हिन्दी भाषा पर विवादः तमिलनाडु के मंत्री पोनमुडी ने दी सफाई, पानी पूरी बेचने वालों का उड़ाया था मजाक

K Ponmudy

तमिलनाडु (Tamil Nadu) के उच्च शिक्षा मंत्री के पोनमुडी की उस बयान को लेकर जमकर आलोचना हुई है, जिसमें उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्य में पानी पूरी (Pani Puri) कौन लोग बेचते हैं. अपने बयान पर मंत्री पोनमुडी (K Ponmudy) ने शनिवार को सफाई दी है और कहा है कि उनका मतलब था कि उत्तर से लोग काम करने के लिए दक्षिणी राज्यों में आते हैं क्योंकि उत्तरी राज्यों में कोई काम नहीं है. उन्होंने कहा, ‘तमिलनाडु के कई लोग उत्तरी राज्यों में जाकर काम करते हैं. मैंने इस अर्थ में बयान दिया कि उत्तर से कई लोग यहां आते हैं और काम करते हैं क्योंकि उत्तरी राज्यों में कोई काम उपलब्ध नहीं है.’

मंत्री की टिप्पणी भाषा विवाद पर सामने आई, जिसमें कहा जा रहा है कि उन पर हिन्दी थोपी जा रही है. दक्षिणी राज्यों में यह मुद्दा हमेशा एक संवेदनशील विषय रहा है. कोयंबटूर में सरकारी भारथिअर विश्वविद्यालय में 37वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए द्रमुक मंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार अंग्रेजी और तमिल दोहरी भाषा नीति का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध है.

मंत्री के. पोनमुडी ने कहा कि राज्य सरकार दो भाषाओं के फॉर्मूले की अपनी नीति को जारी रखेगी. मंत्री ने पूछा कि अभी शहर में ‘पानी पूरी’ कौन लोग बेच रहे हैं. उनका इशारा स्पष्ट रूप से इस पेशे में शामिल मुख्यतया हिन्दी भाषी विक्रेताओं की ओर था. मंत्री ने हिन्दी ‘थोपने’ के खिलाफ सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषम (द्रमुक) के रुख को दोहराया. पोनमुडी ने कहा कि उन्होंने इस मंच का इस्तेमाल भाषा के मुद्दे पर तमिलनाडु की भावनाओं को उजागर करने के लिए किया और राज्यपाल इससे केंद्र को अवगत करा देंगे.

हिन्दी को नहीं थोपना चाहिए- मंत्री के. पोनमुडी

उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में लंबे समय से अंग्रेजी और तमिल प्रचलन में हैं और यह कायम रहेगा, वहीं छात्र हिन्दी सहित अन्य भाषाएं सीखने के खिलाफ नहीं हैं. कई लोगों ने कहा कि अगर आप हिन्दी सीखते हैं तो आपको नौकरी मिल जाएगी. क्या ऐसी स्थिति है … यहां कोयंबटूर में देखें, पानी-पुरी कौन बेच रहे हैं. ये वे (हिन्दी भाषी) लोग हैं.’ राज्य सरकार नई शिक्षा नीति की अच्छी योजनाओं को अपनाने के लिए तैयार है लेकिन हिन्दी को नहीं थोपना चाहिए और छात्र किसी भी भाषा को तीसरे विकल्प के रूप में चुन सकते हैं, लेकिन राज्य मौजूदा प्रणाली का पालन करता रहेगा.

पोनमुडी की टिप्पणी को लेकर ट्विटर पर उनकी आलोचना की गई. मशहूर राजनीतिक टिप्पणीकार सुमंत रमण ने कहा, ‘किसी मंत्री के लिए हिन्दी बोलने वालों को पानी पूरी बेचने वाला बताना गलत और गैर-जिम्मेदाराना है. तमिलनाडु सरकार में हिन्दी भाषी आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को मंत्री से पूछना चाहिए कि क्या वे भी पानी पूरी बेचने वालों की सूची में हैं? इसके अलावा आजीविका के लिए पानी पूरी बेचने में क्या गलत है?’ तमिलनाडु सरकार की नीति की आलोचना करते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष नारायणन तिरुपति ने कहा, ‘पानी पूरी बेचने वाले उन लोगों से बेहतर हैं जो शराब बेचते हैं और परिवारों को बर्बाद कर देते हैं.’

भाषा को लेकर अजय देवगन और किच्चा सुदीप के बीच हुई थी बहस

हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन और कन्नड़ अभिनेता किच्चा सुदीप के बीच ट्विटर पर बहस हो गई थी, जिसके बाद ‘हिन्दी भाषा थोपने’ का मामला फिर से शुरू हो गया. कन्नड़ अभिनेता ने कहा था, ‘हिन्दी अब राष्ट्रीय भाषा नहीं है.’, जिस पर देवगन ने कहा, ‘हिन्दी हमारी मातृभाषा और राष्ट्रीय भाषा थी, है और हमेशा रहेगी. जन गण मन.’

कर्नाटक के विपक्षी नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों एचडी कुमारस्वामी और सिद्धारमैया के सुदीप के बचाव में आने के बाद यह मामला जल्द ही एक राजनीतिक विवाद में बदल गया. जनता दल के नेता ने देवगन की उनके ‘हास्यास्पद व्यवहार’ के लिए आलोचना की और उन्हें ‘बीजेपी के हिन्दी राष्ट्रवाद का मुखपत्र’ करार दिया और कांग्रेस नेता ने लोगों से ‘भाषाई विविधता का सम्मान’ करने की अपील की.

(भाषा इनपुट के साथ)

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