानी भी है. खबरों के मुताबिक, यहां दिलचस्प पहलू यह भी है कि जिला अदालत में संबंधित प्रोफेसर द्वारा यह मामला ले जाया गया. तो अदालत ने मुकदमे को रद्द कर दिया. इतना ही नहीं जो यूनिवर्सिटी महज एक अदद स्टूडेंट की शिकायत पर प्रोफेसर के मौलिक अधिकारों का हनन करने पर अमादा थी,

फजीहत में फंसी यूनिवर्सिटी ने गलती मानी

अब वही यूनिवर्सिटी मान रही है कि आईंदा, प्रोफेसर निकोलस मेरीवेदर की मर्जी पर निर्भर करेगा कि वे क्लास में किस स्टूडेंट को किस सरनेम या लिंगनाम (स्त्रीलिंग-पुल्लिंग) से संबोधित करेंगे. मतलब साफ है कि कानूनन जैसे ही प्रोफसर मेरीवेदर अपने विश्वविद्यालय के ऊपर भारी पड़ने लगे तो, उनकी यूनिवर्सिटी ने बिना किसी और ज्यादा फजीहत कराए हुए ही उनके सामने ‘सरेंडर’ कर देने में ही अपनी खैरियत समझी. यहां बताना जरूरी है कि तीन करोड़ जो मुआवजा यूनिवर्सिटी द्वारा दिया जाएगा, वह पीड़ित प्रोफेसर द्वारा कोर्ट-कचहरी में वकील पर किए गए खर्चे की रकम है.

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