हाईकोर्ट के पूर्व जजों की फिर नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मांगी केंद्र से रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 224ए चीफ जस्टिस ऑफ हाईकोर्ट को यह अधिकार देता है कि वह कभी भी किसी भी समय उस कोर्ट या किसी अन्य हाईकोर्ट में नियुक्त रहे पूर्व जज की नियुक्ति फिर से बतौर जज कर सकते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने मांगी केंद्र सरकार से रिपोर्ट.

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देश की अदालतों में लंबित मामलों के निपटारे के लिए हाईकोर्ट के पूर्व जजों की नियुक्ति के मामले को आगे बढ़ाने के क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से रिपोर्ट मांगी है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से रिपोर्ट मांगकर यह जानना चाहा है कि क्या हाईकोर्ट के पूर्व जजों की ऐसी किसी नियुक्ति को स्वीकृत किया गया है या नहीं. दरअसल जजों की कमी के कारण न्यायपालिका की ओर से मामलों के निपटारे में देरी देखने को मिल रही है.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने इस बात को कहा कि देश के सभी 25 हाईकोर्ट में करीब 60 लाख मामले लंबित हैं. उन्होंने यह भी कहा कि संविधान का अनुच्छेद 224ए चीफ जस्टिस ऑफ हाईकोर्ट को यह अधिकार देता है कि वह कभी भी किसी भी समय उस कोर्ट या किसी अन्य हाईकोर्ट में नियुक्त रहे पूर्व जज की नियुक्ति फिर से बतौर जज कर सकते हैं. ऐसा राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद किया जा सकता है. विशेष रूप से नियुक्त होने वाले इन जजों का कार्यकाल दो से तीन साल का होता है.

हाईकोर्ट में एक-तिहाई नियुक्तियां होनी है

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में हुई एक सुनवाई में यह देखा था कि इलाहाबाद, बॉम्बे, मध्य प्रदेश और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट समेत कई हाईकोर्ट्स में एक-तिहाई से अधिक जजों की नियुक्ति अभी भी होनी है जबकि अदालतों में कानूनी मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. इस पीठ में जस्टिस एएस ओका और जस्टिस विक्रम नाथ भी शामिल थे. पीठ ने कहा था, ‘हम तेज न्याय के वादे को पूरा कैसे कर सकते हैं? नियमित नियुक्तियां हो नहीं रही हैं और अदालतों में केस लगातार बढ़ रहे हैं. इसलिए हमने पिछले साल सभी चीजों को दुरुस्त रखने का आदेश दिया था ताकि सभी चीजें संतुलित रहें.’

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59 लाख से भी अधिक केस लंबित

बता दें कि देश के सभी 25 हाईकोर्ट में कुल 59,52,371 मामले लंबित हैं. इनमें से करीब कम से कम 40 फीसदी केस पिछले पांच साल में सामने आए हैं. इनमें सिविल केस की संख्या सबसे अधिक है. केंद्रीय कानून मंत्रालय के मुताबिक देश के सभी हाईकोर्ट में संयुक्त रूप से 1108 जजों के पद तय हैं. लेकिन इनमें से एक सितंबर तक 326 पद अभी खाली पड़े हैं.

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