हाथ में सिगरेट…सिर पर दारोगा की टोपी, पुलिस की गाड़ी में रौब झाड़ते हिस्ट्री शीटर की सेल्फी

कानपुर के हरबंस मोहाल थाना इलाके के हिस्ट्री शीटर सोनू का इलाके की चौकियों में अच्छा उठना बैठना है. इसके चलते वह इलाके में अपना एक छत्र राज चलाता है.

कानपुर का हिस्ट्रीशीटर सोनू घोसी.

Image Credit source: tv 9

पुलिस और अपराधियों का गठजोड़ उत्तर प्रदेश में कहीं ना कहीं अपराध को बढ़ावा दे रहा है . जहां कानपुर में पुलिस के साथ अपराधियों की यह कोई पहली तस्वीर नहीं है. इससे पहले भी कई बार पुलिस और अपराधी गठजोड़ का खुलासा हुआ है. कभी वीडियो से तो कभी तस्वीरों से हो चुका है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर पुलिस का खास हो जाए तो लोगों में खौफ पैदा होना लाजमी है. वहीं, कानपुर के हिस्ट्रीशीटर की यह तस्वीर इसलिए खींची गई है क्षेत्र में उसका रुतबा पुलिस गठजोड़ के चलते ऊंचा रहे.

दरअसल, कानपुर शहर का यह हिस्ट्री शीटर लुटेरा सोनू घोषी हरबंस माहोल थाना पुलिस की आंख का तारा बना है. यह पुलिस के साथ घूम कर चौकियों में बैठ कर पुलिस चौकी इंचार्ज के साथ उनके प्राइवेट वाहनों में घूम कर अपना जलवा बिखेर रहा है. इतना ही नहीं हिस्ट्रीशीटर सोनू घोसी दरोगा की टोपी पहनकर पुलिस की प्राइवेट कार में सिगरेट पीते हुए ले रहा है. सेल्फी लेता है और सोशल मीडिया पर वायरल करता है. अब ऐसे में पुलिस विभाग से हिस्ट्रीशीटर की नजदीकी जनता में खौफ पैदा कर रही है.

जानिए क्या हैं पूरा मामला?

सूत्रों के मुताबिक, सोशल मीडिया में वायरल हो रही एक फोटो में थाना हरबंस माहोल के एक दरोगा जी की टोपी है. वहीं, टोपी पहन उनकी ही कार में सोनू सेल्फी ले जा नजर आ रहा है. सोनू घोषी थाना हरबंस माहोल के टॉप टेन अपराधी में शामिल है. थाने के टॉप टेन अपराधी के सूची में 6 नम्बर पर है सोनू घोसी का नाम है.बता दें कि, हरबंस मोहाल थाना क्षेत्र के घसियारी मंडी का रहने वाला सोनू घोसी क्षेत्र का चर्चित लुटेरा रहा है. सोनू इस वक्त क्षेत्र में पुलिसिया रौब चल रहा है. पुलिस से अधिक निकटता के चलते खेत में होने वाले छोटे-मोटे विवाद सोनू अपने तरीके से चौकियों से से ही निपटा देता है.

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हिस्ट्री शीटर का इलाके की चौकियों में अच्छा उठना बैठना

वहीं, हिस्ट्री शीटर सोनू का इलाके की चौकियों में अच्छा उठना बैठना है. इसके चलते वह इलाके में अपना एक छत्र राज चलाता है. पुलिस भी सोनू से उसके इलाके के अपराधियों की गुप्त सूचनाएं लेकर अपने गुड वर्क को अंजाम देती हैं. अब ऐसे में कानपुर पुलिस ने एक हिस्ट्रीशीटर को अपना मुखबिर बना रखा है. ऐसे में पुलिस विभाग पर सवालिया निशान उठते हैं कि क्या कानपुर की कमिश्नरेट पुलिस इन्हीं अपराधियों की मुखबरी पर ही अपने बड़े-बड़े खुलासों के लिए आश्रित रहती है. वैसे तो इलाके में पुलिस का एक अपना एक मुखबिर तंत्र होता है. जहां समाज के बीच लेकिन अपराधियों को इतना संरक्षण देना समाज में एक गलत संदेश देता है और पुलिस की छवि को खराब करता है.

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